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बीड जिले में कम बारिश से चारे-फसलों पर संकट: सिर्फ 100 दिन का चारा बचा, फसल उत्पादन 50% तक गिरने का अनुमान

गांव जंक्शन डेस्क, छत्रपति संभाजीनगर Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 21 Sep 2026 09:03 PM IST
सार

महाराष्ट्र के बीड में कमजोर मॉनसून से चारे और फसलों पर संकट बढ़ गया है। जिले के 8.55 लाख से ज्यादा पशुओं के लिए करीब 100 दिनों का चारा बचा है और कई तहसीलों में फसल उत्पादन 50% तक घटने का अनुमान है।

बीड कलेक्टर कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 8.55 लाख से ज्यादा पशुओं के लिए करीब 100 दिनों का ही चारा उपलब्ध है।
बीड कलेक्टर कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 8.55 लाख से ज्यादा पशुओं के लिए करीब 100 दिनों का ही चारा उपलब्ध है। - फोटो : सोशल मीडिया (सांकेतिक तस्वीर)
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विस्तार
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महाराष्ट्र के बीड जिले में इस साल कमजोर मॉनसून के कारण पशुओं के चारे और फसलों को लेकर चिंता बढ़ गई है। बीड कलेक्टर कार्यालय की रिपोर्ट के मुताबिक जिले में 8.55 लाख से ज्यादा पशुओं के लिए करीब 100 दिनों का ही चारा उपलब्ध है। जिले के कुछ हिस्सों में 25 से 49 दिनों तक बारिश नहीं हुई है। प्रशासन ने कई तहसीलों में फसल उत्पादन 50% से नीचे रहने की आशंका जताई है।

सात तहसीलों में चारे की स्थिति चिंताजनक
रिपोर्ट के अनुसार अंबाजोगाई में चारे का पर्याप्त भंडार है। वहीं, आष्टी, धारूर, गेवराई, केज, माजलगांव, शिरूर और वडवणी में 21 से 76 दिनों तक का चारा उपलब्ध है। लंबे समय से बारिश नहीं होने के कारण पशुओं के लिए चारे के साथ पानी की स्थिति पर भी असर पड़ रहा है।

सिंचाई परियोजनाओं में सिर्फ 16.69% पानी
बीड की 164 सिंचाई परियोजनाओं में 12 सितंबर तक कुल 128.08 मिलियन क्यूबिक मीटर लाइव स्टोरेज था। यह इन परियोजनाओं की कुल क्षमता का केवल 16.69% है। इससे जिले में खेती और पशुपालन दोनों पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

सामान्य से काफी कम बारिश
बीड में जून से सितंबर के बीच औसतन 566.1 मिलीमीटर बारिश होने की उम्मीद रहती है। लेकिन 20 सितंबर तक जिले में सिर्फ 325.2 मिलीमीटर बारिश हुई है। बारिश की कमी का सीधा असर खरीफ फसलों पर दिखाई दे रहा है।

सोयाबीन, कपास और अरहर सूखने लगी
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार जिले में करीब 4.01 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन, 2.50 लाख हेक्टेयर में कपास और 48,630 हेक्टेयर में अरहर की फसल है। बारिश नहीं होने के कारण इन प्रमुख फसलों के सूखने की स्थिति बन रही है। प्रशासन ने आशंका जताई है कि जिले की कई तहसीलों में फसल उत्पादन 50% से भी नीचे जा सकता है।
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