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जन्माष्टमी आज : जानें श्रीकृष्ण पूजा का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और जरूरी सामग्री

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 04 Sep 2026 12:25 PM IST
सार

  • 4 सितंबर 2026 को मनाई जा रही है जन्माष्टमी।
  • रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक निशिता काल पूजा का समय।
  • भगवान कृष्ण को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराया जाता है।
  • माखन-मिश्री और धनिया पंजीरी का भोग लगाया जाता है।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व ब्रजभूमि में बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व ब्रजभूमि में बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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हर साल भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। इस साल शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को जन्माष्टमी मनाई जा रही है। हिंदू धर्म में इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। जन्माष्टमी के दिन भगवान कृष्ण के भक्त व्रत रखते हैं और रात 12 बजे उनकी पूजा करते हैं। 

इस दौरान बाल गोपाल को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराया जाता है। इसके बाद उन्हें नए वस्त्र पहनाकर मुकुट, बांसुरी और मोरपंख से श्रृंगार किया जाता है। भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, फल और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। मंदिरों और घरों में भगवान कृष्ण की सुंदर झांकियां सजाई जाती हैं और भजन-कीर्तन किए जाते हैं।

जन्माष्टमी 2026 पूजा का शुभ मुहूर्त
मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म रात 12 बजे हुआ था। इसलिए जन्माष्टमी की मुख्य पूजा निशिता काल यानी मध्यरात्रि में की जाती है। जन्माष्टमी 2026 का निशिता काल पूजा मुहूर्त-
  • पूजा शुरू होने का समय : रात 11:57 बजे
  • पूजा समाप्त होने का समय : रात 12:43 बजे
  • कुल समय : करीब 46 मिनट
  • अभिजीत मुहूर्त : सुबह 11:55 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक

इस दौरान भक्त भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाकर विधि-विधान से पूजा कर सकते हैं।

जन्माष्टमी पर पूजा के लिए जरूरी सामग्री
जन्माष्टमी की पूजा के लिए घर पर पहले से पूजा सामग्री तैयार कर लेना बेहतर होता है। पूजा के लिए मुख्य रूप से इन चीजों की जरूरत होती है-
  • लड्डू गोपाल की मूर्ति या तस्वीर
  • पंचामृत- दूध, दही, घी, शहद और शक्कर
  • गंगाजल
  • नए वस्त्र
  • मुकुट, बांसुरी और मोरपंख
  • पीला चंदन और अक्षत
  • तुलसी के पत्ते
  • ताजे फूल और फूलों की माला
  • माखन-मिश्री
  • धनिया पंजीरी
  • पंचमेवा, फल और मिठाइयां
  • दीपक और घी
  • कपूर, धूप और अगरबत्ती

जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण की पूजा कैसे करें?
  • पूजा स्थल को पवित्र करें : सबसे पहले पूजा स्थल की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव करके स्थान को पवित्र करें। इसके बाद हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प लें।
  • बाल गोपाल को स्नान कराएं : लड्डू गोपाल की प्रतिमा को पहले पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद गंगाजल से स्नान कराएं।
  • भगवान का श्रृंगार करें : स्नान के बाद भगवान कृष्ण को साफ और नए वस्त्र पहनाएं। इसके बाद मुकुट, मोरपंख, बांसुरी और आभूषणों से उनका सुंदर श्रृंगार करें।
  • झूले में विराजमान कराएं : बाल गोपाल को सुंदर झूले में विराजमान करें और प्रेमपूर्वक उन्हें झूला झुलाएं। इस दौरान श्रीकृष्ण के भजन और मंत्रों का जाप किया जा सकता है।
  • भगवान को भोग लगाएं : श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री, धनिया पंजीरी, पंचमेवा, फल और मिठाइयों का भोग लगाएं। भोग में तुलसी का पत्ता शामिल करना शुभ माना जाता है।
  • मंत्र जाप और आरती करें : पूजा के दौरान 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें।
  • प्रसाद बांटें : पूजा के अंत में भगवान से परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें। पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा मांगें और इसके बाद परिवार के सदस्यों व श्रद्धालुओं में प्रसाद बांटें।

जन्माष्टमी पर क्यों मनाया जाता है कृष्ण जन्मोत्सव?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की रात 12 बजे कृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है। इस दिन देशभर के मंदिरों और घरों में झांकियां सजाई जाती हैं, भगवान कृष्ण को झूले में झुलाया जाता है और भक्त 'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' जैसे भजन गाते हैं।
 
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