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Shivraj Bhupender Yadav Review Parali Management Centre Asks States To Act On A War Footing
पराली पर केंद्र की बड़ी बैठक: 8 साल में 4266 करोड़ जारी पर भी बंद पड़ीं मशीनें, राज्यों को दिए गए सख्त निर्देश
गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली
Published by: Umashankar Mishra
Updated Tue, 13 Oct 2026 07:28 PM IST
सार
कृषि भवन में केंद्रीय कृषि और पर्यावरण मंत्री ने की साझा समीक्षा, राज्यों कहा - अब समय बहुत कम, युद्ध स्तर पर उतरें। हरियाणा में पराली जलाने की 53% और यूपी में 32% घटनाओं कम, एमपी में 452% और राजस्थान में 200% बढ़े मामले। जानिए, विस्तार से...
पराली जलने से हवा तो जहरीली होती ही है, मिट्टी के मित्र कीट और पोषक तत्व भी राख हो जाते हैं।
- फोटो : AI Image
धान की कटाई जोरों पर है और रबी की बुवाई सिर पर खड़ी है। ऐसे में पराली की आग रोकने और उसे मिशन मोड में संभालने के लिए आज कृषि भवन में अंतर-मंत्रालयी उच्चस्तरीय बैठक हुई। इसकी सह-अध्यक्षता केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने की।
बैठक में कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, दिल्ली-एनसीआर सहित पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कृषि मंत्री, कृषि सचिव अतीश चंद्रा, पर्यावरण सचिव नरेंद्र भूषण तथा केंद्र व राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। दोनों मंत्रियों ने दो-टूक कहा कि प्रशासनिक अमला फाइलों से निकलकर सीधे खेतों में उतरे। जिलाधिकारी अपने जिलों में तुरंत बैठकें कर सख्त निगरानी और व्यावहारिक समाधान सुनिश्चित करें।
किसान को चाहिए आसान और सस्ता विकल्प
शिवराज सिंह ने कहा कि किसान को अगली फसल की जल्दी है, इसलिए सिर्फ "पराली मत जलाओ" कह देना काफी नहीं। उसे आसान, सुलभ और सस्ता विकल्प देना होगा। पराली जलने से हवा तो जहरीली होती ही है, मिट्टी के मित्र कीट और पोषक तत्व भी राख हो जाते हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा, खेत में मिल जाए तो यही पराली जैविक खाद बनती है और बाहर जाए तो बायो-सीएनजी, बायो-इथेनॉल, बिजली और चारे के रूप में किसान की अतिरिक्त कमाई का जरिया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ऐसा तंत्र खड़ा करना है कि किसान को पराली जलानी ही न पड़े और पर्यावरण अनुकूल खेती से कार्बन क्रेडिट जैसे लाभ भी उसे मिलें।
हरियाणा-यूपी में राहत, एमपी-राजस्थान में चिंता
आंकड़ों के मुताबिक 15 सितंबर से 12 अक्टूबर के बीच पिछले साल की तुलना में हरियाणा में पराली जलाने की घटनाएं 53.3 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश में करीब 32 प्रतिशत घटीं। पंजाब में भी कुछ कमी आई।
मध्य प्रदेश में मामले 55 से बढ़कर 277 (452 प्रतिशत वृद्धि) और राजस्थान में 20 से बढ़कर 60 (200 प्रतिशत वृद्धि) हो गए, जिस पर मंत्री ने गहरी चिंता जताई। दोनों राज्यों से प्रभावित जिलों और गांवों की पहचान कर तुरंत विशेष कार्ययोजना लागू करने को कहा गया।
कटाई का बड़ा हिस्सा अभी बाकी है, इसलिए जिन राज्यों में घटनाएं घटी हैं, वे भी ढिलाई न बरतें।
मशीनें खेत में चलें, कागजों में नहीं
केंद्र अब तक राज्यों को 3.54 लाख से ज्यादा फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें दे चुका है और चालू वित्त वर्ष 2026-27 में 26,109 नई मशीनें और दी गई हैं। मगर केंद्रीय सर्वे में पंजाब की करीब 40 और हरियाणा की 48 प्रतिशत पुरानी मशीनें बंद या खराब मिलीं।
शिवराज सिंह ने निर्देश दिया कि नई मशीनें बांटने के साथ बंद पड़ी मशीनों की तुरंत मरम्मत कराई जाए, वरना मशीनों का संकट खड़ा हो जाएगा। कस्टम हायरिंग सेंटर सक्रिय किए जाएं और छोटे व सीमांत किसानों को सस्ती दरों पर मशीनें हर हाल में मिलें।
केंद्र की भरपूर मदद, पंजाब जल्द भेजे यूसी
फसल अवशेष प्रबंधन (CRM) योजना में 2018-19 से 2025-26 के बीच केंद्र ने राज्यों को 4,266.47 करोड़ रुपये जारी किए। इनमें पंजाब को 2,056.50 करोड़, हरियाणा को 1,171.71 करोड़, उत्तर प्रदेश को 868.67 करोड़ और मध्य प्रदेश को 59 करोड़ रुपये मिले।
चालू वर्ष के लिए 592.57 करोड़ रुपये आवंटित हैं, जिनमें से 430.87 करोड़ जारी हो चुके हैं। राशि के धीमे उपयोग पर चिंता जताते हुए पंजाब सरकार से कहा गया कि पहले जारी रकम का उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) जल्द भेजे, ताकि अगली किस्त बिना रुकावट जारी हो सके।
धुआं नहीं, चारा, बिजली और बायोगैस
सूखाग्रस्त इलाकों में पराली को चारे के रूप में सुरक्षित रखकर मवेशियों तक पहुंचाने के निर्देश दिए गए। थर्मल पावर प्लांटों में पराली पेलेट्स की को-फायरिंग, कंप्रेस्ड बायो गैस (CBG) और 2G बायो-इथेनॉल संयंत्रों से किसानों की सीधी सप्लाई चेन जोड़ने को कहा गया। स्वीकृत परियोजनाएं बिना देरी जमीन पर उतारने पर जोर रहा।
इसके साथ ही, पूसा-44 जैसी लंबी अवधि वाली किस्मों की जगह पूसा 2090 और PR126 जैसी कम अवधि की किस्मों को बढ़ावा देने को कहा गया, ताकि कटाई के बाद खेत खाली करने का पूरा वक्त मिले।
शिवराज बोले - "कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है केंद्र"
शिवराज सिंह ने कहा कि जमीनी अमल की मुख्य जिम्मेदारी राज्यों की है, पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केंद्र तकनीकी, प्रशासनिक और आर्थिक हर मोर्चे पर राज्यों और अन्नदाताओं के साथ खड़ा है। उन्होंने सभी मंत्रालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और जिला प्रशासनों से इसे साझा राष्ट्रीय संकल्प मानकर काम करने की अपील की, ताकि खेत प्रदूषणमुक्त और किसान खुशहाल हों।
दोपहर 3 बजे के बाद सैटेलाइट गैप पर कड़ी नजर
भूपेंद्र यादव ने कहा कि वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पूरी मुस्तैदी से काम कर रहे हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि दोपहर 3 बजे के बाद उपग्रह निगरानी में अंतराल रहता है, इसलिए इस दौरान ग्राउंड पेट्रोलिंग और फ्लाइंग स्क्वॉड के जरिए पराली जलाने पर सख्त नजर रखी जाए।
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