तमिलनाडु में चावल की ऊंची कीमतों से रसोई बजट को राहत देने के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इस कदम के तहत राज्य में चावल 30 रुपये प्रति किलो की रियायती दर पर बेचा जाएगा। बता दें कि खुले बाजार में चावल की कीमतें 75 से 85 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं।
सस्ते दामों पर मिलेंगे चावल और दाल
सरकार इस कदम के तहत सबसे पहले एक लाख मीट्रिक टन अच्छी गुणवत्ता वाला चावल खरीदेगी। पहले चरण में 25 हजार टन चावल 201 सहकारी दुकानों और 49 अमुधम दुकानों के जरिए आम लोगों तक पहुंचाया जाएगा। यहां से ग्राहक ज्यादा से ज्यादा पांच किलों चावल की खरीद कर सकेंगे।
सोमवार से अरहर की रियायती दर पर बिक्री
इसके अलावा, सरकार ने नाफेड से अरहर दाल की खरीदारी शुरू कर दी है और इसे सोमवार से 250 दुकानों पर 130 रुपये प्रति किलो की दर से बेचा जाएगा। वहीं, सहकारी नेटवर्क के जरिए प्याज पहले की तरह ही 35 रुपये प्रति किलो की दर से मिलता रहेगा। अमुधम और सहकारी दुकानों पर उबला हुआ पोन्नी चावल 60 रुपये, उड़द की दाल 140 रुपये और लहसुन 240 रुपये प्रति किलो जैसी तय रियायती कीमतों पर उपलब्ध रहेगा।
क्यों बढ़े दाम और क्या है सरकार का प्लान?
खाद्य मंत्री के मुताबिक, कृषि पर अल नीनो मौसम प्रणाली के प्रभाव, क्षेत्रीय आपूर्ति में कमी और वैश्विक आर्थिक कारणों से कीमतें बढ़ी हैं। आमतौर पर तमिलनाडु के व्यापारी आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक से भारी मात्रा में चावल खरीदते हैं, लेकिन पैदावार कम होने से बाजार में इसकी कमी हो गई, जिससे दाम तेजी से बढ़े।
कीमतों के उतार-चढ़ाव पर नजर रखने और उन्हें स्थिर करने के लिए सरकार एक 'मूल्य निगरानी समिति' का गठन करेगी।
जमाखोरों पर होगी सख्त कार्रवाई
जरूरी सामानों की जमाखोरी के सवाल पर मंत्री ने कहा कि सरकार इस पर काम कर रही है और कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार के अनुसार, राज्य में राशन कार्ड धारकों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत मिलने वाले जरूरी सामानों की आपूर्ति बिना किसी रुकावट के जारी रहेगी। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि अगले तीन महीनों के लिए चीनी, पाम तेल और दालों का पर्याप्त स्टॉक सुरक्षित कर लिया गया है।