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Jute Industry: जूट की मांग में सुधार, वित्त वर्ष 2026-27 में 15% बिक्री बढ़ने का अनुमान

गांव जंक्शन डेस्क, मुंबई Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 21 Sep 2026 08:57 PM IST
सार

क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में जूट उद्योग की बिक्री मात्रा 15% बढ़ सकती है। कच्चे जूट की नरम कीमतों और घरेलू व निर्यात मांग में सुधार से मुनाफा बढ़ने की उम्मीद है। जानिए, विस्तार से...
 

रिपोर्ट के अनुसार इस वित्त वर्ष में जूट की घरेलू मांग करीब 20% बढ़ सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार इस वित्त वर्ष में जूट की घरेलू मांग करीब 20% बढ़ सकती है। - फोटो : क्रिएटिव कॉमन्स
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विस्तार
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देश के जूट उद्योग की बिक्री मात्रा वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 15% बढ़ सकती है। क्रिसिल रेटिंग्स की रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू मांग में सुधार, निर्यात की बेहतर संभावनाएं और कच्चे जूट की नरम कीमतों से उद्योग को फायदा मिलने की उम्मीद है। पिछले दो वित्त वर्षों में कमजोर मांग, महंगे कच्चे माल और मुनाफे पर दबाव के कारण जूट उद्योग की बिक्री मात्रा में सालाना करीब 10% की गिरावट आई थी।

घरेलू मांग में 20% बढ़ोतरी का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार इस वित्त वर्ष में जूट की घरेलू मांग करीब 20% बढ़ सकती है। इससे पिछले दो वर्षों में आई गिरावट की भरपाई में मदद मिल सकती है। कच्चे जूट के दाम बढ़ने से जूट उत्पाद महंगे हो गए थे। इसका असर मांग पर पड़ा और ग्राहकों ने कम कीमत वाले दूसरे पैकेजिंग उत्पादों का रुख किया। अब कच्चे माल की लागत कम होने से जूट उत्पादों की कीमतों में नरमी आने की उम्मीद है।

कच्चा जूट उद्योग की लागत का बड़ा हिस्सा
क्रिसिल के मुताबिक कच्चा जूट उद्योग के परिचालन खर्च का करीब 60-65% हिस्सा है। इस साल जूट की बेहतर फसल से घरेलू उपलब्धता बढ़ी है और आयात कमजोर रहने के बावजूद कच्चे जूट के दाम नरम हुए हैं। रिपोर्ट के अनुसार बेहतर क्षमता उपयोग और कम फाइबर लागत से उद्योग का मुनाफा बढ़ सकता है। वित्त वर्ष 2027 में ऑपरेटिंग मार्जिन 130 बेसिस प्वाइंट बढ़कर करीब 9% तक पहुंचने का अनुमान है।

निर्यात बाजार में भी सुधार के संकेत
जूट उत्पादों की निर्यात मांग में भी सुधार के संकेत मिल रहे हैं। होम टेक्सटाइल, लाइफस्टाइल उत्पाद और दूसरे वैल्यू-एडेड जूट उत्पादों की बढ़ती मांग से निर्यात को सहारा मिलने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिका के टैरिफ में पिछले वित्त वर्ष के ऊंचे स्तर से कमी आने से वैश्विक बाजार में भारतीय जूट उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बेहतर हो सकती है।

पर्यावरण अनुकूल उत्पादों से नए अवसर
क्रिसिल के अनुसार पर्यावरण को लेकर बढ़ती जागरूकता, सिंगल यूज प्लास्टिक पर कड़े नियम और बायोडिग्रेडेबल उत्पादों की बढ़ती मांग जूट उद्योग के लिए नए अवसर बना रही है। जियोटेक्सटाइल, एग्रो-टेक्सटाइल, होम डेकोर और औद्योगिक पैकेजिंग जैसे क्षेत्रों में जूट का इस्तेमाल बढ़ रहा है। फिलहाल वैल्यू-एडेड उत्पाद उद्योग के राजस्व में करीब 12% हिस्सेदारी रखते हैं, लेकिन इनमें बेहतर कीमत मिलने की संभावना है।

हालांकि रिपोर्ट ने कहा कि निर्यात बाजार में मांग में सुधार की गति और कच्चे जूट की कीमतों पर नजर रखना जरूरी होगा। फसल में व्यवधान और सरकारी नीतियों में बदलाव भी उद्योग के प्रदर्शन को प्रभावित कर सकते हैं।
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