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GM Basmati: जीएम बासमती चावल की खेती को कथित मंजूरी पर सुप्रीम कोर्ट से अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 12 Oct 2026 01:36 PM IST
सार

जीएम बासमती चावल की कथित मंजूरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि जीएम फसलों पर 2024 के अदालती निर्देशों का उल्लंघन हुआ है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अदालत का अंतिम फैसला आना बाकी है।
 

बासमती चावल
बासमती चावल - फोटो : AI Image
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विस्तार
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जीएम बासमती चावल की खेती को कथित मंजूरी दिए जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट से अवमानना याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग की गई है। सोमवार को वकील प्रशांत भूषण ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने यह मामला उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जीएम फसलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट के 2024 के फैसले का उल्लंघन हुआ है।

जीएम बासमती से नुकसान की आशंका
प्रशांत भूषण ने अदालत से कहा कि खरपतवारनाशक सहने वाली जीएम बासमती चावल की किस्मों की खेती को मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई है। इससे पारंपरिक बासमती चावल की किस्मों को नुकसान पहुंच सकता है और दूसरी किस्मों में इनके गुण फैलने का खतरा है।

उन्होंने कहा कि अवमानना याचिका का मामला जीएम सरसों से जुड़े उस मुद्दे से अलग है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट की विशेष पीठ विचार कर रही है। इसलिए, इस याचिका को नियमित अवमानना पीठ के सामने सूचीबद्ध किया जाना चाहिए।

वर्ष 2024 के फैसले के उल्लंघन का आरोप
यह अवमानना याचिका सामाजिक कार्यकर्ता अरुणा रोड्रिग्स ने 2025 में दायर की थी। इसमें केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है। याचिका में आरोप है कि सरकार ने जीएम और जीन-संपादित फसलों को जारी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन नहीं किया।

23 जुलाई 2024 के फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने जीएम फसलों पर विशेषज्ञों, राज्य सरकारों और अन्य संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श के बाद व्यापक राष्ट्रीय नीति बनाने का निर्देश दिया था।

जीएम और जीन-संपादित चावल की किस्मों पर सवाल
याचिका में दावा किया गया है कि खरपतवारनाशक सहने वाली जीएम बासमती किस्मों को ‘RobiNOweed’ नाम से मई 2024 में व्यावसायिक रूप से जारी किया गया। इसके अलावा, जीन-संपादित चावल की किस्मों डीआरआर राइस 100, जिसे ‘कमला’ नाम दिया गया है, और पूसा डीएसटी राइस 1 को मई 2025 में जारी किए जाने का भी आरोप है।

याचिका के मुताबिक, सरकार ने पहले अदालत को भरोसा दिया था कि व्यापक नीति बनने से पहले जीएम फसलों को पर्यावरण में जारी नहीं किया जाएगा। अब याचिकाकर्ता ने इन कथित कदमों को उसी आश्वासन और अदालत के निर्देशों के विपरीत बताया है।
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