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कब है हरियाली तीज? : शिव-पार्वती की पूजा से जुड़ा है ये पर्व, सुहागिनों के लिए खास, जानें पूरी जानकारी

गांव जंक्शन डेस्क, दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Mon, 10 Aug 2026 07:55 PM IST
सार

धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने कई जन्मों तक भगवान शिव को पाने के लिए तप किया। सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन माता पार्वती की तपस्या सफल हुई और भगवान शिव ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। इसी वजह से हरियाली तीज को शिव-पार्वती के मिलन और दांपत्य प्रेम का पर्व माना जाता है।

कब है हरियाली तीज?
कब है हरियाली तीज? - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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हिंदू पंचांग के अनुसार, हरियाली तीज का पर्व सावन मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। सुहागिन महिलाएं इस दिन अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए व्रत रखती हैं। वहीं, कुंवारी कन्याएं भी मनचाहा और योग्य जीवनसाथी पाने की कामना से हरियाली तीज का व्रत करती हैं।

हरियाली तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके पूजा करती हैं और शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमा बनाकर उनका पूजन करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन शिव-पार्वती की पूजा और व्रत कथा सुनने से वैवाहिक जीवन में सुख, प्रेम और समृद्धि बनी रहती है।

हरियाली तीज 2026 कब मनाई जाएगी?
हरियाली तीज 15 अगस्त 2026 को मनाई जाएगी। यह पर्व सावन महीने की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को पड़ता है। इस दिन महिलाएं सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर व्रत का संकल्प लेती हैं और दिनभर भगवान शिव और माता पार्वती की भक्ति करती हैं। पूजा के लिए सुबह का समय और प्रदोष काल शुभ माना जाता है। शाम के समय शिव-पार्वती की पूजा करना भी विशेष फलदायी माना जाता है।

हरियाली तीज पूजा का शुभ मुहूर्त
हरियाली तीज पर पूजा के लिए इन समयों को शुभ माना गया है-
  • प्रातःकाल पूजा : सूर्योदय के बाद सुबह 6 बजे से
  • प्रदोष काल : सूर्यास्त के बाद का समय पूजा के लिए विशेष माना जाता है
  • शुभ योग : इस दिन रवि योग, शिव योग और सिद्ध योग का संयोग बताया गया है।
पूजा के समय महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करके व्रत और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।

हरियाली तीज पर क्या करें?
हरियाली तीज के दिन महिलाएं सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनती हैं। इसके बाद पूजा स्थल की सफाई करके भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा स्थापित की जाती है। सुहागिन महिलाएं इस दिन सोलह श्रृंगार करती हैं। इसके बाद माता पार्वती को श्रृंगार की वस्तुएं अर्पित की जाती हैं। भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा और शमी पत्र आदि चढ़ाकर पूजा की जाती है। कई स्थानों पर महिलाएं गीली मिट्टी या बालू से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर उनकी पूजा करती हैं। पूजा के बाद हरियाली तीज की व्रत कथा सुनना भी इस पर्व की महत्वपूर्ण परंपरा मानी जाती है।

हरियाली तीज की पूजा सामग्री
हरियाली तीज की पूजा के लिए इन चीजों को शामिल किया जा सकता है:
  • सुहाग का सामान : सिंदूर, मेहंदी, चूड़ियां, बिंदी, महावर, काजल और आभूषण आदि।
  • शिव-पार्वती के लिए : माता पार्वती के लिए चुनरी और श्रृंगार सामग्री, जबकि भगवान शिव के लिए वस्त्र आदि।
  • प्राकृतिक पूजन सामग्री : गीली काली मिट्टी या बालू, बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र और केले का पत्ता आदि।
  • भोग सामग्री : पंचामृत, मौसमी फल और मिठाइयां जैसे घेवर आदि का भोग लगाया जा सकता है।

हरियाली तीज की व्रत कथा क्या है?
धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। कहा जाता है कि उन्होंने कई जन्मों तक भगवान शिव को पाने के लिए तप किया। मान्यता है कि सावन शुक्ल पक्ष की तृतीया के दिन माता पार्वती की तपस्या सफल हुई और भगवान शिव ने उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।

इसी वजह से हरियाली तीज को शिव-पार्वती के मिलन और दांपत्य प्रेम का पर्व माना जाता है। इस दिन व्रत कथा सुनने और शिव-पार्वती की पूजा करने से पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास बढ़ने की धार्मिक मान्यता है।

सुहागिन महिलाओं के लिए क्यों खास है हरियाली तीज?
हरियाली तीज सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष पर्व माना जाता है। महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना से व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं सोलह श्रृंगार करके माता पार्वती की पूजा करती हैं। कई जगहों पर महिलाएं समूह में तीज के गीत गाती हैं, झूला झूलती हैं और एक-दूसरे को शुभकामनाएं देती हैं।

कुंवारी कन्याएं भी रखती हैं व्रत
हरियाली तीज का व्रत केवल सुहागिन महिलाओं तक सीमित नहीं है। कुंवारी कन्याएं भी अच्छे और योग्य जीवनसाथी की कामना से यह व्रत रखती हैं। धार्मिक मान्यता है कि जिस तरह माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, उसी तरह श्रद्धा से व्रत और पूजा करने से कन्याओं को मनचाहा जीवनसाथी प्राप्त होने का आशीर्वाद मिलता है।

हरियाली तीज का क्या है महत्व?
हरियाली तीज को प्रकृति, प्रेम और सुखी दांपत्य जीवन का प्रतीक माना जाता है। सावन के महीने में चारों तरफ हरियाली होती है, पेड़-पौधों पर नई पत्तियां आती हैं और वातावरण खुशनुमा हो जाता है। इसी वजह से इस पर्व का नाम हरियाली तीज पड़ा। धार्मिक रूप से यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती के प्रेम और पुनर्मिलन से जुड़ा है। वहीं, सामाजिक रूप से यह महिलाओं के लिए उत्सव, श्रृंगार और आपसी मेल-मिलाप का अवसर भी होता है।

हरियाली तीज पर जरूर करें शिव-पार्वती की पूजा
अगर आप हरियाली तीज 2026 का व्रत रख रही हैं तो सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। माता पार्वती को श्रृंगार की सामग्री और भगवान शिव को बेलपत्र व अन्य पूजन सामग्री अर्पित करें। शाम के समय भी पूजा करके हरियाली तीज की व्रत कथा सुनें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और नियम के साथ शिव-पार्वती की पूजा करने से सुखी दांपत्य जीवन, अखंड सौभाग्य और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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