बांग्लादेश और नेपाल से आने वाले जूट उत्पादों पर भारत सरकार ने एंटी-डंपिंग ड्यूटी बढ़ा दी है। इससे घरेलू जूट उद्योग को सस्ते आयात से राहत मिलने और भारतीय जूट मिलों में मांग व उत्पादन बढ़ने की उम्मीद है। इसका फायदा जूट मिलों के साथ करीब चार लाख श्रमिकों और कच्चा जूट उगाने वाले करीब 40 लाख किसान परिवारों को मिलने की संभावना है। वित्त मंत्रालय ने यह फैसला व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) की मध्यावधि समीक्षा के बाद लिया है। नई दरें लागू हो चुकी हैं।
चार साल में करीब 50 फीसदी बढ़ा आयात
सरकार ने 2017 में जूट उत्पादों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाई थी, जिसे 2022 में आगे बढ़ाया गया था। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में इस शुल्क का असर कम होता गया। पिछले चार साल में बांग्लादेश और नेपाल से जूट यार्न, हेसियन और सैकिंग के आयात में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। अब भारत में इस्तेमाल होने वाले जूट उत्पादों में इन दोनों देशों से आने वाले उत्पादों की हिस्सेदारी करीब सात में से एक टन हो गई है। नई व्यवस्था में पुराने शुल्क की जगह प्रत्येक निर्यातक मिल के हिसाब से अलग-अलग शुल्क तय किया गया है। जिन निर्यातकों ने जांच में सहयोग नहीं किया, उन पर काफी अधिक शुल्क लगाया गया है।
जूट उद्योग ने फैसले का स्वागत किया
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय जूट मिल्स एसोसिएशन (IJMA) ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। संगठन के अध्यक्ष राघवेंद्र गुप्ता के अनुसार, इससे भारतीय जूट उद्योग के उत्पादों की घरेलू मांग बढ़ सकती है। मांग बढ़ने पर जूट मिलों की उत्पादन क्षमता का बेहतर इस्तेमाल होगा और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। उद्योग का कहना है कि शुल्क बढ़ाने का उद्देश्य आयात रोकना नहीं, बल्कि भारतीय और विदेशी उत्पादों के बीच निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना है।
बांग्लादेश-नेपाल की सब्सिडी की भी जांच
DGTR ने जूट मिल्स एसोसिएशन की शिकायत पर बांग्लादेश और नेपाल के निर्यातकों को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी की अलग से जांच भी की। जांच में पाया गया कि बांग्लादेश की जूट मिलों को निर्यात पर नकद प्रोत्साहन और आयकर में छूट मिलती है। नेपाल के निर्यातकों को भी निर्यात प्रोत्साहन और कर संबंधी रियायतें मिलने की बात सामने आई। DGTR ने इन्हें विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत प्रतिबंधित निर्यात सब्सिडी की श्रेणी में रखा है।
सब्सिडी की भरपाई के लिए अलग शुल्क की सिफारिश
DGTR ने पहली बार बांग्लादेश और नेपाल से आने वाले जूट उत्पादों पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी लगाने की सिफारिश की है। इसका उद्देश्य दूसरे देशों की सरकारों की ओर से दी जा रही निर्यात सब्सिडी के असर की भरपाई करना है।
DGTR के मुताबिक, सब्सिडी वाले आयात के कारण भारतीय जूट मिलों को नुकसान हुआ है। सस्ते आयात ने भारतीय उत्पादों की कीमतों पर दबाव डाला, जिससे उत्पादन, बिक्री, क्षमता उपयोग और मुनाफे पर असर पड़ा। अब काउंटरवेलिंग ड्यूटी की सिफारिश पर वित्त मंत्रालय की अधिसूचना का इंतजार है।
चार लाख श्रमिक और 40 लाख किसान परिवार जुड़े
DGTR ने माना कि जूट उद्योग की सुरक्षा जनहित में जरूरी है। भारत की जूट मिलों में करीब चार लाख लोग काम करते हैं, जबकि करीब 40 लाख किसान परिवार कच्चे जूट की खेती से जुड़े हैं। IJMA के पूर्व अध्यक्ष संजय काजरिया ने कहा कि जूट उद्योग लंबे समय से व्यापार उपायों के बावजूद आयात बढ़ने की समस्या देख रहा है। उनके मुताबिक, नई एंटी-डंपिंग ड्यूटी और प्रस्तावित काउंटरवेलिंग ड्यूटी से भारतीय जूट उद्योग को कीमत और गुणवत्ता के आधार पर प्रतिस्पर्धा करने का बेहतर अवसर मिल सकता है।
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