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Shrimp Exports: गैर-अमेरिकी बाजारों में जोरदार मांग ने बढ़ाया भारतीय झींगा निर्यात, 18% की तेज वृद्धि

गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा Published by: Himanshu Mishra Updated Sun, 23 Nov 2025 08:38 AM IST
सार

रिपोर्ट के अनुसार, “अमेरिकी खरीदार त्योहारी मांग को देखते हुए अभी ऊंचे शुल्क का कुछ हिस्सा संभाल रहे हैं, लेकिन नई बुकिंग कमजोर है। लगातार बढ़ते शुल्क से निर्यात पर दबाव जारी रहेगा।”

झींगा
झींगा - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अमेरिकी बाजार में बढ़ते शुल्क, तगड़ी प्रतिस्पर्धा और कमजोर नई मांग के बावजूद भारतीय झींगा उद्योग ने अपनी पकड़ ढीली नहीं पड़ने दी है। रणनीतिक बाज़ार विविधीकरण और नए देशों में बढ़ती पहुंच के चलते भारत के झींगा निर्यात ने वित्त वर्ष 2025-26 के शुरुआती पांच महीनों में उल्लेखनीय मजबूती दिखाई। गैर-अमेरिकी बाजारों में तेज उछाल ने न सिर्फ मूल्य वृद्धि को सहारा दिया, बल्कि अमेरिकी दबाव को भी काफी हद तक कम किया है।

5 महीनों में 18% की वृद्धि, निर्यात मूल्य 2.43 अरब डॉलर तक पहुंचा
CareEdge Ratings की रिपोर्ट के अनुसार, FY26 के पहले पांच महीनों में भारत के कुल झींगा निर्यात मूल्य में 18% की सालाना वृद्धि हुई, जो बढ़कर 2.43 अरब डॉलर पर पहुंच गया। निर्यात मात्रा में भी 11% की बढ़ोतरी हुई, जो 3.48 लाख मीट्रिक टन रही। यह वृद्धि ऐसे समय में दर्ज हुई है जब वैश्विक मांग मिश्रित है और अमेरिका—जो अब तक भारत का सबसे बड़ा बाजार रहा है—कड़े व्यापारिक बाधाओं से गुजर रहा है।

गैर-अमेरिकी बाजारों में 30% उछाल, हिस्सेदारी 57% पहुंची
भारतीय निर्यातकों ने अपनी रणनीति बदलते हुए गैर-अमेरिकी बाजारों पर जोर देना शुरू किया है। गैर-अमेरिकी बाजारों से निर्यात मूल्य 1.06 अरब डॉलर से बढ़कर 1.38 अरब डॉलर हो गया—30% वृद्धि। वित्तीय वर्ष 25 के शुरुआती 5 महीनों में इन बाजारों की हिस्सेदारी 51% थी, जो वित्तीय वर्ष 26 में बढ़कर 57% हो गई।

मुख्य गैर-अमेरिकी बाजार
  • चीन (सबसे बड़ा बाजार): 16% वृद्धि
  • वियतनाम: निर्यात मूल्य दोगुना होकर 0.18 अरब डॉलर
  • बेल्जियम: निर्यात दोगुना होकर 0.14 अरब डॉलर
  • रूस, जापान: स्थिर से बेहतर प्रदर्शन
CareEdge के अनुसार कुल मूल्य वृद्धि का 86% योगदान इन्हीं बाजारों से आया।

अमेरिकी बाजार में धीमी रफ्तार, उच्च शुल्क बना बड़ी चुनौती
अमेरिका भारतीय झींगा का पारंपरिक बड़ा बाजार रहा है, लेकिन FY26 में यहां प्रदर्शन कमजोर रहा। पहले 5 महीनों में अमेरिकी बाजार में सिर्फ 5% वृद्धि दर्ज हुई। अगस्त 2025 में निर्यात में 35% गिरावट देखी गई।

उच्च शुल्क प्रमुख कारण
  • अप्रैल–अगस्त 2025 के दौरान भारत पर प्रभावी शुल्क 18% था।
  • वहीं प्रतिद्वंद्वी इक्वाडोर और इंडोनेशिया पर शुल्क 13–14% था।
  • अगस्त 2025 के बाद भारत पर शुल्क बढ़कर 58% हो गया, जबकि अन्य देशों पर 18–49% रहा।

इससे अमेरिका के रिटेल और फूड सर्विस सेगमेंट में भारत की कीमत प्रतिस्पर्धा कमजोर पड़ गई, और इक्वाडोर तथा इंडोनेशिया को बढ़त मिली।

निर्यातकों ने नए बाजारों में खोले रास्ते, EU और रूस से बढ़ी मंजूरी
उद्योग ने शुल्क दबाव का असर कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं—
  • पहले जिन बाजारों में पहुंच सीमित थी, वहां नए अवसर खोले गए।
  • भारतीय प्रोसेसिंग इकाइयों को EU और रूस में अतिरिक्त मंजूरी मिली, जिससे निर्यात क्षमता बढ़ी।
  • H2 FY26 में रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका
CareEdge Ratings का अनुमान है कि दूसरे छमाही में झींगा निर्यात 10–12% तक नरम पड़ सकता है। अमेरिकी बाजार के ऑर्डर धीमे रहे तो आखिरी तिमाही पर असर पड़ेगा। रिपोर्ट के अनुसार, “अमेरिकी खरीदार त्योहारी मांग को देखते हुए अभी ऊंचे शुल्क का कुछ हिस्सा संभाल रहे हैं, लेकिन नई बुकिंग कमजोर है। लगातार बढ़ते शुल्क से निर्यात पर दबाव जारी रहेगा।”

आगे क्या?
गैर-अमेरिकी बाजारों में मजबूत पकड़ भारत के लिए सहारा बनी रहेगी। वियतनाम और बेल्जियम जैसे बाजारों में तेज वृद्धि भविष्य की संभावनाओं को मजबूत करती है। लेकिन यदि अमेरिकी शुल्क लंबे समय तक जारी रहते हैं, तो भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर असर बढ़ सकता है।
 
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