Home›Paryavaran›
Rising Pollution At Himachals Religious Sites Threatens Himalayan Ecological Balance
Himachal: धार्मिक स्थलों पर बढ़ता प्रदूषण हिमालयी संतुलन के लिए खतरा, कचरे और पेड़ कटान से बिगड़ रहा पर्यावरण
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Mon, 01 Dec 2025 01:06 PM IST
सार
स्थानीय लोग और पर्यावरणविद इसे गंभीर खतरा मान रहे हैं, क्योंकि यह न केवल जंगलों और जलस्रोतों को प्रदूषित करता है, बल्कि वन्यजीवों और स्थानीय जैव विविधता को भी नुकसान पहुंचाता है।
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख धार्मिक स्थलों में बढ़ते प्रदूषण और अनियंत्रित पर्यटन ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। राज्य में धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है, लेकिन कचरा प्रबंधन, जंगलों की सुरक्षा और निर्माण गतिविधियों पर नियंत्रण न होने से पहाड़ी क्षेत्रों में पर्यावरणीय संकट गहरा रहा है। सूखे पेड़ों की कटाई, ट्रैकिंग मार्गों पर बढ़ते प्लास्टिक कचरे, अवैध निर्माण और बढ़ते पर्यटकों की भीड़ ने हिमालय की प्राकृतिक संवेदनशीलता को गंभीर रूप से प्रभावित किया है।
केंद्रीय विश्वविद्यालय धर्मशाला के टूरिज्म एंड ट्रैवल विभाग के शोधार्थी रवीश मृगेन्द्र ने इस मुद्दे पर विस्तृत शोध कर बताया कि धार्मिक स्थलों को पर्यटन और ट्रैकिंग रूट के रूप में उपयोग करने से इलाके अत्यधिक दबाव में आ रहे हैं।
2024 में धार्मिक स्थलों पर पहुंचा रिकॉर्ड स्तर का पर्यटक दबाव
हिमाचल प्रदेश में वर्ष 2024 में 1,81,24,694 पर्यटक पहुंचे। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में 13.24 प्रतिशत अधिक है। इनमें से सबसे बड़ी संख्या धार्मिक स्थलों पर पहुंचने वाले यात्रियों की रही। रवीश मृगेन्द्र के अनुसार—
धार्मिक यात्राओं में बढ़ोतरी
कचरा प्रबंधन व्यवस्था की कमी
जंगलों का अंधाधुंध कटान
ट्रैकिंग रूट का अत्यधिक उपयोग
ये सभी कारण धार्मिक पहाड़ी क्षेत्रों में प्रदूषण को तेज गति से बढ़ा रहे हैं।
पहाड़ों पर बोतलें, रैपर और कांच की शराब की बोतलों का बढ़ता ढेर
शोध के अनुसार धार्मिक और ट्रैकिंग मार्गों के आसपास सबसे अधिक बढ़ा है।
प्लास्टिक पानी की बोतलें
शीतल पेय की बोतलें
चिप्स और स्नैक्स रैपर
कांच की शराब की बोतलें
पूजा सामग्री का कचरा
स्थानीय लोग और पर्यावरणविद इसे गंभीर खतरा मान रहे हैं, क्योंकि यह न केवल जंगलों और जलस्रोतों को प्रदूषित करता है, बल्कि वन्यजीवों और स्थानीय जैव विविधता को भी नुकसान पहुंचाता है।
देवस्थलों ने भी जताई नाराजगी, किन्नौर कैलाश यात्रा रोकी गई
धार्मिक स्थलों पर बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्थानीय देव परंपरा के अनुसार कई देवस्थानों ने नाराजगी जताई है। 2025 में पहली बार किन्नौर के कासुराज महाराज ने किन्नौर कैलाश यात्रा रोकने का आदेश दिया। ब्रह्माणी माता, नगेला दमाहरी देवता और बिजली महादेव सहित अन्य स्थानों पर भी इसी तरह की चेतावनियां दी गईं। स्थानीय देव परंपरा में पर्यावरण संरक्षण महत्वपूर्ण माना जाता है, इसलिए जब प्रकृति को नुकसान होता है, तो देवस्थल यात्राओं पर रोक या सीमित प्रवेश का निर्देश देते हैं।
श्रीखंड महादेव से मणिमहेश तक, 10 वर्षों में कई गुना बढ़ा प्रदूषण
पिछले एक दशक में जिन प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रदूषण कई गुना बढ़ा है, उनमें शामिल हैं—
श्रीखंड महादेव
कमरुनाग झील
पराशर झील
आदि हिमानी चामुंडा
चूड़धार
मणिमहेश
किन्नर कैलाश
इन स्थानों पर ट्रैकिंग बढ़ने, अनियंत्रित आवागमन और उचित सफाई व्यवस्था न होने से कचरे का ढेर लगातार बढ़ता जा रहा है।
विशेषज्ञों ने दी चेतावनी
पर्यावरणविदों ने चेतावनी दी है कि कचरा प्रबंधन, पेड़ों की सुरक्षा, अनियंत्रित पर्यटन पर रोक, धार्मिक मार्गों पर नियमन के बिना हिमालय का प्राकृतिक संतुलन खतरे में चले जाएगा। शोधार्थी रवीश मृगेन्द्र के अनुसार, “हिमाचल के धार्मिक स्थलों का बतौर पर्यटन स्थल बढ़ता प्रयोग चिंताजनक है। अगर तत्काल प्रभाव से ठोस नीति लागू नहीं की गई, तो हिमालय का पारिस्थितिकी तंत्र और धार्मिक विरासत दोनों खतरे में पड़ जाएंगे।”
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।