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Bayer S Directacres Programme Reaches 200 000 Acres Promotes Direct Seeding Of Rice In Nine States
2 लाख एकड़ तक पहुंची बायर की पहल: 9 राज्यों में बढ़ी धान की सीधी बुवाई, पानी की खपत 40% तक घटाने का लक्ष्य
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Wed, 14 Oct 2026 08:08 PM IST
सार
कृषि क्षेत्र की प्रमुख कंपनी बायर की पहल के तहत देश के नौ राज्यों में धान की सीधी बुवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। कंपनी के मुताबिक, वर्ष 2026 में इसका दायरा करीब 2 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र तक पहुंच गया है। इस तरीके से पारंपरिक रोपाई की तुलना में पानी की खपत 30 से 40 फीसदी और मजदूरों पर निर्भरता 50 फीसदी तक कम हो सकती है।
डीएसआर मशीन से धान की सीधी बुवाई।
- फोटो : गांव जंक्शन
धान की खेती में पानी की खपत घटाने, मजदूरों पर निर्भरता कम करने और खेती की लागत घटाने के लिए धान की सीधी बुवाई को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में बायर का का एक खास कार्यक्रम वर्ष 2026 में 81,000 हेक्टेयर यानी करीब 2 लाख एकड़ से अधिक क्षेत्र तक पहुंच गया है।
कंपनी के मुताबिक, इस कार्यक्रम के तहत किसानों को धान की सीधी बुवाई (डीएसआर) अपनाने में मदद दी जा रही है। भारत में धान की खेती के सामने पानी की कमी, खेती की बढ़ती लागत और मजदूरों की कमी जैसी चुनौतियां हैं। पारंपरिक तरीके से धान की रोपाई में काफी पानी और मजदूरों की जरूरत होती है।
ऐसे में धान की सीधी बुवाई को खेती के खर्च और प्राकृतिक संसाधनों पर दबाव कम करने के एक विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
सीधी बुवाई से पानी और मजदूरी की बचत का दावा
कंपनी के मुताबिक, धान की सीधी बुवाई से पारंपरिक रोपाई की तुलना में पानी का इस्तेमाल 30 से 40 फीसदी तक घट सकता है। इससे ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन 45 फीसदी तक और मजदूरों पर निर्भरता 50 फीसदी तक कम करने में मदद मिल सकती है।
सीधी बुवाई में धान की पौध तैयार करके खेत में रोपने के बजाय बीज सीधे खेत में बोए जाते हैं। इससे रोपाई के लिए मजदूरों की जरूरत घट सकती है। हालांकि, इस तरीके में खरपतवार का प्रबंधन, सही मशीनों की उपलब्धता और फसल की देखभाल भी अहम होती है।
बीज से लेकर खेती की सलाह तक पर जोर
कंपनी का डायरेक्टएकर्स नामक यह कार्यक्रम केवल धान की सीधी बुवाई की तकनीक तक सीमित नहीं है। इसके तहत कंपनी उन्नत गुणों वाले बीज, फसल सुरक्षा, डिजिटल खेती के समाधान और कृषि संबंधी सलाह को एक साथ उपलब्ध कराने पर जोर देती है। जरूरत के मुताबिक मशीनों की उपलब्धता और डिजिटल सलाह भी इस कार्यक्रम का हिस्सा हैं।
इस पहल के तहत किसानों और स्थानीय कृषि उद्यमियों को मशीन उपलब्ध कराने वाले साझेदारों, डिजिटल सलाह देने वाली सेवाओं और सरकारी तथा निजी संस्थाओं से जोड़ने का प्रयास किया जाता है। इसका उद्देश्य सीधी बुवाई अपनाने में आने वाली दिक्कतों को दूर करना और छोटे किसानों के लिए इस तरीके को अपनाना आसान बनाना है।
नौ राज्यों में पहुंचा कार्यक्रम
कंपनी के अनुसार, वर्ष 2021 में पायलट परियोजना के रूप में शुरू हुए इस कार्यक्रम का लगातार विस्तार हुआ है। वर्ष 2023 में यह 3,500 हेक्टेयर क्षेत्र तक पहुंचा था, जो 2024 में बढ़कर 17,000 हेक्टेयर और 2025 में 46,000 हेक्टेयर हो गया।
वर्ष 2026 में इसका दायरा 81,000 हेक्टेयर से अधिक हो गया है। फिलहाल यह कार्यक्रम पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में चलाया जा रहा है। कंपनी का कहना है कि राज्यों में इस पहल का विस्तार धान की खेती वाले विविध क्षेत्रों में सीधी बुवाई को बढ़ावा देने के प्रयासों का हिस्सा है।
किसानों की लागत और खेती की दक्षता पर जोर
बायर फॉर इंडिया, बांग्लादेश और श्रीलंका के क्रॉप साइंस डिवीजन के कंट्री डिवीजनल हेड साइमन वीबुश ने कहा कि इस पहल का 2 लाख एकड़ तक पहुंचना दिखाता है कि सही तकनीक, सेवाओं और सहयोग से धान की सीधी बुवाई को अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ावा दिया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में बीज, फसल सुरक्षा, डिजिटल समाधान और कृषि सलाह को एक साथ जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य किसानों की खेती को अधिक लाभकारी और कामकाज को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करना है।
यह कार्यक्रम कंपनी के पुनर्योजी कृषि संबंधी प्रयासों का हिस्सा है। इसके तहत ऐसी खेती को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल हो, उत्पादन क्षमता बनी रहे और खेती बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढाल सके।
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