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हरतालिका तीज 2026: किस दिन रखें व्रत; जानें तृतीया तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Thu, 10 Sep 2026 02:27 PM IST
सार

सुहागिन महिलाओं के लिए वर्ष के सबसे महत्वपूर्ण व्रतों में शुमार हरतालिका तीज इस बार 14 सितंबर को मनाई जाएगी। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाए जाने वाले इस पर्व पर भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष पूजा-अर्चना का विधान है, जिसे अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और पति की दीर्घायु के लिए विशेष फलदायी माना जाता है। जानिए, विस्तार से...

हरतालिका तीज पर महिलाएं उपवास रखती हैं और पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना करती हैं।
हरतालिका तीज पर महिलाएं उपवास रखती हैं और पारंपरिक विधि से पूजा-अर्चना करती हैं। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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अखंड सौभाग्य, सुखी दांपत्य जीवन और पति की दीर्घायु की कामना लिए सुहागिन महिलाएं इस साल 14 सितंबर को हरतालिका तीज का व्रत रखेंगी। ज्योतिषियों के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 13 सितंबर सुबह 7:08 बजे शुरू होकर 14 सितंबर सुबह 7:06 बजे समाप्त होगी, और उदया तिथि के आधार पर व्रत 14 सितंबर को ही रखा जाएगा। 

पूजा के लिए सबसे शुभ समय सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक रहेगा। इसके अलावा ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:32 से 5:19 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक रहेगा, जिन्हें पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

निर्जला व्रत और विधि-विधान से पूजा
इस दिन कई महिलाएं निर्जला व्रत रखकर भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं। स्नान के बाद स्वच्छ या नए वस्त्र धारण कर व्रती महिलाएं व्रत का संकल्प लेती हैं और शिव, पार्वती व गणेश जी की विधिवत पूजा करती हैं। पूजा में बालू या शुद्ध मिट्टी से भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की प्रतिमाएं बनाने की परंपरा है, जिन्हें गंगाजल और पंचामृत से पूजा जाता है। भगवान शिव को बेलपत्र, शमीपत्र, धतूरा और मंदार के फूल अर्पित किए जाते हैं।

सुहाग सामग्री और दान की परंपरा
पूजा में माता पार्वती को मेहंदी, चूड़ी, बिंदी, सिंदूर जैसी सुहाग सामग्री अर्पित की जाती है। मान्यता है कि पूजा के बाद यह सामग्री किसी ब्राह्मणी या सुहागिन महिला को दान करना शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से तीज की कथा सुनती हैं और भजन-कीर्तन भी करती हैं।

शिव-पार्वती के पवित्र मिलन से जुड़ा पर्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी, और हरतालिका तीज को इसी तप व शिव-पार्वती के पवित्र मिलन से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए सुहागिन महिलाएं पति की दीर्घायु और दांपत्य सुख के लिए यह व्रत रखती हैं, जबकि अविवाहित युवतियां मनचाहे वर की कामना से इसे मनाती हैं।
 
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