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Seven Deep Tech Innovations That Can Transform Global Agriculture Wef Highlights Future Of Smart Farming
WEF का हाईटेक प्लान : 7 डीप-टेक तरीके, जो खेती को बनाएंगे स्मार्ट, झूम उठेंगे किसान, बढ़ेगी अन्नदाता की कमाई
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Thu, 13 Nov 2025 02:48 PM IST
सार
विश्व आर्थिक मंच (WEF) की ताजा रिपोर्ट बता रही है कि 7 डीप-टेक तरीके मिलकर खेती का नया भविष्य रच रहे हैं। डीप-टेक तकनीक न सिर्फ फसल उत्पादन बढ़ाएगी, बल्कि खेती को टिकाऊ, लाभकारी और क्लाइमेट-प्रूफ बनाएगी। लेकिन, ये जादू तभी होगा जब सही नीतियां बनें और सरकार, कंपनियां व शोध संस्थान मिलकर काम करें।
जलवायु परिवर्तन, घटते संसाधन और किसानों की घटती आय के बीच अब खेती को संभालने के लिए विज्ञान और तकनीक की नई दिशा की जरूरत है। विश्व आर्थिक मंच (World Economic Forum – WEF) की रिपोर्ट “Shaping the Deep-Tech Revolution in Agriculture 2025” में बताया गया है कि आने वाले समय में “डीप टेक्नोलॉजी” (Deep Tech) कृषि के हर पहलू जिसमें खेत से लेकर सप्लाई चेन तक को बदल सकती है। आइए समझते हैं...
ये हैं वो सात तरीके, जिनसे बदल जाएगी खेती की तस्वीर
रिपोर्ट के मुताबिक, सात प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों (डोमेन) पर आधारित ये क्रांति खेती को अधिक उत्पादक, टिकाऊ और जलवायु अनुकूल बना सकती है। इन तकनीकों में शामिल हैं, जनरेटिव एआई (Generative AI), कंप्यूटर विजन (Computer Vision), एज इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Edge IoT), सैटेलाइट-आधारित रिमोट सेंसिंग (Satellite-enabled Remote Sensing), रोबोटिक्स (Robotics), क्रिस्पर (CRISPR) और नैनो टेक्नोलॉजी (Nanotechnology)।
विस्तार से जानिए, कैसे ये तरीके खेती की तस्वीर बदलेंगे? 1. जनरेटिव एआई (Generative AI): किसानों के लिए स्मार्ट सलाह और निर्णय सहायता
जनरेटिव एआई कृषि में सलाहकार के रूप में क्रांति ला सकता है। यह तकनीक किसानों को फसल प्रबंधन, कीट नियंत्रण, मौसम पूर्वानुमान और बाजार भाव जैसी सूचनाएं तुरंत और उनकी भाषा में दे सकती है। रिपोर्ट बताती है कि एआई आधारित “एजेंटिक सिस्टम” (Agentic AI) भविष्य में खेत प्रबंधन के स्वत: निर्णय लेने वाले उपकरण बन सकते हैं। हालांकि अभी सबसे बड़ी चुनौती है, उच्च गुणवत्ता वाले स्थानीय डेटा की कमी।
2. कंप्यूटर विज़न (Computer Vision): फसलों और फलों की पहचान में सटीकता
कंप्यूटर विजन तकनीक कैमरा और एआई मॉडल की मदद से पौधों की बीमारियां, कीट, खरपतवार और फसल की गुणवत्ता पहचान सकती है। कम लागत वाले सेंसर और स्मार्टफोन के बढ़ते उपयोग से यह तकनीक किसानों के लिए उपयोगी हो रही है। भारत में Intello Labs जैसी कंपनियां पहले से इस तकनीक से फलों और सब्जियों की गुणवत्ता का विश्लेषण कर चुकी हैं। हालांकि, खेती में अलग-अलग मौसम और प्रकाश की स्थिति के कारण मॉडल को ट्रेन करना चुनौतीपूर्ण है।
3. एज इंटरनेट ऑफ थिंग्स (Edge IoT): खेत पर तुरंत निर्णय लेने वाली स्मार्ट तकनीक
एज IoT सिस्टम खेत पर लगे सेंसरों से प्राप्त डेटा को वहीं पर प्रोसेस करते हैं, जिससे इंटरनेट या क्लाउड पर निर्भरता कम होती है। यह किसानों को रियल टाइम में सिंचाई, खाद और कीट नियंत्रण संबंधी निर्णय लेने में मदद करता है। हालांकि इसकी सबसे बड़ी बाधा उच्च लागत और विभिन्न उपकरणों में interoperability की कमी है।
4. सैटेलाइट आधारित रिमोट सेंसिंग (Satellite-enabled Remote Sensing): खेतों की निगरानी आसमान से
यह तकनीक खेतों की स्थिति, फसल स्वास्थ्य, जल उपयोग और मौसम प्रभाव की निगरानी करने में सक्षम है। सैटेलाइट इमेजरी से बीमा कंपनियां फसल नुकसान का आकलन कर सकती हैं और बैंक जोखिम मूल्यांकन कर सकते हैं। भारत में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) ने इस तकनीक को अपनाकर दावा निपटान की प्रक्रिया में पारदर्शिता और गति लाई है। हालांकि छोटे खेतों और बादलों की मौजूदगी में डेटा की सटीकता घट सकती है।
5. रोबोटिक्स (Robotics): स्वचालित खेती का भविष्य
खेती में श्रमबल की कमी को देखते हुए रोबोटिक्स एक बड़ा समाधान बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, एआई और कंप्यूटर विज़न से लैस रोबोट अब बुवाई, निराई, कटाई और फसल निगरानी जैसे काम स्वचालित रूप से कर सकते हैं। यह न केवल श्रम पर निर्भरता घटाते हैं बल्कि खेत में उत्पादकता और सटीकता बढ़ाते हैं। हालांकि उच्च लागत और असमान भूमि संरचना इसके विस्तार में बाधा हैं।
6. क्रिस्पर (CRISPR): जलवायु-प्रतिरोधी फसलों का तेज विकास
क्रिस्पर जीन एडिटिंग तकनीक फसलों में वांछित गुण (जैसे सूखा-सहनशीलता या कीट-प्रतिरोध) तेजी से विकसित करने में मदद करती है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने इसी तकनीक से दो ऐसी धान किस्में विकसित की हैं, जो 20% अधिक उत्पादन दे सकती हैं और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाती हैं। हालांकि नियामक स्वीकृति और आम जनता की धारणा अब भी बड़ी चुनौती हैं।
7. नैनो टेक्नोलॉजी (Nanotechnology): खाद और कीटनाशकों का सटीक उपयोग
नैनो टेक्नोलॉजी सूक्ष्म स्तर पर उर्वरक और कीटनाशक की सटीक डिलीवरी में मदद करती है। नैनो इनपुट्स से पौधों को धीरे-धीरे और नियंत्रित मात्रा में पोषण मिलता है, जिससे मिट्टी और पानी का प्रदूषण घटता है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत और ब्राजील जैसे देश स्थानीय स्तर पर नैनो यूरिया उत्पादन को बढ़ावा दे रहे हैं ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि, पर्यावरण और स्वास्थ्य पर इसके दीर्घकालिक प्रभावों को लेकर और शोध की आवश्यकता है।
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