Home›Kheti Kisani›Krishi Vyapar›
India Bans Foreign Fishing Vessels In Eez Waters Issues New Deep Sea Fishing Rules To Empower Local Fishermen
सरकार का बड़ा फैसला: EEZ सीमा में विदेशी जहाजों की एंट्री पर रोक, जारी हुए नए नियम; मछुआरों को मिलेगा अधिकार
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Sun, 09 Nov 2025 07:39 AM IST
सार
भारत के पास 11,099 किमी लंबा तटवर्ती क्षेत्र और 23 लाख वर्ग किलोमीटर का EEZ क्षेत्र है, जहां से 50 लाख से अधिक लोग अपनी आजीविका चलाते हैं। भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है।
एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए नए नियम जारी।
- फोटो : सोशल मीडिया
भारत सरकार ने देश के समुद्री संसाधनों की सुरक्षा और मछुआरों को सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। केंद्र ने एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन (EEZ) में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने के लिए नए नियम अधिसूचित किए हैं, जिसके तहत अब विदेशी जहाजों को भारतीय जल क्षेत्र में मछली पकड़ने की अनुमति नहीं होगी। सरकार का उद्देश्य है कि समुद्री मत्स्य क्षेत्र के विस्तार और आधुनिकरण के साथ छोटे मछुआरों और उनके सहकारी संगठनों को अधिक अवसर मिलें।
विदेशी जहाजों पर पूर्ण प्रतिबंध
मत्स्य पालन मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि नए नियमों के तहत विदेशी मछली पकड़ने वाले जहाजों को भारत के EEZ क्षेत्र में किसी भी प्रकार से संचालन की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह कदम देशी मछुआरों के हितों की रक्षा और अवैध मछली पकड़ने की गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। सरकार ने यह भी कहा कि अब भारत EEZ क्षेत्र में “नेशनल प्लान ऑफ एक्शन” तैयार करेगी, ताकि अवैध, अनियमित और अनियंत्रित (IUU) फिशिंग पर प्रभावी नियंत्रण हो सके।
छोटे मछुआरों और सहकारी समितियों को प्राथमिकता
नए ढांचे के तहत सरकार ने कहा है कि EEZ क्षेत्र में गहरे समुद्र में मछली पकड़ने का अधिकार फिशरमेन कोऑपरेटिव सोसाइटीज और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशंस (FFPOs) को प्राथमिकता के साथ दिया जाएगा। इन समितियों को आधुनिक तकनीक से लैस डीप-सी फिशिंग वेसल्स (Deep Sea Fishing Vessels) उपलब्ध कराए जाएंगे, ताकि वे अंतरराष्ट्रीय मानकों पर प्रतिस्पर्धी बन सकें।
एक्सेस पास अनिवार्य, लेकिन पारंपरिक मछुआरे मुक्त
EEZ नियमों के तहत, बड़े और यंत्रीकृत जहाजों के लिए “एक्सेस पास” (Access Pass) आवश्यक होगा, जिसे ReALCRaft पोर्टल के माध्यम से नि:शुल्क ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकता है। हालांकि, पारंपरिक और छोटे मछुआरे जो मोटराइज्ड या बिना मोटर वाली नावों से मछली पकड़ते हैं, उन्हें इस पास की आवश्यकता नहीं होगी। फिलहाल देश के 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 2.38 लाख मछली पकड़ने वाले जहाज पंजीकृत हैं, जिनमें से 1.72 लाख छोटे जहाजों को छूट दी गई है, जबकि 64,187 यंत्रीकृत जहाजों को एक्सेस पास लेना होगा।
डिजिटल निगरानी और निर्यात प्रमाणन की नई प्रणाली
ReALCRaft पोर्टल को अब MPEDA (Marine Products Export Development Authority) और Export Inspection Council (EIC) से जोड़ा जा रहा है, ताकि निर्यात के लिए आवश्यक Fish Catch और Health Certificates जारी किए जा सकें। यह डिजिटल एकीकृत प्रणाली ट्रेसबिलिटी, सैनेटरी अनुपालन और ईको-लेबलिंग सुनिश्चित करेगी, जिससे भारतीय समुद्री उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
‘मदर-एंड-चाइल्ड’ वेसल कॉन्सेप्ट की शुरुआत
सरकार ने एक नई अवधारणा “Mother-and-Child Vessel” शुरू की है, जिसके तहत बड़े जहाज (मदर शिप) समुद्र में ही छोटे जहाजों (चाइल्ड बोट्स) से मछली का ट्रांसशिपमेंट कर सकेंगे। यह मॉडल रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के नियमन के अंतर्गत स्वीकृत होगा और अंडमान, निकोबार व लक्षद्वीप द्वीप समूहों जैसे क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से लाभकारी रहेगा, जो भारत के EEZ क्षेत्र का लगभग 49% हिस्सा हैं।
हानिकारक मछली पकड़ने की तकनीकों पर रोक
पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने LED लाइट फिशिंग, पेयर ट्रॉलिंग और बुल ट्रॉलिंग जैसी हानिकारक तकनीकों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। जल्द ही सरकार विभिन्न मछली प्रजातियों के न्यूनतम कानूनी आकार (Minimum Legal Size) तय करेगी और राज्यों व हितधारकों के साथ मिलकर फिशरीज मैनेजमेंट प्लान तैयार करेगी।
भारत का समुद्री मत्स्य क्षेत्र और अर्थव्यवस्था में योगदान
भारत के पास 11,099 किमी लंबा तटवर्ती क्षेत्र और 23 लाख वर्ग किलोमीटर का EEZ क्षेत्र है, जहां से 50 लाख से अधिक लोग अपनी आजीविका चलाते हैं। भारत आज दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मत्स्य उत्पादक देश है। निति आयोग की रिपोर्ट (2025) के अनुसार, भारत का मत्स्य निर्यात 2013-14 के ₹30,213 करोड़ से बढ़कर 2023-24 में ₹60,523 करोड़ तक पहुंच गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि भारत अगले 15 वर्षों में ₹9,000 करोड़ का निवेश करता है, तो डीप-सी फिशिंग और इनलैंड फिशिंग सेक्टर दोनों में जबरदस्त विकास संभव है।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।