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राजस्थान के राज्य वृक्ष पर संकट : थार की जीवनरेखा खेजड़ी के पेड़ सूखने से बढ़ी चिंता, वैज्ञानिक जांच की मांग

गांव जंक्शन डेस्क, सिरोही (राजस्थान) Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 17 Oct 2026 10:57 AM IST
सार

बालोतरा के एक गांव में 50 से अधिक खेजड़ी के पेड़ों के सूखने की सूचना है। जड़ों के आसपास सफेद कठोर परत दिखने के बाद ग्रामीणों ने वैज्ञानिक जांच और विशेषज्ञों से उपचार कराने की मांग की है। समस्या का वास्तविक कारण अभी प्रमाणित नहीं हुआ है।
 

खेजड़ी के को बचाने के लिए जड़ों के आसपास की मिट्टी की स्थिति सुधारना भी जरूरी है।
खेजड़ी के को बचाने के लिए जड़ों के आसपास की मिट्टी की स्थिति सुधारना भी जरूरी है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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राजस्थान के बालोतरा जिले में खेजड़ी के पेड़ों के तेजी से सूखने से किसानों और ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। गिड़ा क्षेत्र की कुम्पलिया ग्राम पंचायत के चौधरी भूनारामजी गोदारा नगर में 50 से अधिक पेड़ों के प्रभावित होने की सूचना है। पेड़ों के तनों और जड़ों के आसपास जमीन पर सफेद, कठोर परत दिखाई दे रही है। समस्या की वास्तविक वजह अभी स्पष्ट नहीं है। 

जड़ों के आसपास जम रही सफेद परत
ग्रामीणों के अनुसार, प्रभावित खेजड़ी के पेड़ों के आसपास सफेद परत जमने के साथ वे सूखने लगे हैं। स्थानीय लोगों ने पानी, खाद और कीटनाशकों के इस्तेमाल से बचाव की कोशिश की, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले। हालांकि, सफेद परत को फफूंद या जड़ सड़न का प्रमाण मानना अभी उचित नहीं होगा। इसकी पहचान वैज्ञानिक जांच के बाद ही हो सकती है।

मिट्टी और पानी की जांच जरूरी
कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर की सहायक आचार्य डॉ. कृष्णा सहारण के अनुसार, पेड़ों को बचाने के लिए जड़ों के आसपास की मिट्टी की स्थिति सुधारना भी जरूरी है। मिट्टी में लवणों का जमाव, अधिक क्षारीयता, सिंचाई जल की गुणवत्ता या जड़ों से जुड़े रोग संभावित कारण हो सकते हैं, लेकिन इनमें से किसी की पुष्टि अभी नहीं हुई है। प्रभावित और स्वस्थ पेड़ों की मिट्टी, सिंचाई के पानी और जड़ों की जांच से समस्या की असली वजह पता चल सकेगी। 

खेजड़ी बचाने के लिए विशेषज्ञ दल की मांग
खेजड़ी थार के शुष्क इलाकों में पर्यावरण और ग्रामीण आजीविका के लिए महत्वपूर्ण है। इसकी पत्तियां पशुओं के चारे के काम आती हैं, जबकि इसकी सांगरी खाद्य उपयोग में लाई जाती है। पेड़ मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी योगदान देता है। जिला परिषद सदस्य दौलताराम गोदारा ने जिला प्रशासन से विशेषज्ञ दल भेजकर प्रभावित पेड़ों की जांच और उपचार कराने की मांग की है।

 
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