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सोने-चांदी से आगे धनतेरस के ये रिवाज: 13 दीपक, 13 कौड़ियां, गोमती चक्र और यम का दीया, क्यों है इनकी मान्यता..

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Fri, 06 Nov 2026 06:27 PM IST
सार

धनतेरस पर सोने-चांदी की खरीदारी के साथ कई पुरानी लोकपरंपराएं भी निभाई जाती हैं। कहीं दक्षिण दिशा में यम का दीया जलता है तो कहीं तिजोरी में कौड़ियां और गोमती चक्र रखे जाते हैं। झाड़ू, साबुत धनिया और नमक के पानी से सफाई जैसे रिवाजों के पीछे सुख-समृद्धि और खुशहाली की लोकमान्यताएं जुड़ी हैं।

13 दीपक और कौड़ियों का क्या है रहस्य, दक्षिण दिशा में क्यों जलता है यम का दीया।
13 दीपक और कौड़ियों का क्या है रहस्य, दक्षिण दिशा में क्यों जलता है यम का दीया। - फोटो : एआई
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विस्तार
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कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी यानी धनतेरस का त्योहार आते ही घरों से लेकर बाजारों तक रौनक छा जाती है। कोई सोने-चांदी के सिक्के खरीदता है तो कोई नए बर्तन। लेकिन इस पर्व की खूबसूरती केवल खरीदारी और पूजा तक सीमित नहीं है।

इसके साथ कई ऐसी लोकपरंपराएं और छोटे-छोटे उपाय भी जुड़े हैं, जिन्हें लोग पीढ़ियों से निभाते आ रहे हैं। कहीं 13 दीपक और कौड़ियां रखने का रिवाज है तो कहीं घर के बाहर यम का दीया जलाकर परिवार की लंबी उम्र की कामना की जाती है।

धन्वंतरि और कुबेर से आरोग्य और वैभव की कामना
पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। उन्हें आयुर्वेद और आरोग्य का देवता माना जाता है। वहीं कुबेर धन के देवता हैं। धनतेरस पर दोनों की पूजा का विशेष महत्व है। लोग भगवान धन्वंतरि से अच्छे स्वास्थ्य और कुबेर से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

इस दिन पीतल और तांबे के बर्तन, सोने-चांदी के सिक्के और आभूषण खरीदने की भी परंपरा है।

दक्षिण दिशा में क्यों जलता है यम का दीया?
धनतेरस की शाम घर के मुख्य द्वार या आंगन में दक्षिण दिशा की ओर यम के नाम का दीपक जलाने की परंपरा है। इसे यम दीपदान या यम का दीया कहते हैं। कई घरों में चौमुखा दीपक जलाया जाता है। लोकमान्यता है कि इस दीपदान से अकाल मृत्यु का भय दूर होता है और परिवार पर यमराज की कृपा बनी रहती है। यह दीपक जीवन की रक्षा और परिवार की खुशहाली की कामना का प्रतीक है।

13 दीपक और कौड़ियों का क्या है रहस्य?
धनतेरस से जुड़े लोक उपायों में 13 दीपक और 13 कौड़ियों की परंपरा भी खास है। मान्यता के अनुसार, इस दिन मां लक्ष्मी और कुबेर की पूजा के समय 13 दीपक जलाए जाते हैं और उनके पास 13 कौड़ियां रखी जाती हैं। पूजा के बाद इन कौड़ियों को सुरक्षित स्थान या तिजोरी में रखने का रिवाज है।

कुछ जगहों पर इन्हें जमीन में दबाने की परंपरा भी है। लोकविश्वास है कि इससे घर में धन की बरकत बनी रहती है।

झाड़ू और धनिये में छिपी खुशहाली की कामना
धनतेरस पर नई झाड़ू खरीदने का रिवाज भी काफी प्रचलित है। लोकमान्यता में झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। माना जाता है कि नई झाड़ू घर की गंदगी के साथ दरिद्रता को भी बाहर करती है। कुछ परिवार नई झाड़ू के हैंडल पर सफेद धागा बांधते हैं और पूजा के बाद उसका इस्तेमाल करते हैं।

इसी तरह साबुत धनिया खरीदना भी शुभ माना जाता है। धनतेरस की पूजा में इसे मां लक्ष्मी के सामने अर्पित किया जाता है। दिवाली के बाद कुछ बीज गमले या बगीचे में बोए जाते हैं और कुछ लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखे जाते हैं। हरे-भरे धनिये को घर की बरकत और आर्थिक खुशहाली का प्रतीक मानने की परंपरा है।

गोमती चक्र, हल्दी और सफेद वस्तुओं का दान
धनतेरस की पूजा में गोमती चक्र और हल्दी की गांठ रखने का भी रिवाज है। कुछ परिवार पांच या 11 गोमती चक्र पर तिलक लगाकर उन्हें पूजा में रखते हैं और बाद में तिजोरी में संभालकर रख देते हैं। चांदी के सिक्के के साथ कच्ची हल्दी की गांठ रखना भी शुभ माना जाता है। लोकविश्वास के अनुसार, इन चीजों को रखने से व्यापार की बाधाएं दूर होती हैं और धन में वृद्धि होती है।

दान का भी इस पर्व में खास महत्व है। कई जगह शाम के समय जरूरतमंदों को चावल, चीनी, दूध या सफेद कपड़े दान किए जाते हैं। इसे सुख-समृद्धि और शुभ फल से जोड़कर देखा जाता है।

नमक के पानी से सफाई, घर में शुभता का भाव
धनतेरस पर घर की साफ-सफाई का विशेष महत्व है। कुछ परिवार पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर पोछा लगाते हैं और मुख्य द्वार पर भी इसका छिड़काव करते हैं। लोकमान्यता है कि इससे घर की नकारात्मकता दूर होती है और सकारात्मकता का संचार होता है।

इन सभी रीति-रिवाजों में कहीं धार्मिक आस्था है तो कहीं लोकजीवन का अनुभव। इनका वैज्ञानिक या आर्थिक लाभ प्रमाणित नहीं है, लेकिन इनके पीछे घर को साफ-सुथरा रखने, दान करने, बचत की भावना जगाने और परिवार की खुशहाली की कामना जैसे सुंदर भाव जरूर जुड़े हैं। यही धनतेरस की परंपराओं को खास बनाता है।

(डिस्क्लेमर: लेख में बताए गए उपाय पारंपरिक लोकमान्यताओं और धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं।) 
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