Home›Paryavaran›
From Waste To Wealth How Indias Agri Residue Can Power A Green Economic Revolution
कचरे से कमाई तक: भारत का कृषि अवशेष बनेगा हरित अर्थव्यवस्था की नई ताकत, किसानों की बढ़ेगी आमदनी
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Mon, 24 Nov 2025 07:56 AM IST
सार
अगर भारत अपने कृषि अवशेष को उद्योगों का कच्चा माल बना दे, तो यह न केवल अपने स्थिरता लक्ष्यों को पूरा करेगा बल्कि दुनिया को भी दिखाएगा कि विकास और पर्यावरण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।
भारत में हर साल पैदा होने वाला कृषि अवशेष, जिसे अक्सर खेतों में जलाकर खत्म कर दिया जाता है, अब देश की हरित अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बन सकता है। धान, गन्ना, गेहूं और मक्के जैसी प्रमुख फसलों से पैदा होने वाला अवशेष जो अब तक प्रदूषण की बड़ी वजह माना जाता था। अब स्वच्छ ऊर्जा, जैव-आधारित उद्योग और ग्रामीण आय का नया स्रोत बनकर उभर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में हर साल 50 करोड़ टन से अधिक फसल अवशेष उत्पन्न होता है। परंपरागत रूप से इसे खेत में जलाकर हटाया जाता रहा है, जिससे दिल्ली-NCR समेत कई शहरों में गंभीर प्रदूषण फैलता है। लेकिन यही अवशेष देश को सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन इनोवेशन की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।
कचरा नहीं, कच्चा माल: उद्योग में बढ़ी मांग
धान की भूसी, गन्ने का बगास, गेहूं की पुआल और मक्के की डंठल अब केवल जैविक खाद का स्रोत नहीं रहे। उन्नत तकनीक और नई सामग्री विज्ञान के चलते इनका उपयोग अब किया जा रहा है:
जैव-आधारित पैकेजिंग
कंपोस्टेबल बायोप्लास्टिक
फाइबर, पल्प और बायो-कंपोज़िट
बायोफ्यूल और एथेनॉल उत्पादन
भारत में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर बढ़ती रोक और उपभोक्ताओं में बढ़ती जागरूकता ने कृषि-आधारित सामग्रियों की मांग कई गुना बढ़ा दी है। गन्ने के बगास से बने कंटेनर, बांस फाइबर, मक्के के स्टार्च से बने बायोफिल्म ये सब बाजार में तेजी से जगह बना रहे हैं।
किसानों के लिए नया आय मॉडल: वेस्ट से वेल्थ
फसल अवशेष अब किसानों के लिए बोझ नहीं, आमदनी का स्रोत बन सकता है। इस मॉडल के बड़े फायदे हैं:
फसल अवशेष हटाने की लागत शून्य
पराली जलाने पर लगने वाले दंड से राहत
स्थानीय प्रोसेसिंग यूनिटों को बायोमास की सीधी बिक्री
अतिरिक्त आय का नया स्रोत
कई राज्यों में विकेंद्रीकृत प्रोसेसिंग यूनिटें लग रही हैं जो अवशेष से फाइबर, पल्प और बायो-कंपाउंड तैयार करती हैं। इससे ग्रामीण स्तर पर ही मूल्य संवर्धन होता है और परिवहन लागत घटती है।
सस्टेनेबल विकल्पों की तेज बढ़ती मांग
भारत में प्लास्टिक पर नियम कड़े हो रहे हैं। कंपनियां बायोडिग्रेडेबल विकल्पों की ओर बढ़ रही हैं। उपभोक्ताओं की प्राथमिकताओं में भी बदलाव दिख रहा है। इससे कृषि अवशेष आधारित सामग्रियों को उद्योगों में बड़े पैमाने पर अपनाया जा रहा है। उदाहरण:
गन्ने के बगास से पैकेजिंग
बांस से उच्च शक्ति फाइबर
मक्के के स्टार्च से बायोडिग्रेडेबल फिल्में
इस परिवर्तन से भारत का कार्बन फुटप्रिंट घटेगा और पेट्रोलियम आधारित कच्चे माल पर निर्भरता भी कम होगी।
किसानों को जोड़ना होगा टेक्नोलॉजी और बाजार से
कृषि अवशेष के मूल्यांकन की राह में चुनौतियां भी हैं। किसानों को इसकी आर्थिक कीमत की जानकारी कम है। अवशेष संग्रह, बेलिंग और भंडारण में मशीनरी का अभाव है। उद्योगों से सीधा संपर्क भी काफी कम है। इसलिए सरकार और निजी क्षेत्र मिलकर ग्रामीण बायोमास क्लस्टर बना रहे हैं, जहां किसान अपने अवशेष को उचित दाम पर बेच सकें। श्रेड़र, बेलर और परिवहन सहायता जैसे उपकरण किसानों के लिए उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
साझेदारी से आगे बढ़ेगा मॉडल
हरित अर्थव्यवस्था की यह यात्रा केवल किसानों के भरोसे नहीं है। इसके लिए ज़रूरी है:
सरकारी नीतियां: बायोआधारित उद्योगों को बढ़ावा
उद्योग निवेश: नए बायो-मैटेरियल, रिसर्च और बड़े प्लांट
शोध संस्थान: नए, अधिक कुशल रूपांतरण तकनीक
उपभोक्ता: सतत उत्पाद खरीदने की प्रतिबद्धता
यह बहु-हितधारक मॉडल देश में एक परिपत्र (Circular) अर्थव्यवस्था की नींव तैयार करेगा।
2030 का लक्ष्य: खेतों से हरित उद्योगों तक
भारत के पास कृषि अवशेष की विशाल क्षमता है जो दुनिया में किसी भी देश से कहीं अधिक है। यदि इसे सही दिशा मिले, तो प्रदूषण में भारी कमी, मिट्टी की उर्वरता में सुधार, ग्रामीण आय में वृद्धि, बायो-आधारित उद्योगों का विस्तार और जीवाश्म-ईंधन आधारित कच्चे माल पर निर्भरता में गिरावट होगी।
यह परिवर्तन केवल वेस्ट मैनेजमेंट नहीं, बल्कि नई समृद्धि की परिभाषा है। अगर भारत अपने कृषि अवशेष को उद्योगों का कच्चा माल बना दे, तो यह न केवल अपने स्थिरता लक्ष्यों को पूरा करेगा बल्कि दुनिया को भी दिखाएगा कि विकास और पर्यावरण एक साथ आगे बढ़ सकते हैं।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।