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Bharat Rice: एफसीआई के साथ सेना की नई साझेदारी, अब सीमा पर तैनात जवानों की थाली में परोसा जाएगा 'भारत चावल'

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 12 Oct 2026 03:25 PM IST
सार

भारतीय सेना ने सैनिकों के लिए ‘भारत चावल’ की शुरुआत की है। तय गुणवत्ता मानकों के अनुसार तैयार चावल की आपूर्ति वित्त वर्ष 2026-27 में नेफेड के माध्यम से होगी। साथ ही, आपात स्थिति में सेना एफसीआई के चिन्हित गोदामों, श्रमिकों और उपकरणों का इस्तेमाल कर सकेगी। इस पहल का उद्देश्य सैनिकों को बेहतर राशन देना और खाद्य आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाना है। जानिए, विस्तार से...

सेना को ‘भारत चावल’ की आपूर्ति सैनिकों से मिले सुझावों के आधार पर शुरू की गई है।
सेना को ‘भारत चावल’ की आपूर्ति सैनिकों से मिले सुझावों के आधार पर शुरू की गई है। - फोटो : Ai
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विस्तार
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खेत में किसान की मेहनत से उपजा अनाज अब सीमा पर तैनात सैनिकों की थाली तक पहुंचाने के लिए भारतीय सेना ने एक नई पहल शुरू की है। सोमवार, 12 अक्टूबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी की मौजूदगी में ‘भारत चावल’ की शुरुआत की गई।

इस पहल का मकसद सैनिकों को बेहतर गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध कराना है। खास बात यह है कि इसकी आपूर्ति लद्दाख और पूर्वोत्तर जैसे दुर्गम इलाकों में स्थित सेना के आपूर्ति डिपो तक भी की जाएगी।

रक्षा मंत्री ने इस पहल को ‘जय जवान, जय किसान’ की भावना से जोड़ते हुए कहा कि यह उस सामूहिक संकल्प का प्रतीक है, जिसमें किसान की मेहनत सैनिक की ताकत बनती है। उन्होंने कहा कि सैनिकों का कल्याण और उन्हें समय पर जरूरी सामान पहुंचाना राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा है।

कैसा होगा सैनिकों की थाली का चावल?
‘भारत चावल’ की आपूर्ति सैनिकों से मिले सुझावों के आधार पर शुरू की गई है। धान की मिलिंग तय रक्षा मानकों के मुताबिक होगी। चावल की गुणवत्ता की जांच की जाएगी और उसमें बाहरी पदार्थों तथा मिलावट की गुंजाइश नहीं रहने देने पर जोर होगा। टूटे, क्षतिग्रस्त और बदरंग दानों की मात्रा भी न्यूनतम रखने का लक्ष्य है।

वित्त वर्ष 2026-27 में इस चावल की आपूर्ति राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नेफेड) के माध्यम से की जाएगी। इसे 10 और 30 किलो के थैलों में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि सामान उठाने और दूरस्थ चौकियों तक पहुंचाने में आसानी हो।

यह पहल केवल राशन की गुणवत्ता सुधारने तक सीमित नहीं है। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों तक नियमित रूप से खाद्य सामग्री पहुंचाना बड़ी चुनौती है। ऐसे में सुविधाजनक पैकेजिंग और बेहतर आपूर्ति व्यवस्था से इस काम को आसान बनाने की कोशिश की जा रही है।

आपात स्थिति में सेना के काम आएंगे एफसीआई के गोदाम
‘भारत चावल’ की शुरुआत के साथ भारतीय सेना और भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के बीच पांच साल के लिए एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके तहत जरूरत पड़ने पर सेना, एफसीआई के चिन्हित गोदामों, श्रमिकों और सामान की आवाजाही में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की मदद ले सकेगी। आपसी सहमति से इस समझौते की अवधि बढ़ाई जा सकती है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध में हथियारों और तकनीक के साथ मजबूत रसद व्यवस्था भी निर्णायक होती है। ऑपरेशन सिंदूर से मिले अनुभवों ने दिखाया कि आपात स्थिति में कम समय के भीतर बड़ी मात्रा में सामान जुटाने और उसे संबंधित क्षेत्रों तक पहुंचाने की क्षमता जरूरी है।

एफसीआई के पास देशभर में गोदाम, आधुनिक भंडारण सुविधाएं, साइलो और प्रशिक्षित कर्मचारी हैं। जरूरत के समय इस व्यवस्था का उपयोग सेना की आपूर्ति में किया जा सकेगा। इससे राशन और अन्य जरूरी सामान का भंडारण, परिवहन तथा अग्रिम क्षेत्रों तक वितरण आसान बनाने में मदद मिल सकती है।

किसान से सैनिक तक जुड़ी है यह पहल
इस पहल का ग्रामीण भारत से सीधा जुड़ाव है। चावल की आपूर्ति के पीछे धान उगाने वाले किसान, मिलिंग से जुड़े लोग, सहकारी संस्थाएं और परिवहन व्यवस्था काम करती हैं। बेहतर गुणवत्ता के तय मानकों और नियमित आपूर्ति की व्यवस्था से इस पूरी श्रृंखला में समन्वय का महत्व बढ़ता है।

हालांकि, सरकार की इस घोषणा में किसानों को मिलने वाले मूल्य, धान की खरीद की मात्रा या किसानों की आय पर पड़ने वाले सीधे असर के बारे में कोई अलग जानकारी नहीं दी गई है। फिलहाल इसका मुख्य उद्देश्य सैनिकों को निर्धारित गुणवत्ता वाला चावल उपलब्ध कराना और आपात स्थिति में खाद्य आपूर्ति व्यवस्था को मजबूत करना है।

खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा कि देश की रक्षा करने वाले सैनिकों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना सरकार का कर्तव्य है। इस कार्यक्रम में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और रक्षा, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग, एफसीआई तथा नेफेड के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

रसद व्यवस्था मजबूत करने की व्यापक योजना
सेना ने हाल के वर्षों में जवानों के राशन की गुणवत्ता और मात्रा में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें अग्निवीरों को अतिरिक्त राशन देने और तीनों सेनाओं में राशन की मात्रा को समान स्तर पर लाने जैसी पहल शामिल हैं। जैविक राशन शुरू करने का सुझाव भी दिया गया है।

एफसीआई के साथ समझौता और ‘भारत चावल’ की शुरुआत इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा हैं। इनका उद्देश्य है कि सामान्य परिस्थितियों में सैनिकों को अच्छा भोजन मिले और संकट के समय भी आपूर्ति बाधित न हो।

किसान के खेत से लेकर सीमा पर तैनात जवान की थाली तक पहुंचने वाला यह अनाज खेती, खाद्य आपूर्ति और राष्ट्रीय सुरक्षा के आपसी रिश्ते को भी सामने लाता है।
 
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