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Farmers Insist Sugarcane Price Of Rs 5 500 Per Tonne Protest Only Postponed Fight Continue Until Demands Met
गन्ने के 5500 रुपये प्रति टन भाव पर अड़े किसान : आंदोलन सिर्फ स्थगित... मांग पूरी होने तक जारी रहेगी लड़ाई
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Sat, 07 Nov 2026 05:48 PM IST
सार
कर्नाटक के गन्ना किसान 5,500 रुपये प्रति टन भुगतान की मांग कर रहे हैं। चीनी मिलों के 3,600 रुपये के प्रस्ताव पर आंदोलन अस्थायी रूप से स्थगित हुआ है। महाराष्ट्र में 4,200 रुपये प्रति टन भुगतान पर सहमति बनी।
कर्नाटक के बेलगावी जिले में गन्ना किसानों ने अपना आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया है, लेकिन उनकी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी है। किसान गन्ने के लिए प्रति टन कुल 5,500 रुपये भुगतान की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि चीनी मिलों की ओर से दिया गया 3,600 रुपये प्रति टन का प्रस्ताव केवल अंतरिम व्यवस्था है।
‘द हिंदू’ की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक राज्य रायथा संघ और हसिरू सेना के अध्यक्ष चुनप्पा पुजेरी ने बताया कि किसानों ने चीनी मिलों के 3,600 रुपये प्रति टन के प्रस्ताव को अस्थायी रूप से स्वीकार किया है। हालांकि, यह सहमति इस शर्त पर दी गई है कि मिलें पहले से तय लाभ-साझाकरण फार्मूले को लागू करें। किसान राज्य सरकार से राज्य निर्धारित मूल्य (एसएपी) के रूप में 1,000 रुपये प्रति टन अतिरिक्त देने की मांग भी कर रहे हैं।
विजयपुरा जिले के किसानों ने भी राज्य की सभी चीनी मिलों में गन्ने का 3,600 रुपये प्रति टन भुगतान लागू करने और लाभ-साझाकरण व्यवस्था को बेहतर बनाने की मांग की है। किसानों के मुताबिक, जिले की 10 चीनी मिलों ने पिछले सीजन में 3,000 से 3,300 रुपये प्रति टन के बीच भुगतान किया था। इसलिए वे पूरे राज्य में गन्ने का एक समान भाव चाहते हैं।
वहीं, बागलकोट जिले के किसान नेताओं ने मिलों की ओर से दिए गए 3,600 रुपये प्रति टन के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि जब तक 5,500 रुपये प्रति टन की मांग पूरी नहीं होती, उनका विरोध जारी रहेगा।
दूसरी ओर, महाराष्ट्र में पूर्व सांसद और स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के संस्थापक राजू शेट्टी ने पुणे-बेंगलुरु राष्ट्रीय राजमार्ग पर चल रहा अपना दो दिवसीय जाम खत्म कर दिया है। राज्य सरकार की ओर से किसानों को 4,200 रुपये प्रति टन का अंतरिम भुगतान देने की घोषणा के बाद यह फैसला लिया गया।
इस भुगतान में पेराई शुरू होने से पहले 3,900 रुपये प्रति टन, सीजन खत्म होने के बाद 100 रुपये और केंद्र सरकार की ओर से चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) में संशोधन किए जाने पर 200 रुपये अतिरिक्त देने का प्रस्ताव शामिल है।
यह समझौता मंत्री हसन मुश्रीफ की ओर से बुलाई गई चीनी मिलों और किसान संगठनों की बैठक के बाद हुआ। राजू शेट्टी ने इस सफलता का श्रेय कर्नाटक और महाराष्ट्र के किसानों के साझा आंदोलन को दिया। शुक्रवार शाम को किनी टोल प्लाजा के पास राजमार्ग से जाम हटा लिया गया।
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