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भारत से थाईलैंड तक चावल बाजार में हलचल : कहीं चावल उत्पादन में कमी का डर तो कहीं बाढ़ से बढ़े भाव, जानें...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 09 Oct 2026 06:03 PM IST
सार

  • भारत और थाईलैंड दुनिया के सबसे बडे़ चावल निर्यातक देश है
  • इन दोनों देशों में अलग-अलग कारणों से चावल के निर्यात भाव में बढ़ोतरी देखने को मिली है
  • हालांकि गिरते रुपये ने इस हफ्ते भारतीय चावल की कीमतों को स्थिरता देने का काम किया है
  • भारत में कम बारिश और थाईलैंड में बाढ़ की वजह से चावल उत्पादन में गिरावट की संभावना है
  • ऐसे में चावल का आयात करने वाले देशों के लिए आगे की राह महंगी हो सकती है...

चावल का आयात करने वाले देशों के लिए आगे की राह महंगी दिखाई दे रही है।
चावल का आयात करने वाले देशों के लिए आगे की राह महंगी दिखाई दे रही है। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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इस हफ्ते भारतीय चावल का निर्यात भाव एक साल से ज्यादा समय के रिकॉर्ड स्तर के करीब बना रहा। बाजार में कम बारिश की वजह से चावल उत्पादन में गिरावट की चिंता ने इस तेजी को जन्म दिया है, लेकिन डॉलर के मुकाबले कमजोर होते रुपये ने कीमतों में बढ़ोतरी को कुछ हद तक संतुलित करने का काम किया है। दूसरी ओर बाढ़ के खतरे ने थाईलैंड में भी चावल की कीमतों में बढ़ोतरी की है। बता दें कि चावल निर्यात बाजार में भारत के बाद थाइलैंड दूसरा प्रमुख खिलाड़ी है।

लुढ़कते रुपये ने इस हफ्ते चावल का निर्यात भाव को स्थिर रखा
व्यापारियों के अनुसार, रुपये में आई गिरावट ने चावल के निर्यात दाम को स्थिर रखने में मदद की है। हालांकि मालभाड़े की ऊंची कीमतों को देखते हुे व्यापारियों ने चावल आयात को फैसला फिलहाल के लिए टाल दिया है, जिस वजह से इस हफ्ते विदेश से चावल की मांग में थोड़ी कमी आई है।

इस हफ्ते भारत का पांच प्रतिशत टूटा हुआ उसना चावल 378 से 384 डॉलर प्रति टन के भाव पर रहा। गौर करने वाली बात यह रही कि बीते हफ्ते के मुकाबले कीमतों में कोई बदलाव नहीं दर्ज किया गया। दूसरी तरफ पांच प्रतिशत टूटा हुआ सफेद चावल 379 से 384 डॉलर प्रति टन बिका। हालांकि देखने होगा कि चावल के निर्यात भाव में यह स्थिरता कब तक रहती है, खासतौर से जब एक प्रमुख व्यापारिक संस्था ने एक दशक में पहली बार भारत के चावल उत्पादन में गिरावट की संभावना जताई है।

थाईलैंड में बाढ़ की चिंता से बढ़े चावल के दाम
दूसरी ओर थाईलैंड में बाढ़ की वजह से 5 प्रतिशत टूटे हुए चावल की कीमत बढ़कर 465 से 468 डॉलर प्रति टन हो गई है, जबकि पिछले हफ्ते यह भाव 460 डॉलर प्रति टन था।  व्यापारियों ने इस हफ्ते कीमतों में आई तेजी के पीछे पहले से तय सौदों का उठाव को जिम्मेदार ठहराया। व्यापारी का कहना है कि सप्लाई अच्छी है, क्योंकि थाईलैंड धान की दूसरी फसल की कटाई के आखिरी चरण में हैं। एक दूसरे व्यापारी ने फिलीपींस से भी चावल की मांग आने की उम्मीद जताई।

हालांकि व्यापारियों का मानना है कि कुछ प्रांतों में बाढ़ से आपूर्ति को नुकसान पहुंचने की आशंका है, जिससे निर्यातकों को उत्पादन कम होने का अंदेशा है और इसी कारण कीमतें बढ़ी हैं। हालांकि, मांग में अभी इतनी वृद्धि नहीं हुई है कि आपूर्ति की कमी पैदा हो।

वियतनाम में सुस्त व्यापार के बीच निर्यात में गिरावट, फिलीपींस  वजब
गुरुवार को वियतनाम का 5 प्रतिशत टूटा हुआ चावल 420-430 डॉलर प्रति मीट्रिक टन पर बिका, जो पिछले हफ्ते के समान ही है। यहां के व्यापारी के अनुसार, चावल का निर्यात फिलहाल सुस्त हैं क्योंकि फिलीपींस खरीदारी नहीं कर रहा है। वहीं, चीनी खरीदारों ने भी अपनी एक हफ्ते की लंबी छुट्टी के बाद अभी तक खरीदारी शुरू नहीं की है।" हालांकि, अफ्रीकी खरीदार बाजार में लगातार सक्रिय बने हुए हैं।

सरकार के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में वियतनाम के चावल निर्यात में पिछले साल की तुलना में 9.3 प्रतिशत की गिरावट आई है। इसके अलावा, इस साल के पहले नौ महीनों में निर्यात पिछले साल के मुकाबले 5.4 प्रतिशत गिरा है।

बांग्लादेश में परिवहन लागत बढ़ने से चावल हुआ महंगा
बांग्लादेश में हाल के दिनों में चावल की कीमतों में 1 से 2 टका प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी हुई है। व्यापारियों के अनुसार, हाल ही में ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि के कारण परिवहन लागत (किराया) बढ़ गई है, जिसका सीधा असर चावल की कीमतों पर पड़ा है। बाजार में यह तेजी खासतौर से मध्यम और अच्छी गुणवत्ता वाले चावल में सबसे ज्यादा देखने को मिली है।


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