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Home› Kheti Kisani› Rabi Groundnut Farming 5 High Yielding Varieties For Better Returns Amid El Ni O And Low Rainfall

कम बारिश में भी नहीं घटेगी आमदनी : अल नीनो के असर के बीच रबी मूंगफली है सही फसल, ये 5 किस्म कराएंगी तगड़ी कमाई

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sun, 18 Oct 2026 06:58 PM IST
सार

  • खरीफ के बाद चालू रबी सीजन में अल नीनो कम बारिश का कारण बन सकता है
  • ऐसे में मूंगफली जैसी कम जल खपत वाली फसलों की बुवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है
  • मूंगफली की कई किस्म सूखा सहने की क्षमता रखती है, जो अल नीनो के इस दौर में काफी अहम है
  • हम आपकों मूंगफली की टॉप पांच किस्मों के बारे में बताएंगे, जो 36 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक उपज दे सकती हैं

इस रबी सीजन मूंगफली की ये किस्में देंगी बंपर उपज और मुनाफा।
इस रबी सीजन मूंगफली की ये किस्में देंगी बंपर उपज और मुनाफा। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इस रबी किसान मूंगफली की सही किस्म का चुनाव कर बेहतर उपज और मुनाफा कम सकते हैं। खरीफ की तरह रबी सीजन में अल नीनो बारिश की कमी का कारण बन सकता है। ऐसे में किसानों को मूंगफली जैसे कम जल की खपत वाली फसलें उगाने की सलाह दी जा रही है।

बंपर उपज देने वाली 5 उन्नत किस्में
सबसे पहले आरजी-425 किस्म की बात करते हैं, जो 120 से 125 दिन में पककर तैयार हो जाती है। इसकी प्रति हेक्टेयर उत्पादन क्षमता 18 से 36 क्विंटल तक है। खास बात यह है कि इस किस्म में सूखे के साथ कॉलर रॉट जैसी बीमारियों को सहन करने की क्षमता है। जीजी-2 भी 120 से 125 दिनों में तैयार होती है। इसकी औसत पैदावार 25 से 30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। इसका पौधा छोटा और गुच्छेदार होता है। एचएनजी-69 किस्म तैयार होने में 125 दिन लेती है। किसान इससे 25 से 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की उपज की उम्मीद कर सकते हैं। यह किस्म कॉलर रॉट, तना गलन और जल्दी आने वाले धब्बा रोग के प्रति पूरी तरह रोगरोधी है।

इन सभी किस्मों में सबसे ज्यादा तैयार होने में 145 दिन लेती है। इसकी फली मोटी और साफ होती है, जिसमें 3 दाने तक निकलते हैं। इसकी औसत उपज 26 से 27 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। वहीं, जीजी-7 काफी कम समय यानी 90 से 105 दिन में तैयार होने वाली अगेती किस्म है। इसकी पैदावार 21 से 29 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। टिक्का रोग की प्रतिरोधी यह किस्म राजस्थान के लिए उपयुक्त मानी जाती है।

खेत की तैयारी और मिट्टी का उपचार
मूंगफली की खेती के लिए जल निकासी वाली भुरभुरी दोमट या बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त होती है। खेत तैयार करने के लिए सबसे पहले मिट्टी पलटने वाले हल से एक बार जुताई करें और उसके बाद कल्टीवेटर से दो बार जुताई करनी चाहिए। जुताई के बाद पाटा लगाकर खेत को अच्छी तरह समतल कर लें। जमीन में दीमक और अन्य भूमिगत कीटों से बचाव के लिए आखिरी जुताई के वक्त 25 किलो प्रति हेक्टेयर की दर से क्विनलफोस 1.5 प्रतिशत दवा मिट्टी में मिलाना जरूरी है।

बुवाई के लिए कम फैलने वाली किस्मों का 75 से 80 किलोग्राम और ज्यादा फैलने वाली किस्मों का 60 से 70 किलोग्राम बीज प्रति हेक्टेयर उपयोग करना चाहिए। बुवाई से 10 से 15 दिन पहले ही स्वस्थ फलियों से दाने निकाल लेने चाहिए।

 


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