Home›Kheti Kisani›
Crop That Earns More With Less Water June Is The Most Suitable Month For Guar Cultivation Just Keep These Th
कम निवेश में ज्यादा कमाई वाली फसल : ग्वार की खेती के लिए जून का महीना सबसे मुफीद, बस इन बातों का रखें ध्यान
गांव जंक्शन डेस्क, हिसार
Published by: Devesh Saraswat
Updated Mon, 16 Jun 2025 03:32 PM IST
सार
सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर रहने वाले क्षेत्रों में ग्वार की खेती किसानों को कम निवेश में अधिक आमदनी देती है। आमदनी के अलावा यह फसल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में सुधार लाने का काम करती है। इस फसल की बुवाई के लिए जून का महीना काफी उपयुक्त माना जाता है।
कम पानी में ज्यादा कमाई वाली फसल
- फोटो : सोशल मीडिया
सिंचाई के लिए बारिश पर निर्भर रहने वाले क्षेत्रों में ग्वार बारानी की खेती किसानों को कम निवेश में अधिक आमदनी देती है। आमदनी के अलावा यह फसल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में सुधार लाने का काम करती है। इस फसल की बुवाई के लिए जून का महीना काफी उपयुक्त माना जाता है।
ग्वार बारानी से अच्छा उत्पादन लेने का तरीका
हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कृषि वैज्ञानिक और ग्वार विशेषज्ञ डॉ. बीडी यादव के अनुसार, अब ग्वार की बुवाई का समय शुरू हो गया है। ऐसे किसान जिनके पास नहर का पानी उपलब्ध है, वह अपने खेतों में जून में पानी लगाकर या मानसून की बारिश में बुवाई कर अच्छा उत्पादन ले सकते हैं। ग्वार की बुवाई से पहले बीजों को बेहतर तरीके से उपचारित कर लेना चाहिए।
इन किस्मों का करें उपयोग
ग्वार की बुवाई के लिए किसान एचजी 365 और एचजी 2-20 जैसी उन्नत किस्मों का चुनाव कर सकते हैं।
जड़ गलन रोग से बचने का किफायती तरीका
जड़ गलन रोग को ग्वार फसल की मुख्य बीमारी के रूप में जाना जाता है। इस रोग का फसल में संक्रमण होने पर उत्पादन 20 से 45 प्रतिशत तक प्रभावित हो सकता है। इस रोग के जीवाणु जमीन में पनपते हैं। इसकी रोकथाम के लिए किसान 3 ग्राम कार्बान्डाजिम 50 प्रतिशत (बेविस्टीन) प्रति किलो बीज की दर से सूखा उपचारित करने के बाद ही बुवाई करें। ऐसा करने से 80 से 95 प्रतिशत तक इस रोग पर काबू पाया जा सकता है। जड़ गलन रोग का इलाज मात्र 15 रुपये के बीज उपचार से संभव है। इस बीमारी का बीज उपचार ही एक मात्र समाधान है।
खाद के इस्तेमाल का उन्नत तरीका
बुवाई के दौरान 100 किलो सुपर फास्फेट और 15 किलो यूरिया या 35 किलो डीएपी प्रति एकड़ के हिसाब से ड्रिल करें। एचजी 2-20 किस्म का इस्तेमाल कर रहे किसानों को प्रति एकड़ तीन किलो बीज की जरूरत होगी। लाइन से लाइन की दूरी 2 फुट और एचजी 365 ग्वार की किस्म के लिए 4 किलो बीज प्रति एकड़ की दर से इस्तेमाल करें, जिसकी बुवाई 1.5 फुट पर करें।
इस बात का रखें खास ख्याल
डॉ. यादव ने किसानों को ग्वार की खड़ी फसल में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार की रोकथाम के लिए किसी भी अनावश्यक खरपतवार नाशक दवा का इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी है। उनका कहना है खरपतवार नाशक दवा का खराब प्रभाव आगामी सरसों की फसल के जमाव, बढ़वार और पैदावार पर पड़ता है। टयूबवेल का खारा और सोडिक पानी का इस्तेमाल बुवाई के दौरान और खड़ी फसल में न करें। इससे पौधे का विकास रुक जाता है और पैदावार कम होती है।
हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर और व्यक्तिगत अनुभव प्रदान कर सकें और लक्षित विज्ञापन पेश कर सकें। अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।