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Home› Kheti Kisani› Increase Farmer Income At Low Cost With Intercropping In Rabi Season 9 Lines Of Wheat 1 Line Of Mustard

कम लागत में बढ़ सकती है किसान की कमाई : गेहूं के साथ बोएं ये फसलें, एक खेत से होगी डबल आमदनी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Fri, 02 Oct 2026 07:57 PM IST
सार

  • 9 लाइन गेहूं के बाद 1 लाइन सरसों की बुवाई
  • मटर और मसूर के लिए 2:2 या 2:3 का अनुपात
  • एक खेत में दो फसलें, आमदनी के नए अवसर
  • दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाने में मदद करती हैं

गेहूं की खेती
गेहूं की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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रबी सीजन की बुवाई शुरू होने वाली है। अगर आप गेहूं की खेती करने जा रहे हैं तो पूरे खेत में सिर्फ गेहूं बोने के बजाय उसके साथ सरसों, मटर, चना या मसूर की सहफसल भी ले सकते हैं। वैज्ञानिक तरीके से सहफसल की बुवाई करने पर एक ही खेत से दो फसलों का उत्पादन लिया जा सकता है। इससे खेती की लागत को नियंत्रित करने के साथ किसानों को अतिरिक्त आमदनी का मौका मिल सकता है। खास बात यह है कि दलहनी फसलें मिट्टी में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद करती हैं, जिससे यूरिया की जरूरत कम हो सकती है।

गेहूं के साथ सरसों ऐसे बोएं
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक, गेहूं के साथ सरसों की सहफसल लेने के लिए 9:1 का अनुपात रखा जा सकता है। यानी खेत में 9 लाइन गेहूं की और 1 लाइन सरसों की बुवाई करें। इस तरीके से मुख्य फसल गेहूं के साथ सरसों की अतिरिक्त फसल भी ली जा सकती है।

मटर या मसूर के लिए 2:2 या 2:3 का अनुपात
अगर किसान गेहूं के साथ मटर या मसूर की सहफसल लेना चाहते हैं तो 2:2 या 2:3 के अनुपात में बुवाई कर सकते हैं। यानी दो लाइन गेहूं के बाद दो या तीन लाइन मटर अथवा मसूर की बुवाई की जा सकती है। फसल और खेत की स्थिति के अनुसार किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह से उपयुक्त अनुपात का चुनाव कर सकते हैं।

दलहनी फसलों से यूरिया की जरूरत हो सकती है कम
मटर, चना और मसूर जैसी दलहनी फसलें वायुमंडलीय नाइट्रोजन को बांधने में मदद करती हैं। इससे मिट्टी में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाने में सहायता मिलती है। नाइट्रोजन फसल की बढ़वार के लिए जरूरी पोषक तत्व है। ऐसे में सहफसल प्रणाली अपनाने से रासायनिक नाइट्रोजन उर्वरक की जरूरत कुछ हद तक कम हो सकती है और खेती की लागत घटाने में मदद मिल सकती है।

मौसम की मार से भी मिल सकती है राहत
सिर्फ एक फसल पर निर्भर रहने की स्थिति में मौसम खराब होने पर किसान को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, सहफसल में एक ही खेत से अलग-अलग फसलें मिलने के कारण आमदनी के स्रोत में विविधता आती है। अगर किसी एक फसल पर मौसम का असर पड़ता है तो दूसरी फसल से कुछ आय मिलने की संभावना बनी रहती है।

दलहन-तिलहन के बीज पर मिल रही मदद
दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार की ओर से किसानों को सहायता दी जा रही है। इसके तहत किसानों को फसल किट और बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। वहीं, बड़े क्षेत्र में बुवाई करने वाले किसानों को 50 फीसदी सब्सिडी के तहत बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी बताई गई है। जो किसान इस योजना का लाभ लेना चाहते हैं, वे अपने ब्लॉक स्तर के कृषि कार्यालय से संपर्क कर बीज और उपलब्ध सहायता की जानकारी ले सकते हैं।

किसान ध्यान रखें
सहफसल की खेती में सिर्फ बीज मिलाकर बोना पर्याप्त नहीं है। लाइन अनुपात, बुवाई का समय, बीज की मात्रा, दूरी और खेत की स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है। इसलिए किसान अपने क्षेत्र के कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ से स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सलाह लेकर ही सहफसल मॉडल अपनाएं।
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