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Home› Kheti Kisani› Farmers Shifting From Local Papaya To Taiwanese Varieties Higher Yields In Less Time And Better Prices

देसी पपीते को छोड़ ताइवानी किस्म अपना रहे किसान : कम समय में ज्यादा उपज-बेहतर दाम; इन सावधानियों का रखें ध्यान

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 09 Oct 2026 04:45 PM IST
सार

  • राजस्थान के भरतपुर जिले में बागवान पुरानी किस्मों के बजाय बड़े पैमाने पर ताइवानी पपीता उगा रहे हैं
  • यह किस्म कम समय में अच्छा उत्पादन और बेहतर भाव देती है
  • इस किस्म के पपीते की मांग पुरा साल बनी रहती है
  • हालांकि पपीते की बागवानी में मौसम एक अहम निर्णायक खिलाडी होता है।
  • अधिकारियों ने किसानों को जलभराव और कीट नियंत्रण के मोर्च पर अहम सलाह दी है

ताइवानी पपीता भरतपुर के किसानों के लिए मुनाफे सौदा बना।
ताइवानी पपीता भरतपुर के किसानों के लिए मुनाफे सौदा बना। - फोटो : ai
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विस्तार
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राजस्थान का भरतपुर जिला अनाज उत्पादन के लिए जाना जाता है, लेकिन जिले के किसान अब खेत संग बागवानी की ओर रुख कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार,वैर और भुसावर इलाके में किसान पपीता को आमदनी का आधार बना रहे हैं। खास बात यह है कि इलाके के किसान देसी किस्मों के बजाय बड़े पैमाने पर पपीते की ताइवानी किस्म उगा रहे हैं, जिससे उन्हें कम समय और लागत में अच्छा मुनाफा हो रहा है।

ताइवानी पपीते से मिल रहा ज्यादा उत्पादन और मुनाफा
ताइवानी किस्म की खास बात यह है कि पारंपिक किस्मों की तुलना में यह ज्यादा उत्पादन देती है। इसके अलावा बाजार में ताइवानी पपीते की मांग हमेशा बनी रही है। अधिक उत्पादन के साथ अच्छा मंडी भाव किसानों के लिए काफी फायदेमंद साित हो रहा है। 

वैर और भुसावर का पूरा इलाका पहले ही बागवानी के लिए जाना जाता रहा है, लेकिन पपीते की नई किस्म ने किसानों का बागवानी के लिए उत्साह बढ़ाने का काम किया है।

मौसम की निर्णायक भूमिका, जलभराव से बचाव की सलाह
पपीते की खेती को लेकर उद्यान विभाग के अधिकारी जनक राज मीणा के अनुसार, भरतपुर का वैर और भुसावर क्षेत्र बागवानी के नजरिए से बहुत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र के किसान अब ताइवानी पपीते के साथ-साथ आधुनिक किस्मों की खेती में काफी रुचि दिखा रहे हैं, क्योंकि इससे देसी पपीते की तुलना में काफी ज्यादा फल मिलते हैं।

ताइवानी पपीते की किस्म मुनाफे का सौदा भले ही हो, लेकिन इसकी बागवानी में किसानों को काफी सावधनी बरतने की जरूरत होती है। पीपते के पौधे मौसम पर काफी निर्भर होते हैं। खासतौर से सर्दी और बरसात के सीजन में किसानों को खास सावधनी बरती चाहिए। खेत में ज्यादा नमी, जलभराव और खराब मौसम पौधों को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। जलभराव पपीते की गुणवत्ता पर खराब असर डाल सकता है। ऐसे में किसानों को खेत में जल निकासी की बेहतर सुविधा तैयार रखनी चाहिए।

कीटनाशक का छिड़काव विशेषज्ञों की सलाह पर ही करें
फसल को स्वस्थ रखने के लिए पौधों की नियमित देखभाल बहुत जरूरी है। बीमारी या कीट लगने पर किसानों को कृषि विशेषज्ञों की सलाह से ही सही दवाओं का छिड़काव करना चाहिए। पौधों को सही पोषण देने, समय पर रोग नियंत्रण के उपाय करने और जलभराव से बचाने से फसल को नुकसान से बचाया जा सकता है। सही किस्म का चुनाव कर और पूरी तरह से वैज्ञानिक तरीके से खेती करके भरतपुर के किसान लगातार अपनी आमदनी बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
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