विज्ञापन
Home› Kheti Kisani› Madhya Pradesh Plans To Discourage Wheat And Summer Moong Amid Water Shortages

मध्य प्रदेश: पानी बचाने के लिए गेहूं-मूंग की खेती घटाने की तैयारी, किसानों को उड़द-चना अपनाने की सलाह

गांव जंक्शन डेस्क, भोपाल Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 17 Oct 2026 11:45 AM IST
सार

कम बारिश और सिंचाई जल की उपलब्धता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार गेहूं और ग्रीष्मकालीन मूंग के बजाय कम पानी वाली फसलों को प्रोत्साहित करने की तैयारी में है। इस बदलाव की सफलता वैकल्पिक फसलों के बाजार, लाभकारी कीमत और सरकारी खरीद व्यवस्था पर निर्भर करेगी।

नर्मदा घाटी के जिलों में दोहरी आय के साथ बढ़ता सिंचाई संकट।
नर्मदा घाटी के जिलों में दोहरी आय के साथ बढ़ता सिंचाई संकट। - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मध्य प्रदेश में कम बारिश और सिंचाई के पानी की उपलब्धता को देखते हुए राज्य सरकार 12 जिलों में गेहूं और ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती को हतोत्साहित करने की तैयारी कर रही है। सरकार किसानों को उड़द और चने जैसी वैकल्पिक फसलें अपनाने के लिए प्रेरित करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कृषि विभाग को इस दिशा में जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। 

जलाशयों में कम पानी, सिंचाई पर दबाव
नर्मदापुरम, हरदा, नरसिंहपुर, रायसेन और सीहोर सहित कई जिलों में गेहूं और ग्रीष्मकालीन मूंग की बड़े पैमाने पर खेती होती है। लगभग 60 से 70 दिन में तैयार होने वाली ग्रीष्मकालीन मूंग को पांच से छह बार सिंचाई की जरूरत पड़ती है। इस बार तवा जलाशय में 87.8 प्रतिशत और बारना जलाशय में 69.1 प्रतिशत जल उपलब्ध होने की सूचना है।

सरकार का जोर जल संसाधनों पर दबाव कम करने और कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने पर है।

उड़द की खरीद का भरोसा
सरकार किसानों को ग्रीष्मकालीन मूंग के विकल्प के तौर पर उड़द और चना अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। किसानों को उड़द की पूरी उपज खरीदने का भरोसा भी दिया गया है। हालांकि, फसल बदलने का फैसला तभी व्यावहारिक होगा, जब किसानों को वैकल्पिक फसलों के लिए लाभकारी मूल्य, बाजार और खरीद की पर्याप्त व्यवस्था मिलेगी।

मूंग के भंडारण और खरपतवारनाशक का सवाल
ग्रीष्मकालीन मूंग की खेती में रसायनों के इस्तेमाल और सरकारी भंडार में उपज जमा होने की समस्या भी चर्चा में है। रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारी गोदामों में पिछले तीन-चार वर्षों की लगभग 3.75 लाख टन मूंग बिना बिके रखी है। इस आंकड़े को प्रकाशित करने से पहले संबंधित सरकारी एजेंसी से मौजूदा भंडार की पुष्टि करना उचित होगा।

इस बीच, केंद्र सरकार ने ग्रीष्मकालीन मूंग में फसल को जल्दी सुखाने के लिए इस्तेमाल होने वाले पैराक्वेट डाइक्लोराइड के उपयोग पर रोक लगाई है। मध्य प्रदेश सरकार ने इसके स्टॉक को नष्ट करने और बिक्री पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसे पूरे देश में इस रसायन पर पूर्ण प्रतिबंध बताने के बजाय ग्रीष्मकालीन मूंग में इसके इस्तेमाल पर रोक के रूप में लिखना अधिक सटीक होगा। 
विज्ञापन
विज्ञापन