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महाराष्ट्र और कर्नाटक में विरोध तेज : गन्ना किसानों का दावा-जल्दी कटाई से प्रति एकड़ छह टन तक घट सकती है उपज

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 16 Oct 2026 07:24 PM IST
सार

  • किसान नेताओं के मुताबिक, समय से पहले गन्ने की पेराई से प्रति एकड़ करीब 20,000 रुपये तक नुकसान हो सकता है।

  • जल्दी कटाई से प्रति एकड़ गन्ने की उपज में करीब छह टन की कमी आने की आशंका है।

  • किसानों का कहना है कि नवंबर के बाद गन्ने में सुक्रोज की मात्रा बेहतर होने लगती है।

  • महाराष्ट्र की कई चीनी मिलों में पेराई शुरू होने की खबर है, जबकि कर्नाटक में परिचालन शुरू नहीं हुआ है।

गन्ना किसान
गन्ना किसान - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ने की समय से पहले पेराई को लेकर किसानों का विरोध तेज हो गया है। किसान नेताओं के मुताबिक, अक्टूबर की शुरुआत में गन्ने की कटाई और पेराई शुरू होने से किसानों को प्रति एकड़ करीब 20,000 रुपये तक का नुकसान हो सकता है। वहीं, समय से पहले कटाई के कारण प्रति एकड़ गन्ने की उपज में करीब छह टन की कमी आने की आशंका है। जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, इसी मुद्दे पर किसान 2026-27 के गन्ना पेराई सत्र को समय से पहले शुरू करने का विरोध कर रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महाराष्ट्र की कई चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी है, जबकि कर्नाटक में अभी तक मिलों का संचालन शुरू नहीं हुआ है। किसानों का कहना है कि गन्ने को पूरी तरह पकने से पहले काटने पर उसमें चीनी की मात्रा कम रहती है। इससे चीनी उत्पादन घट सकता है और किसानों के साथ-साथ चीनी मिलों की कमाई पर भी असर पड़ सकता है।

पकने से पहले कटाई से घट सकती है चीनी की मात्रा
किसानों के मुताबिक, गन्ने में सुक्रोज यानी चीनी बनाने वाला प्रमुख तत्व समय के साथ बढ़ता है। आमतौर पर नवंबर के बाद गन्ने में सुक्रोज का स्तर बेहतर होने लगता है। ऐसे में अक्टूबर की शुरुआत में पेराई शुरू करने से गन्ने से कम चीनी निकलने की आशंका रहती है। किसानों का तर्क है कि समय से पहले कटाई करने पर गन्ने की उपज और उससे बनने वाली चीनी, दोनों में कमी आ सकती है। इसका सीधा असर किसानों की कमाई पर पड़ेगा।

चीनी मिलों की कमाई और भुगतान पर भी असर की आशंका
किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि अगर गन्ने से चीनी की प्राप्ति कम होती है, तो चीनी मिलों की आर्थिक स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। इससे किसानों को गन्ने का भुगतान समय पर करने में मिलों के सामने मुश्किलें बढ़ने की आशंका है। किसानों को यह भी डर है कि इस पेराई सत्र में उत्पादन घटने का असर अगले सत्र तक बना रह सकता है। इससे उनकी आमदनी पर लंबे समय तक दबाव पड़ सकता है।

समय से पहले पेराई के विरोध में प्रदर्शन तेज
गन्ना पेराई सत्र 2026-27 को जल्दी शुरू करने के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र और कर्नाटक में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। किसान चाहते हैं कि गन्ने की कटाई और पेराई फसल के पकने की स्थिति को ध्यान में रखकर शुरू की जाए, ताकि उपज और चीनी की मात्रा में कमी से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। किसानों का कहना है कि पेराई शुरू करने का समय तय करते हुए उनकी आय, फसल की गुणवत्ता और चीनी मिलों की भुगतान क्षमता को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
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