भारत ने खाद्य उत्पादन के मोर्चे पर बड़ी प्रगति हासिल की है, लेकिन जल तक पहुंच और उसका प्रबंधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अब भी बड़ी बाधाओं में शुमार हैं। यह बात संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी इंटरनेशनल फंड फॉर एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट के अध्यक्ष अलवारो लारियो के हवाले से सामने आई है। उन्होंने खेती-बाड़ी में बारिश पर निर्भरता का भी जिक्र किया।
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत के कुल बोए गए रकबे (नेट सोन एरिया) का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा वर्षा आधारित खेती के तहत आता है, जिसका देश के कुल खाद्य उत्पादन में करीब 40 प्रतिशत योगदान है।
भारत की 40% आबादी की जेब से बाहर पौष्टिक आहार
आईएफएडी अध्यक्ष अलवारो लारियो ने कहा कि खाद्य सुरक्षा का मतलब केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि पौष्टिक भोजन को किफायती बनाना और ग्रामीण आजीविका में सुधार करना भी है। उन्होंने बताया कि इस समय सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक पौष्टिक आहार की लागत है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2024 में भारत की लगभग 40.4 प्रतिशत आबादी पौष्टिक आहार का खर्च वहन करने में असमर्थ थी।
50 सालों की साझेदारी और नई 8-वर्षीय रणनीति
अलवारो लारियो 7 से 11 अक्टूबर तक भारत की यात्रा पर हैं, जिसका मकसद सरकार और ग्रामीण विकास से जुड़े संस्थानों के साथ सहयोग को और गहरा करना है। आईएफएडी और भारत की साझेदारी के जल्द ही 50 वर्ष पूरे होने वाले हैं।
आईएफएडी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, एजेंसी ने अब तक भारत में 37 परियोजनाओं में लगभग 1.5 अरब डॉलर का निवेश किया है। इस पहल से 60 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों, खासकर महिलाओं, आदिवासी समुदायों और छोटे किसानों को लाभ पहुंचा है। लारियो के अनुसार, आईएफएडी द्वारा लगाए गए प्रत्येक एक डॉलर के बदले कुल तीन डॉलर से अधिक का निवेश जुटाया गया है।
ग्रामीण परिवारों के लिए नई रणनीति
संस्था ने मई में भारत के लिए वर्ष 2026 से 2033 तक की आठ-वर्षीय नई रणनीति शुरू की है। इसका लक्ष्य लगभग 30 लाख ग्रामीण परिवारों यानी 1.32 करोड़ लोगों तक पहुंचना है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण आबादी को जलवायु और आर्थिक उतार-चढ़ाव के प्रभावों से बचाना है, ताकि मानसून की बेरुखी या फसलों की कीमतों में गिरावट उन्हें दोबारा गरीबी में न धकेल सके।
पूर्वोत्तर और हिमालयी क्षेत्रों पर खास नजर
आईएफएडी के अनुसार, एजेंसी का ध्यान अब जलवायु परिवर्तन के लिहाज से अधिक संवेदनशील क्षेत्रों पर है, जिसमें पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य प्राथमिकता पर हैं। लारियो शुक्रवार को मेघालय में 'मेघालय लाइवलीहुड्स एंड एक्सेस टू मार्केट्स प्रोजेक्ट' का दौरा करेंगे, जिसे राज्य सरकार और आईएफएडी के सहयोग से वर्ष 2014 में शुरू किया गया था।
मेघालय में जैविक मसाला कारखाने में 2 करोड़ का निवेश
पूर्वोत्तर में ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने के लिए आईएफएडी ने मेघालय में एक जैविक मसाला प्रसंस्करण इकाई में 2 करोड़ रुपये का निवेश किया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने जून में इस इकाई का उद्घाटन किया था। यह पूर्वोत्तर की पहली और सबसे बड़ी ऐसी इकाई है, जिसकी वार्षिक प्रसंस्करण क्षमता 10,000 मीट्रिक टन से अधिक है और यह करीब 5,500 किसानों के साथ काम कर रही है।