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Home› Kheti Kisani› Pusa Double Zero Mustard 36 A Better Quality Mustard Variety For Farmers With Better Oil And Better Meal

खेतों में चमकेगा सरसों का नया सितारा : पूसा डबल जीरो मस्टर्ड-36, तेल में कम तीखापन, खली में होगा ज्यादा दम

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 10 Oct 2026 07:41 PM IST
सार

भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (पूसा) की नई सरसों किस्म 'पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 36' के तेल में इरूसिक एसिड मात्र 0.45 प्रतिशत और खली में ग्लूकोसिनोलेट्स 19.50 पीपीएम हैं। बेहतर गुणवत्ता का तेल, पशुओं के लिए सुरक्षित खली और बाजार में ऊंचे भाव की उम्मीद, यही इसे किसानों के लिए खास बनाती है।

सरसों की 'पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 36' किस्म तेल और खली, दोनों की गुणवत्ता सुधारने के लिए विकसित की गई है।
सरसों की 'पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 36' किस्म तेल और खली, दोनों की गुणवत्ता सुधारने के लिए विकसित की गई है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान की 'पूसा डबल जीरो मस्टर्ड-36' के तेल में इरूसिक एसिड मात्र 0.45 प्रतिशत और खली में ग्लूकोसिनोलेट्स 19.50 पीपीएम है। संस्थान के अनुसार, इसकी औसत उपज 2,019 किलो प्रति हेक्टेयर है, यह 129-133 दिन में पकती है और इसके बीज में 41.82 प्रतिशत तेल है। बेहतर तेल, पशुओं के लिए सुरक्षित खली और बाजार में बेहतर भाव की उम्मीद इसे किसानों के लिए खास बनाती है।

क्या है पूसा डबल जीरो मस्टर्ड 36
सरसों की यह किस्म तेल और खली, दोनों की गुणवत्ता सुधारने के लिए विकसित की गई है। 'डबल जीरो' का मतलब है कि इसमें दो अवांछित तत्व बेहद कम हैं: तेल में इरूसिक एसिड और खली में ग्लूकोसिनोलेट्स। इस किस्म के तेल में इरूसिक एसिड 0.45 प्रतिशत और खली में ग्लूकोसिनोलेट्स 19.50 पीपीएम है।

लोकप्रिय किस्मों से कितना अंतर
प्रचलित किस्मों के तेल में इरूसिक एसिड आमतौर पर 40 प्रतिशत से ज्यादा और खली में ग्लूकोसिनोलेट्स 120 पीपीएम से ज्यादा होते हैं। संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार इरूसिक एसिड 2 प्रतिशत से कम होना अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार सुरक्षित स्तर माना जाता है। उनके मुताबिक 100 पीपीएम से ऊपर ग्लूकोसिनोलेट्स पशुओं में थायरॉइड और चयापचय को प्रभावित कर सकते हैं। 

किसान को क्या फायदा
  • बेहतर गुणवत्ता का तेल: कम इरूसिक एसिड से खाने के तेल की गुणवत्ता अच्छी रहती है।
  • सुरक्षित खली: कम ग्लूकोसिनोलेट्स वाली खली पशु-आहार के लिए अधिक सुरक्षित और बेहतर गुणवत्ता की मानी जाती है। पशुपालक किसानों के लिए यह अतिरिक्त लाभ है।
  • ऊंचा मूल्य: बाजार में बेहतर स्वीकार्यता और किसानों को अच्छे दाम मिलने की संभावना।
  • खाद्य और पोषण सुरक्षा: गुणवत्तापूर्ण तेल और पशु-आहार से खाद्य तेल क्षेत्र मजबूत होता है।
 

किसान के लिए जरूरी जानकारी

बिंदु विवरण
औसत उपज 2,019 किलो प्रति हेक्टेयर (करीब 20.2 क्विंटल)
पकने की अवधि मध्यम अवधि, 129 से 133 दिन
बीज भूरा-पीलापन लिए हुए
तेल की मात्रा 41.82 प्रतिशत
बुवाई की स्थिति समय पर बुवाई, सिंचित दशा
अनुशंसित क्षेत्र पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर के मैदान और हिमाचल प्रदेश

बीज लेने से पहले क्या करें
बीज केवल IARI (पूसा), कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों या लाइसेंसशुदा विक्रेताओं से लें। IARI का कृषि प्रौद्योगिकी सूचना केंद्र (एटीक) किसानों को बीज बेचता है, पर उपलब्धता की पुष्टि पहले कर लें। संस्थान की प्रौद्योगिकी इकाई (ZTM & BPD) से 011-25843542 / 25843553 पर (सोमवार से शुक्रवार, सुबह 9 से शाम 5:30) संपर्क किया जा सकता है।

बुवाई का सही समय, बीज दर और खाद की मात्रा अपने नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से पता कर सकते हैं। खरीद से पहले जांच लें कि आपके इलाके की मंडी या तेल मिल इस किस्म की उपज को अलग भाव देती है या नहीं।
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