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Unique Diwali In Ujjain Villages No Lakshmi Puja Villagers Abstain From Going Out For Three Days And Live Self
गांवों की अनोखी दीपावली : नहीं होती लक्ष्मी पूजा, तीन दिन बाहर नहीं जाते ग्रामीण, गुजारते हैं आत्मनिर्भर जीवन
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Mohammad Aamil
Updated Mon, 20 Oct 2025 06:09 PM IST
सार
दीपावली का त्योहार पूरे देश में माता महालक्ष्मी और भगवान श्री गणेश की पूजा के लिए प्रसिद्ध है। लोग इस दिन धन, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के नागदा क्षेत्र में कुछ गांव ऐसे हैं जहां दीपावली का अर्थ कुछ अलग है।
पूरे देश में दीपावली का पर्व बहुत ही धूमधाम से मनाया जा रहा है। कई स्थान ऐसे हैं जहां, त्योहरों की परंपराऐं बेहद अनोखी होती हैं। कुछ ऐसी अनोखी परंपरा मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले के गांवों में निभाई जाती है। जहां देशभर में लोग माता महालक्ष्मी और भगवान श्री गणेश की पूजा करके समृद्धि की कामना करते हैं, वहीं उज्जैन के कुछ गांवों में दीपावली का अर्थ पूर्वजों का स्मरण और श्रद्धा के साथ तर्पण करना है।
पूर्वजों को समर्पित दीपावली
जिले के नागदा तहसील के ग्राम डाबरी में गुर्जर समाज के लोग दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा नहीं करते, बल्कि अपने पितृों की स्मृति में विशेष पूजन करते हैं। इस अवसर पर खीर और चूरमे का भोग लगाकर पूर्वजों का तर्पण किया जाता है। इसके साथ ही पीपल और घास से बनी रस्सी को नदी में प्रवाहित किया जाता है, जो वंश वृद्धि और पूर्वजों के आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है।
तीन दिन तक गांव बंद रहता है
गांव के सरपंच के अनुसार, लगभग 250 परिवार इस परंपरा का पालन करते हैं। धनतेरस से लेकर दीपावली तक तीन दिनों तक गांव का कोई भी व्यक्ति बाहर नहीं जाता। इस दौरान कोई भी बाहरी व्यक्ति का चेहरा नहीं देखा जाता और गांव में पूरी तरह आत्मनिर्भर व्यवस्था रहती है। यहां तक कि रोजाना बिकने वाला दूध भी बाजार में नहीं भेजा जाता, बल्कि गांव में ही सभी परिवारों में बांट दिया जाता है।
सदियों पुरानी परंपरा
यह परंपरा सिर्फ डाबरी गांव तक सीमित नहीं है। मंदसौर, नीमच, रतलाम और उज्जैन जिले के कई गांवों जैसे सिमरोल, बरखेड़ी और अन्य गुर्जर बहुल इलाकों में भी सैकड़ों परिवार इस प्राचीन परंपरा को निभाते हैं। अनुमान है कि करीब 1000 से अधिक परिवार हर वर्ष दीपावली पर माता लक्ष्मी की पूजा के स्थान पर पितृ पूजन करते हैं।
पूर्वजों के प्रति श्रद्धा की मिसाल
गांववासियों का मानना है कि दीपावली उनके लिए सिर्फ रोशनी और समृद्धि का पर्व नहीं, बल्कि पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। वे मानते हैं कि पितृों की कृपा से ही वंश और संपन्नता बनी रहती है। इसी श्रद्धा के भाव से यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी निभाई जा रही है।
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