विज्ञापन
Home› Kheti Kisani› Krishi Vyapar› Mathematics Of Demand And Supply Of Arhar Why Does The Government Want To Buy Arhar Directly From Farmers

अरहर का बफर स्टॉक बनाने की कोशिशों को कैसे लगा झटका: किसानों से सीधे ये दाल क्यों खरीदना चाहती है सरकार?

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Mon, 18 Mar 2024 05:29 PM IST
सार

सरकार दाल का बफर बनाना चाहती है, जिसका उपयोग कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए विपणन हस्तक्षेप कार्यक्रमों के लिए किया जा सकता है। लेकिन, अरहर दाल की मंडी कीमतें 7000 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से लगभग 50 फीसदी अधिक होने के कारण सरकारी एजेंसियां 10 लाख टन बफर स्टॉक बनाने के उद्देश्य से बाजार मूल्य पर किसानों से सीधे दाल खरीदने के लिए प्रयास कर रही हैं। 

अरहर की दाल
अरहर की दाल - फोटो : गांव जंक्शन
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सहकारी संस्था नेफेड और राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ (एनसीसीएफ) जैसी एजेंसियों ने अब तक किसानों से केवल 20,000 टन अरहर दाल खरीदी है। सरकार ने इस साल की शुरुआत में 'डायनामिक प्राइस' फॉर्मूले के जरिए एमएसपी से ऊपर दालों की खरीद शुरू की थी। व्यापारियों का कहना है कि सरकारी एजेंसियां किसानों से बाजार मूल्य पर दालें खरीदने की इच्छुक हैं, लेकिन बफर के लिए बड़ी मात्रा में दाल खरीदना मुश्किल होगा, क्योंकि बाजार बेहतर कीमत दे रहा है।

महाराष्ट्र के कारोबारी सूत्रों के अनुसार, अरहर की दाल की आवक पहले ही अधिक है और मंडी की कीमतें एमएसपी से 48 फीसदी ऊपर, 10,400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास चल रही हैं। आवक अगले एक महीने तक जारी रहेगी और किसान भी ऊंची कीमतों की उम्मीद में स्टॉक जमा कर रहे हैं।

दूसरी ओर, अरहर दाल की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को भी कीमतें बढ़ने का कारण बताया जा रहा है। वर्ष 2023-24 फसल वर्ष (जुलाई-जून) में अरहर का उत्पादन 33.3 लाख टन होने का अनुमान है, जो पिछले फसल वर्ष की तुलना में थोड़ा कम है। वर्ष 2023 में 7.7 लाख टन आयात के बावजूद, उपभोक्ता मामलों के विभाग के अनुसार, अरहर की औसत खुदरा कीमतें साल की शुरुआत से 160 रुपये प्रति किलोग्राम रही हैं। सभी प्रकार की दालों में अरहर की खुदरा कीमत सबसे अधिक हैं।

फसल वर्ष 2022-23 में कुल दलहन उत्पादन 260.5 लाख टन था। सालाना अनुमानित खपत लगभग 280 लाख टन है। हालांकि, अरहर, उड़द और मसूर के उत्पादन एवं खपत के मामले में थोड़ा अंतर देखने को मिलता है। सरकार ने मार्च, 2025 तक अरहर, उड़द और मसूर सहित तीन दालों को शून्य आयात शुल्क व्यवस्था के तहत रखकर आयात पर एक सतत नीति अपनाई है ताकि उन देशों में किसान पहले से ही दालें उगाने का निर्णय ले सकें। 

घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कुछ देशों पर दालों की अपनी आयात निर्भरता में विविधता लाने के लिए, भारत के ब्राजील और अर्जेंटीना में दालें, विशेष रूप से अरहर और उड़द उगाने की संभावना तलाशे जाने की भी खबरें हैं। 

वर्ष 2016 में जब अरहर की खुदरा कीमतें 200 रुपये किलोग्राम तक पहुंच गईं थी, तो पांच साल के लिए सालाना 2 लाख टन अरहर के आयात के लिए भारत का मोजाम्बिक के साथ करार हुआ था। इस करार को सितंबर, 2021 में अगले पांच वर्षों के लिए बढ़ा दिया गया था। वर्ष 2021 में, भारत ने 2025 तक प्रति वर्ष क्रमशः 50,000 टन और एक लाख टन अरहर के आयात के लिए मलावी और म्यांमार के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

फरवरी, 2024 में दालों और उत्पादों की श्रेणी में खुदरा मुद्रास्फीति 18.9 फीसदी थी, वहीं अरहर की दाल की कीमत में साल दर साल 36.82 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। दिसंबर, 2022 से अरहर दाल की मुद्रास्फीति दोहरे अंक में रही है और दिसंबर, 2023 में मूल्य वृद्धि साल दर साल रिकॉर्ड 42.4 फीसदी दर्ज की गई।
विज्ञापन
विज्ञापन