विज्ञापन
Home Paryavaran Niti Aayog Calls For Phased Reduction In Farm Emissions Stress On Empowering Rural Women And Climate Resilient Innovation

कृषि उत्सर्जन में चरणबद्ध कटौती की जरूरत: नीति आयोग के सदस्य ने बताई प्लानिंग, समझें सबकुछ

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Tue, 02 Dec 2025 11:07 AM IST
सार

सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय शुष्क कृषि केंद्र (ICRISAT) के महानिदेशक हिम्मंशु पाठक ने भी कृषि-खाद्य प्रणाली में व्यापक स्तर पर नवाचार की जरूरत को रेखांकित किया।

नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद
नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद ने कृषि क्षेत्र से होने वाले उत्सर्जन में तुरंत और बड़े कदमों के बजाय चरणबद्ध, सुनियोजित कटौती की जरूरत पर जोर दिया है। उनका कहना है कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए कृषि क्षेत्र में सुधार जरूरी है, लेकिन यह प्रक्रिया किसानों पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना धीरे-धीरे आगे बढ़नी चाहिए। वे एग्रीकल्चरल इकॉनोमिक्स रिसर्च एसोसिएशन (AERA) के 33वें वार्षिक सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि कृषि में महिलाओं की भूमिका तेजी से बढ़ी है और उन्हें बाज़ारों तक सीधी पहुंच दिलाना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का महत्वपूर्ण साधन हो सकता है। चंद के अनुसार, देश की कुल कार्यशील आबादी में महिलाओं की हिस्सेदारी 34 प्रतिशत है, जबकि कृषि संबंधी गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़कर 12 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि महिलाओं का योगदान, उत्पादकता और काम के प्रति समर्पण कई क्षेत्रों में पुरुषों से अधिक देखा गया है। इसलिए कृषि मूल्य श्रृंखला में महिलाओं को अधिक अवसर और बेहतर परिस्थितियां उपलब्ध कराना जरूरी है।

सम्मेलन में अंतरराष्ट्रीय शुष्क कृषि केंद्र (ICRISAT) के महानिदेशक हिम्मंशु पाठक ने भी कृषि-खाद्य प्रणाली में व्यापक स्तर पर नवाचार की जरूरत को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन से निपटना, महिलाओं की भूमिका मजबूत करना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना—ये तीनों चुनौतियां नवाचार के बढ़ते दायरे को दर्शाती हैं। पाठक ने कहा कि कृषि क्षेत्र में नई तकनीक और समाधान तभी प्रभावी होंगे, जब वैज्ञानिकों, अनुसंधान संस्थानों, सरकार, उद्योग और किसानों के बीच मजबूत सहयोग स्थापित हो।

पाठक ने कृषि अनुसंधान समुदाय से विशेष रूप से जलवायु-सहिष्णु किस्मों के विकास पर जोर देने को कहा। उन्होंने कहा कि भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए ऐसे फसल बीज जरूरी हैं, जो बढ़ते तापमान, अनियमित वर्षा और अन्य जलवायु जोखिमों को झेल सकें। उनके अनुसार, अनुसंधान के लिए अनुकूल वातावरण, पर्याप्त निवेश और बहुस्तरीय साझेदारी कृषि क्षेत्र को अधिक टिकाऊ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

दोनों वक्ताओं ने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और उत्पादकता बढ़ाने के लिए तकनीक, नीति सुधार और ग्रामीण समुदायों की भागीदारी—तीनों ही आवश्यक हैं। सम्मेलन में शोधकर्ताओं, विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं ने कृषि उत्सर्जन में कमी, कृषि-नवाचार, महिला सशक्तीकरण और बदलती जलवायु के अनुरूप कृषि रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा की।
विज्ञापन
विज्ञापन