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Colourful Cauliflower Offers Farmers A New Route To Better Returns
रंगीन फूलगोभी की खेती से बढ़ी कमाई : बैंगनी और पीली जैविक फूलगोभी से किसानों को मिल रहे बेहतर दाम
गांव जंक्शन डेस्क, सिरोही (राजस्थान)
Published by: Umashankar Mishra
Updated Sat, 17 Oct 2026 10:28 AM IST
सार
राजस्थान के सिरोही जिले के तपोवन में किसान जैविक तरीकों से बैंगनी और पीली फूलगोभी उगा रहे हैं। रंगीन सब्जियों की बाजार मांग से बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है, हालांकि वास्तविक लाभ लागत, उपज और बिक्री भाव पर निर्भर करेगा।
महानगरों में रंगीन फूलगोभी की मांग किसानों के लिए कमाई के नए अवसर खोल रही है।
- फोटो : गांव जंक्शन
राजस्थान के सिरोही जिले के आमथला गांव स्थित तपोवन में किसान जैविक तरीकों से बैंगनी और पीली फूलगोभी उगाकर अपनी आय बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। सामान्य सफेद फूलगोभी की तुलना में रंगीन फूलगोभी के दो से तीन गुना अधिक दाम मिलने की बात सामने आई है। महानगरों में रंगीन फूलगोभी की मांग किसानों के लिए कमाई के नए अवसर खोल रही है।
तपोवन में पहले से ब्रोकली और सफेद फूलगोभी की खेती होती रही है। पिछले तीन वर्षों से यहां रंगीन फूलगोभी भी उगाई जा रही है। खेती की बढ़ती लागत और उपज का उचित मूल्य न मिल पाने के बीच किसान बाजार की मांग के अनुसार नई किस्मों को अपना रहे हैं।
ढाई से तीन महीने में तैयार होती है फसल
तपोवन में ब्रोकली की बुवाई अगस्त-सितंबर में की जाती है और फसल दिसंबर-जनवरी में कटाई के लिए तैयार होती है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, ढाई से तीन महीने के फसल चक्र में लगभग ढाई से तीन टन उपज मिलती है। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह उपज प्रति एकड़, प्रति हेक्टेयर या पूरे खेत की है।
रंगीन फूलगोभी और ब्रोकली के फसल चक्र तथा उपज के आंकड़ों को भी अलग-अलग स्पष्ट किया जाना चाहिए। इस खेती की तकनीक सीखने के लिए आसपास के क्षेत्रों से किसान तपोवन पहुंच रहे हैं। इससे रंगीन सब्जियों की खेती में किसानों की दिलचस्पी बढ़ने के संकेत मिलते हैं।
बाजार की मांग से बेहतर दाम की उम्मीद
रंगीन फूलगोभी की मांग खासकर बड़े शहरों में बताई जा रही है। सामान्य सफेद फूलगोभी के मुकाबले दो से तीन गुना कीमत मिलने से किसानों को अधिक आमदनी की संभावना है। हालांकि, वास्तविक लाभ उत्पादन लागत, गुणवत्ता, उपलब्ध बाजार और बिक्री के समय मिलने वाले भाव पर निर्भर करता है। इसलिए खेती अपनाने से पहले किसानों के लिए बाजार और खरीदारों की जानकारी जुटाना जरूरी है।
नीम और छाछ से तैयार करते हैं घोल
तपोवन में कीटों से बचाव के लिए नीम की खली और छाछ से तैयार घोल का इस्तेमाल किया जाता है। फसल में मावा जैसे रस चूसने वाले कीट नुकसान पहुंचा सकते हैं, इसलिए उनकी नियमित निगरानी जरूरी है। हालांकि, इस घोल को सभी कीटों के विरुद्ध प्रभावी या फसल को पूरी तरह सुरक्षित रखने वाला उपाय बताने से पहले वैज्ञानिक पुष्टि जरूरी है। जैविक खेती में भी कीट प्रबंधन और फसल की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण है।
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