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Government Forms Committee To Review Sugarcane Farmers Demands Cane Pricing And Sugar Mills Issues
चीनी उद्योग से जुड़ी बड़ी पहल : गन्ने की रिकवरी और वजन में गड़बड़ी की होगी जांच, केंद्र ने बनाई विशेषज्ञ समिति
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 14 Oct 2026 08:50 PM IST
सार
केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों की मांगों व चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में समिति बनाई है। समिति गन्ने के लाभकारी मूल्य, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य, शुगर रिकवरी की जांच, मिलों में गन्ने के वजन और मशीन से कटाई के बाद होने वाली कटौती की समीक्षा करेगी।
नीति आयोग के पूर्व सदस्य व कृषि अर्थशास्त्री प्रो. रमेश चंद करेंगे समिति की अगुवाई।
- फोटो : गांव जंक्शन
गन्ना किसानों की समस्याओं और चीनी उद्योग से जुड़े मुद्दों की जांच के लिए केंद्र सरकार ने एक समिति बनाई है। नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में गठित यह समिति गन्ने के लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी की मांग, चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन और किसानों को भुगतान से जुड़े दूसरे मुद्दों की समीक्षा करेगी। सरकार ने समिति से इन समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी उपाय सुझाने को कहा है।
यह समिति कर्नाटक और महाराष्ट्र के गन्ना किसानों के प्रतिनिधियों की केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री तथा केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री के साथ हुई बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर बनाई गई है।
गन्ने के लाभकारी मूल्य में बढ़ोतरी की मांग की समीक्षा
समिति गन्ना किसानों के लिए लाभकारी मूल्य बढ़ाने की मांग की जांच करेगी। इस दौरान गन्ने की खेती की लागत और उससे जुड़े दूसरे जरूरी पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। समिति का काम किसानों की मांगों का आकलन करके सरकार को उचित कदम उठाने की सिफारिश करना है।
इसके साथ ही समिति चीनी मिलों से जुड़े एक अन्य अहम मुद्दे की भी समीक्षा करेगी। वह चीनी के एक्स-मिल न्यूनतम बिक्री मूल्य में बदलाव की मांग पर विचार करेगी। इसके तहत चीनी उत्पादन की लागत, बाजार में चीनी के दाम और मिलों की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाएगा। एक्स-मिल मूल्य वह कीमत है जिस पर चीनी मिल से बिक्री होती है।
गन्ने की रिकवरी और वजन में पारदर्शिता की जांच
गन्ने से कितनी चीनी निकलती है, इसे शुगर रिकवरी कहा जाता है। इसी आधार पर चीनी उत्पादन की क्षमता का आकलन किया जाता है। समिति रिकवरी की जांच और उसकी रिपोर्ट तैयार करने की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करेगी। साथ ही, यह भी देखेगी कि रिकवरी का सही और पारदर्शी आकलन सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।
समिति चीनी मिलों में गन्ने का वजन करने की व्यवस्था की भी जांच करेगी। इसमें वजन करने वाली मशीनों के कैलिब्रेशन, निरीक्षण और सत्यापन की मौजूदा व्यवस्था शामिल होगी। इसका उद्देश्य यह देखना है कि गन्ने का वजन सही तरीके से दर्ज हो रहा है या नहीं और मौजूदा व्यवस्था में सुधार की जरूरत है या नहीं।
मशीन से कटाई पर होने वाली कटौती की भी होगी जांच
समिति मशीन से गन्ने की कटाई के बाद उसके वजन में की जाने वाली कटौती की भी समीक्षा करेगी। वह यह आकलन करेगी कि मशीन से कटाई के दौरान वास्तव में कितना नुकसान होता है और यदि नुकसान होता है, तो उसका गन्ने के वजन और किसानों को मिलने वाले भुगतान पर क्या असर पड़ता है।
समिति मौजूदा व्यवस्था के कारण किसानों को मिलने वाले गन्ने के मूल्य पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव का भी आकलन करेगी। इसके अलावा, जरूरत के मुताबिक गन्ना किसानों और चीनी उद्योग से जुड़े दूसरे मुद्दों पर भी विचार किया जा सकेगा।
किसानों, मिलों और राज्य सरकारों से लेगी सुझाव
समिति अपनी जांच के दौरान किसानों के प्रतिनिधियों, चीनी मिल संघों, राज्य सरकारों और दूसरे विशेषज्ञों या संगठनों से सलाह ले सकती है। इनसे मिले सुझावों और जांच के निष्कर्षों के आधार पर समिति अपनी सिफारिशें तैयार करेगी। उसे अपनी रिपोर्ट जल्द से जल्द सक्षम प्राधिकारी के सामने पेश करनी है।
कृषि अर्थशास्त्री प्रो. रमेश चंद करेंगे समिति की अगुवाई
समिति की अध्यक्षता करने वाले प्रो. रमेश चंद कृषि अर्थशास्त्र और सार्वजनिक नीति के विशेषज्ञ हैं। उन्होंने 2015 से 2026 तक नीति आयोग के सदस्य के रूप में काम किया। इससे पहले वह भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि अर्थशास्त्र एवं नीति अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-एनआईएपी) के निदेशक और 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रह चुके हैं।
समिति में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (चीनी) और उपभोक्ता मामले विभाग के संयुक्त सचिव (विधिक माप-विज्ञान) सदस्य के रूप में शामिल हैं।
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