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दलहन आत्मनिर्भरता: तूर, उड़द, मसूर पर 100% MSP खरीद का दावा, लेकिन 'इच्छुक' शब्द बना विवाद की जड़

डॉ. उमाशंकर मिश्र, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Wed, 08 Apr 2026 09:16 PM IST
सार

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भले ही 'इच्छुक' किसानों से तूर, उड़द और मसूर की 100% MSP पर खरीद का भरोसा दिलाया हो, लेकिन किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने इस पर सीधा निशाना साधा। उनका आरोप है - "यह सरकार को तिलहन और दालों की खरीद से पीछे हटने का एक रास्ता देता है।" जानें, पूरा मामला...

शिवराज सिंह चौहान ने ‘इच्छुक’ किसानों से तूर, उड़द और मसूर की 100% MSP पर खरीद का भरोसा दिया।
शिवराज सिंह चौहान ने ‘इच्छुक’ किसानों से तूर, उड़द और मसूर की 100% MSP पर खरीद का भरोसा दिया। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने तूर, उड़द और मसूर की 100% न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद का एलान किया है - लेकिन इस घोषणा में एक शब्द ने विशेषज्ञों और किसान संगठनों की भौंहें चढ़ा दी हैं। वह शब्द है - 'इच्छुक'। गेहूं और धान की सरकारी खरीद में ऐसी कोई शर्त नहीं है, तो दालों के लिए यह अपवाद क्यों? यही सवाल अब दलहन नीति की पूरी बहस का केंद्र बन गया है।

'इच्छुक' शब्द क्यों बना विवाद की जड़
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भले ही 'इच्छुक' किसानों से तूर, उड़द और मसूर की 100% MSP पर खरीद का भरोसा दिलाया हो, लेकिन किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट ने इस पर सीधा निशाना साधा। उनका आरोप है - "यह सरकार को तिलहन और दालों की खरीद से पीछे हटने का एक रास्ता देता है।" उनका कहना है कि गेहूं और धान की खरीद में 'इच्छुक' जैसा कोई पेच नहीं होता - किसान लाता है, सरकार खरीदती है। उनका तर्क यही है कि दालों में यह शर्त नीति की मंशा पर सवाल खड़े करती है।
किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट का कहना है कि गेहूं-धान की खरीद में 'इच्छुक' जैसा पेच नहीं है।
किसान महापंचायत के अध्यक्ष रामपाल जाट का कहना है कि गेहूं-धान की खरीद में 'इच्छुक' जैसा पेच नहीं है। - फोटो : सोशल मीडिया
बता दें कि किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट राजस्थान के प्रमुख किसान नेता हैं, जो कृषि मुद्दों, MSP और बजट पर मुखर रहते हैं। रामपाल जाट लंबे समय तक भाजपा से जुड़े रहे और राजस्थान में भाजपा के प्रदेश महामंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर रहे। उन्होंने 2018 में किसानों की मांगों (जैसे स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करना) की अनदेखी का आरोप लगाते हुए भाजपा छोड़ दी थी। इसके बाद, अक्तूबर 2018 में वे आम आदमी पार्टी में शामिल हुए और उन्हें राजस्थान का प्रदेशाध्यक्ष नियुक्त किया गया। हालांकि, जून 2020 में उन्होंने इस पद और पार्टी की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। राजस्थान विधानसभा चुनाव 2023 से ठीक पहले, उन्होंने किसानों को MSP की गारंटी देने के कांग्रेस के वादे के आधार पर पार्टी को अपना बिना शर्त समर्थन देने का एलान किया था। 

