15 अक्तूबर से 5 नवंबर तक लहसुन की बुवाई का सबसे मुफीद समय होता है। समय पर बुवाई और सही किस्म के चुनाव से अच्छी उपज हासिल करने की संभावना काफी बढ़ जाती है। जानकारी के अनुसार, लहसुन की उन्नत किस्में 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर का उत्पादन दे सकती हैं। इस कड़ी मेें हम आपकों लहसुन की पांच किस्मों की जानकारी देने वाले हैं।
पीजी-17 और यमुना सफेद-2, 125 से 175 क्विंटल तक उपज
पीजी-17 किस्म किसानों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है। इस किस्म के लहसुन की एक गांठ में 25 से 30 कलियां देखने को मिलती है। बुवाई के 165 से 170 दिन बाद यह किस्म पककर तैयार हो जाती है। यह किसानों को 125 से 135 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की उपज दे सकती है। दूसरी किस्म यमुना सफेद-2 है, जिसकी एक गांठ में 35-40 कलियों की मौजूदगी होती है। किसान इससे 150 से 175 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज की उम्मीद कर सकते हैं।
अधिक उत्पादन क्षमता वाली यमुना सफेद-3 और यमुना सफेद-4
अगर बड़े आकार वाली किस्म की बुवाई करनी है, तो आप यमुना सफेद-3 का चुनाव कर सकते हैं। इस किस्म की एक गांठ में 15 से 16 कलियां पाई जाती हैं। इस किस्म की औसत उपज 175 से 200 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक बताई गई है। इसके अलावा, यमुना सफेद-4 (जी-323) सबसे अधिक पैदावार देने वाली किस्मों की सूची में शामिल है। इसकी गांठें सफेद होती हैं और एक गांठ में 20 से 25 कलियां मौजूद होती हैं। इस किस्म से किसानों को 200 से 250 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की शानदार उपज मिल सकती है।
निश्चित समय में पककर तैयार होने वाली यमुना सफेद-5 किस्म
यमुना सफेद-5 किस्म की खेती भी किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है। इस किस्म की खासियत यह है कि इसकी फसल 150 से 160 दिनों के भीतर पककर कटाई के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाती है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, यमुना सफेद-5 किस्म से किसानों को 150 से 170 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक की औसत पैदावार मिल जाती है। सही समय पर अपने क्षेत्र की मिट्टी के अनुसार इनमें से उचित किस्म का चुनाव करके किसान लहसुन की खेती से अच्छी कमाई कर सकते हैं।