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Janmashtami Where Krishna Ate Mud Child Kanha Enjoys Unique Offering Story Of Mathura Temple
Janmashtami: जहां बचपन में कृष्ण ने खाई थी मिट्टी... वहां कान्हा को लगता है अनोखा भोग, जानें इस मंदिर की कहानी
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Fri, 04 Sep 2026 05:21 PM IST
सार
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने बाल अवस्था में इसी स्थान पर गोप-बालकों के साथ खेलते हुए मिट्टी खा ली थी। जब बलराम ने इसकी शिकायत माता यशोदा से की तो उन्होंने कान्हा से मुंह खोलने के लिए कहा। कहा जाता है कि जैसे ही यशोदा मैया ने कृष्ण के मुंह में देखा, वह हैरान रह गईं।
जहां बचपन में कृष्ण ने खाई थी मिट्टी
- फोटो : गांव जंक्शन
Krishna Janmashtami 2026: देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव को लेकर मंदिरों में आकर्षक सजावट की गई हैं। वहीं, उनकी जन्मभूमि मथुरा और पूरे ब्रज क्षेत्र में जन्माष्टमी का उत्साह देखते ही बन रहा है। ब्रज में भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़े कई ऐसे स्थान हैं, जहां आज भी सदियों पुरानी परंपराएं निभाई जाती हैं।
मथुरा के महावन स्थित ब्रह्मांड घाट का ब्रह्मांड बिहारी मंदिर भी ऐसी ही एक खास जगह है। इस मंदिर की सबसे अनोखी बात यह है कि यहां भगवान श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री या खोये के पेड़े का भोग नहीं लगाया जाता। इसके बजाय कान्हा को मिट्टी से बने पेड़े का भोग लगाया जाता है।
कृष्ण की मिट्टी खाने की लीला से जुड़ी है मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने बाल अवस्था में इसी स्थान पर गोप-बालकों के साथ खेलते हुए मिट्टी खा ली थी। जब बलराम ने इसकी शिकायत माता यशोदा से की तो उन्होंने कान्हा से मुंह खोलने के लिए कहा। कहा जाता है कि जैसे ही यशोदा मैया ने कृष्ण के मुंह में देखा, वह हैरान रह गईं।
उन्हें कान्हा के मुंह के अंदर पूरे ब्रह्मांड के दर्शन हुए। वहां उन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश समेत अनेक लोक और ब्रह्मांड दिखाई दिए। कुछ समय बाद यशोदा मैया को फिर अपनी गोद में वही नटखट बालक कृष्ण नजर आए। भगवान की इसी अद्भुत बाल लीला की याद में इस स्थान को ब्रह्मांड घाट कहा जाता है और यहां विराजमान भगवान को ब्रह्मांड बिहारी के नाम से जाना जाता है।
मिट्टी का पेड़ा है मंदिर का खास प्रसाद
भगवान कृष्ण की इसी बाल लीला के कारण ब्रह्मांड बिहारी मंदिर में आज भी मिट्टी से बने पेड़े का भोग लगाने की परंपरा है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु भगवान के दर्शन के साथ इस अनोखे प्रसाद को भी श्रद्धा से ग्रहण करते हैं। भक्त मिट्टी के पेड़े को अपने घर ले जाते हैं और परिवार, रिश्तेदारों और परिचितों में प्रसाद के रूप में बांटते हैं। श्रद्धालुओं के लिए यह सिर्फ एक प्रसाद नहीं, बल्कि भगवान कृष्ण की बाल लीला से जुड़ी आस्था का प्रतीक है।
जन्माष्टमी पर बढ़ती है श्रद्धालुओं की भीड़
जन्माष्टमी के अवसर पर मथुरा और ब्रज के कृष्ण मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। ब्रह्मांड बिहारी मंदिर में भी भक्त कान्हा के दर्शन करने और उनकी बाल लीलाओं से जुड़े इस पवित्र स्थान को देखने पहुंचते हैं। ब्रज में कृष्ण की लीलाओं से जुड़े कई धार्मिक स्थल हैं, लेकिन ब्रह्मांड बिहारी मंदिर में मिट्टी के पेड़े का भोग इसे खास पहचान देता है। जन्माष्टमी पर यहां आने वाले भक्त भगवान के दर्शन के साथ इस अनोखी परंपरा का हिस्सा भी बनते हैं।
ब्रह्मांड घाट क्यों है खास?
ब्रह्मांड घाट को भगवान कृष्ण की उस बाल लीला से जोड़ा जाता है, जिसमें उन्होंने मिट्टी खाई थी और माता यशोदा को अपने मुंह में पूरे ब्रह्मांड के दर्शन कराए थे। यही वजह है कि इस स्थान को ब्रज की प्रमुख कृष्ण लीला स्थली माना जाता है। यहां की मिट्टी के पेड़े की परंपरा आज भी श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र बनी हुई है।
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