आयात की हकीकत - नीति की जरूरत
दलहन को लेकर सरकार की चिंता बेबुनियाद नहीं है और खुद शिवराज सिंह चौहान भी दलहन की खेती को बढ़ावा देने के साथ ही इसकी एमएसपी पर 100 फीसदी खरीद की बात दोहराते रहे हैं। लेकिन, इस एक शब्द ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं। बहरहाल, खाद्य तेल में भारत की आयात निर्भरता अभी भी करीब 55% है। दलहन में हालत और तेज़ी से बिगड़ी है - वर्ष 2022-23 में जो निर्भरता 8% थी, वह 2024-25 में बढ़कर 21% हो गई। कृषि मंत्री का स्पष्ट कहना है कि पूर्ण खाद्य सुरक्षा के लिए इन दोनों क्षेत्रों में आत्मनिर्भर होना अनिवार्य है। दलहन में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री चौहान के रोडमैप भी साझा किया है: 
दलहन
दलहन - फोटो : सोशल मीडिया
बीजों से बदलेगी दाल की तस्वीर
दलहन मिशन के तहत राज्यों को बीज उत्पादन बढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता तय की गई है, जिसका राज्यवार ब्यौरा कुछ इस प्रकार है:  
  • अरहर (तूर): ₹4,500 प्रति क्विंटल
  • उड़द: ₹2,000 प्रति क्विंटल
  • चना: ₹1,800 प्रति क्विंटल
सब्सिडी वाले बीज वितरण के राज्यवार लक्ष्य भी निर्धारित किए गए हैं, जिसका विवरण यहां दिया जा रहा है: 
  • मध्य प्रदेश: 3,10,870 क्विंटल
  • राजस्थान: 2,45,000 क्विंटल
  • महाराष्ट्र: 87,500 क्विंटल
  • गुजरात: 40,000 क्विंटल
नई किस्में-उन्नत बीज से बेहतर उत्पादन
बीज शृंखला में नई और उन्नत किस्मों को तेजी से शामिल किया जा रहा है, जिसका राज्यवार विवरण इस प्रकार है: 
  • राजस्थान: 79 नई किस्में
  • मध्य प्रदेश: 63 नई किस्में
  • गुजरात: 58 नई किस्में
  • महाराष्ट्र: 58 नई किस्में
इन किस्मों का उद्देश्य किसानों को अधिक उत्पादक बीज देकर आय और पैदावार दोनों बढ़ाना है।
हरी मूंग का दालों में अहम स्थान है।
हरी मूंग का दालों में अहम स्थान है। - फोटो : AI Image
मॉडल जिले बने 60% उत्पादन की धुरी
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और गुजरात मिलकर देश के 60% से अधिक दलहन उत्पादन में योगदान देते हैं। उन्होंने कहा, बेहतर प्रदर्शन करे वाले मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम; राजस्थान का झालावाड़ व टोंक; महाराष्ट्र का गढ़चिरौली और गुजरात के जूनागढ़ को मॉडल जिलों के रूप में विकसित किया जाएगा। कम उत्पादकता वाले क्षेत्रों के लिए अलग विशेष योजनाएं लागू होंगी।

तिलहन में रिकॉर्ड, पर आयात भारी
राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन के तहत 2024-25 में तिलहन उत्पादन 429.89 लाख टन पहुंचा, जो 2023-24 के 396.69 लाख टन से अधिक है। उत्पादकता भी 1.31 से बढ़कर 1.41 टन प्रति हेक्टेयर हो गई। वर्ष 2025-26 में 1,076 मूल्य शृंखला समूहों के जरिए 13.35 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को तिलहन खेती में जोड़ा गया है।

किसान पहचान पत्र और राज्यवार रोडमैप
शिवराज ने कहा, सरकार हर राज्य के लिए अलग कृषि रोडमैप तैयार कर रही है, जिसमें विभिन्न फसलों की की किस्में और खेती के तरीकों का निर्धारण होगा। कृषि मंत्री चौहान ने कहा, किसान पहचान पत्र (Farmer ID) के जरिए उर्वरक, बीज, फसल बीमा और मुआवजे का वितरण पारदर्शी और लक्षित बनाया जाएगा।
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