विज्ञापन
Home› Lokrang› Kalpvriksh› Diwali 2026 How To Buy Idol Of Goddess Lakshmi And Ganesh Ji Know Rules From Purchase To Installation

Diwali 2026: दिवाली पर कैसी खरीदें मां लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति? जानें खरीदने से लेकर स्थापना तक के नियम

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Sat, 07 Nov 2026 05:07 PM IST
सार

दिवाली 2026 पर मां लक्ष्मी और गणेश जी की नई मूर्ति खरीदने जा रहे हैं? जानें कैसी मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है, स्थापना की सही दिशा और पुरानी मूर्तियों के निस्तारण का तरीका।

लक्ष्मी-गणेश की कैसी मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है?
लक्ष्मी-गणेश की कैसी मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है? - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिवाली का त्योहार इस साल 8 नवंबर 2026, रविवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में दीपावली का विशेष महत्व है। इस दिन लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और दीपक जलाकर घर को रोशनी से सजाते हैं। दिवाली की शाम प्रदोष काल में धन और समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी और विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से पूजा करने पर घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।

दिवाली के लिए लोग बाजार से मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की नई मूर्तियां खरीदकर लाते हैं। अगर आप भी इस बार नई मूर्तियां खरीदने की तैयारी कर रहे हैं, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मूर्ति का स्वरूप, उसे खरीदने और स्थापित करने का तरीका विशेष महत्व रखता है। आइए जानते हैं कि दिवाली पर कैसी लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है और स्थापना के समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

लक्ष्मी-गणेश की कैसी मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है?
  • दोनों की अलग-अलग मूर्तियां खरीदें : मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की मूर्तियां अलग-अलग खरीदनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दोनों की अलग-अलग प्रतिमाएं रखना शुभ माना जाता है।
  • बैठी हुई मुद्रा वाली मूर्तियां चुनें : दिवाली की पूजा के लिए मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की बैठी हुई मुद्रा वाली मूर्तियां खरीदना शुभ माना जाता है। ऐसी प्रतिमाओं को घर में सुख-समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। 
  • मिट्टी या धातु की मूर्तियां खरीदें : दिवाली पर मिट्टी, चांदी, सोने या पीतल से बनी मूर्तियां खरीद सकते हैं। धार्मिक परंपराओं में इनका विशेष महत्व बताया गया है। मूर्ति खरीदते समय उसकी बनावट और गुणवत्ता का भी ध्यान रखें।
  • गणेश जी की सूंड और मूषक पर दें ध्यान : धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली की पूजा के लिए भगवान गणेश की बाईं ओर मुड़ी सूंड वाली मूर्ति शुभ मानी जाती है। मूर्ति में उनके हाथ में मोदक और साथ में वाहन मूषक यानी चूहे का होना भी अच्छा माना जाता है।
  • कमल पर विराजमान हों मां लक्ष्मी : मां लक्ष्मी की ऐसी मूर्ति खरीदना शुभ माना जाता है, जिसमें वे कमल के फूल पर विराजमान हों। उनके हाथों से धन की वर्षा या आशीर्वाद देने की मुद्रा होनी चाहिए। धार्मिक मान्यताओं में कमल पर विराजमान मां लक्ष्मी को सुख और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है।
  • खंडित मूर्ति खरीदने से बचें : मूर्ति खरीदते समय अच्छी तरह जांच लें कि कहीं से वह टूटी या चटकी हुई न हो। हमेशा साफ-सुथरी और पूरी मूर्ति ही खरीदें।

लक्ष्मी-गणेश की मूर्ति स्थापित करने के नियम
दिवाली पर नई मूर्तियां खरीदने के साथ उनकी स्थापना का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
  • मूर्तियों का क्रम : भगवान गणेश को मां लक्ष्मी के बाईं ओर और मां लक्ष्मी को गणेश जी के दाईं ओर स्थापित करने की परंपरा है। पूजा करने वाले व्यक्ति की ओर से देखने पर मां लक्ष्मी बाईं तरफ और गणेश जी दाईं तरफ होंगे।
  • सही दिशा : पूजा स्थल पर मूर्तियों का मुख पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर रखना शुभ माना जाता है।
  • वाहन का ध्यान : भगवान गणेश के साथ मूषक और मां लक्ष्मी के साथ उल्लू या हाथी का स्वरूप होना भी शुभ माना जाता है।

पुरानी लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियों का क्या करें?
अगर आप दिवाली पर नई मूर्तियां खरीद रहे हैं और घर में पहले से पुरानी मूर्तियां रखी हैं, तो उनके निस्तारण का भी ध्यान रखें।
  • मिट्टी की मूर्तियां : पुरानी मिट्टी की मूर्तियों को स्थानीय नियमों के अनुसार स्वच्छ स्थान पर मिट्टी में मिलाएं या घर में किसी बड़े बर्तन में पानी डालकर घोल सकते हैं। इसके बाद उस मिट्टी को पौधों या गमले में डाल सकते हैं।
  • धातु की मूर्तियां : चांदी, पीतल या सोने की पुरानी मूर्तियों को साफ करके दोबारा पूजा में इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • खंडित मूर्तियां : अगर मूर्ति टूट गई है, तो उसे सामान्य कचरे में न डालें। धार्मिक परंपरा के अनुसार सम्मानपूर्वक उसका निस्तारण करें।

ध्यान दें : इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं पर आधारित है। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और मान्यताओं में अंतर हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन