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Excess Rain In Bundelkhand Threatens India S Kharif Urad Crop Acreage Shrinks Amid Import Surge
Urad Crop: बुंदेलखंड में भारी बारिश से उड़द की फसल पर संकट, बुवाई घटी, कीमतों पर कितना पड़ा असर?
गांव जंक्शन डेस्क, नोएडा
Published by: Himanshu Mishra
Updated Tue, 29 Jul 2025 03:20 PM IST
सार
बुवाई में गिरावट के बावजूद उड़द की कीमतों में बड़ा उछाल नहीं आया है, क्योंकि सरकार ने उड़द के आयात को शून्य शुल्क पर अनुमति दी हुई है। 2024-25 में उड़द का आयात 8.2 लाख टन तक पहुंच गया, जो 2023-24 में 6.24 लाख टन था।
देश की प्रमुख खरीफ दलहन फसल उड़द (काली मटकी) की स्थिति इस साल गंभीर होती नजर आ रही है। बुंदेलखंड, राजस्थान और गुजरात जैसे प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा से फसल पर प्रतिकूल असर पड़ा है। वहीं उड़द का कुल बुवाई क्षेत्र भी पिछले साल की तुलना में घटा है।
बुवाई में गिरावट
25 जुलाई 2025 तक देशभर में उड़द की बुवाई केवल 16.59 लाख हेक्टेयर में हुई है, जबकि पिछले वर्ष यह आंकड़ा 17.79 लाख हेक्टेयर था। यह 6.75% की गिरावट है। जबकि सामान्य खरीफ सीजन में इसका औसत क्षेत्रफल 32.64 लाख हेक्टेयर होता है। उड़द की बुवाई 2018-19 में चरम पर थी (47.26 लाख हेक्टेयर), लेकिन तब से लगातार गिर रही है। 2024-25 में यह 21.01 लाख हेक्टेयर तक सिमट गई थी।
बुंदेलखंड में सबसे अधिक असर
बुंदेलखंड, जो मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के हिस्सों में फैला है, उड़द का लगभग एक-तिहाई उत्पादन (5–6 लाख टन) करता है। लेकिन इस क्षेत्र में हाल के सप्ताहों में लगातार भारी वर्षा हुई है, जिससे फसल पर संकट गहराया है। इंडिया पल्सेज एंड ग्रेन्स एसोसिएशन के महासचिव सतीश उपाध्याय ने बताया कि बुंदेलखंड और राजस्थान के हिस्सों में बारिश ने उड़द की फसल को प्रभावित किया है। वहीं, iGrain इंडिया के राहुल चौहान ने कहा कि और बारिश हुई तो उत्पादन में और गिरावट आ सकती है।
किसान कर रहे फसल परिवर्तन
पिछले 3–4 वर्षों में लगातार मौसम की मार से उड़द की गुणवत्ता और उत्पादकता दोनों प्रभावित हुई हैं। इसका असर किसानों की आमदनी पर पड़ा है, जिससे कई किसानों ने उड़द छोड़कर मक्का जैसी फसलों की ओर रुख किया है। Four-P International (चेन्नई) के प्रबंध निदेशक बी. कृष्णमूर्ति ने कहा कि अधिक वर्षा और मौसम की अनिश्चितता ने उड़द की खेती को जोखिमभरा बना दिया है।
आयात बढ़ा, कीमतों पर असर नहीं
बुवाई में गिरावट के बावजूद उड़द की कीमतों में बड़ा उछाल नहीं आया है, क्योंकि सरकार ने उड़द के आयात को शून्य शुल्क पर अनुमति दी हुई है। 2024-25 में उड़द का आयात 8.2 लाख टन तक पहुंच गया, जो 2023-24 में 6.24 लाख टन था। अप्रैल-जून 2025 में 1.96 लाख टन उड़द का आयात हुआ, जो पिछले साल की समान अवधि से लगभग बराबर है।
चेन्नई में आयातित उड़द की कीमत फिलहाल 7,100–7,500 रुपये प्रति क्विंटल पर है, जो अक्टूबर 2024 में 9,400 रुपये तक पहुंच गई थी। सरकार ने 2025-26 के लिए उड़द का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 7,800 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है, जो पिछले साल 7,400 रुपये था।
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