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Blockchain in Agriculture: क्यूआर कोड में कृषि उत्पाद की पूरी कुंडली, किसानों को मिलते हैं 50% तक अधिक दाम

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Umashankar Mishra Updated Sat, 17 May 2025 12:39 PM IST
सार

Blockchain in Agriculture : ब्लॉकचेन तकनीक अब कृषि क्षेत्र में क्रांति ला रही है। ब्लॉकचेन एक डिजिटल बहीखाता है, जहां बीज से बाजार तक कृषि उपज के सफर, उसे पैदा करने वाले किसान, खेती और हैंडलिंग के तौर-तरीकों की जानकारी हर स्तर पर दर्ज होती रहती है। उत्पाद के पैकेट पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करते ही यह पूरी कुंडली खुल जाती है और उसका इतिहास पता चल जाता है। इससे उत्पाद के प्रति ग्राहकों का विश्वास बढ़ता है और वो अधिक कीमत देने को तैयार हो जाते हैं। 

ब्लॉकचेन तकनीक कृषि उत्पादों की गुणवत्ता के प्रति ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने में सहायक है।
ब्लॉकचेन तकनीक कृषि उत्पादों की गुणवत्ता के प्रति ग्राहकों का भरोसा बढ़ाने में सहायक है। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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तमिलनाडु के नीलगिरी क्षेत्र में 1800 मीटर से अधिक ऊंचाई पर पैदा होने वाली ऊटी गाजर अपनी कुरकुरी बनावट, स्वाद और नारंगी रंग के लिए जानी जाती है। ऊटी गाजर पैदा करने वाली टोडा जनजाति एवं अन्य स्थानीय समुदायों के 7500 से अधिक किसानों को यूनिक उत्पादक कोड दिए गए हैं, उनके खेतों की जिओ-टैगिंग की गई है और बीज से बाजार तक मिट्टी, कीटनाशकों व खाद के उपयोग समेत उत्पाद के हर बैच की जानकारी ऑनलाइन ब्लॉकचेन प्लेटफॉर्म पर दर्ज की जाती है। यह जानकारी क्यूआर कोड के रूप में उत्पाद के पैकेट पर चस्पा कर दी जाती है। यह कोड स्कैन करते ही उत्पाद की पूरी कुंडली खुल जाती है। इससे ग्राहकों को उत्पाद की उत्पत्ति और गुणवत्ता का पूरा रिकॉर्ड मिल जाता है, जिससे वे अधिक दाम देने को तैयार हो जाते हैं।
 
  • ब्लॉकचेन तकनीक से कृषि उत्पादों की ट्रैकिंग और ट्रेसिंग कर सकते हैं।
  • क्यूआर कोड स्कैन करते ही ग्राहकों को उत्पादों के स्रोत की जानकारी मिल जाती है।
  • नकली बीजों एवं उर्वरकों पर लगाम लगाने में भी ब्लॉकचेन सहायक है।

डाटा-केंद्रित कृषि ट्रेसेबिलिटी मॉडल
फसल के हर बैच की बुवाई, मिट्टी, उर्वरक और कटाई की जानकारी दर्ज की जाती है। किसान, व्यापारी, प्रोसेसर, ट्रांसपोर्टर सभी साझा सिस्टम में जुड़े होते हैं। हर चरण में, ट्रेसेबिलिटी लॉग जुड़ते रहते हैं। चुनिंदा बैचों की लैब टेस्टिंग से पोषक तत्वों की प्रोफाइलिंग की जाती है, जिससे उत्पाद की प्रीमियम पहचान बनती है। अंतिम उत्पाद पर लगा क्यूआर कोड स्कैन करते ही यह जानकारी मिल जाती है। 

किसानों को 30-50% अधिक मूल्य
नीलगिरी की एग्रीटेक कंपनी लीफ के कॉरपोरेट डेवेलपमेंट निदेशक रघुवीर बद्रीनाथ बताते हैं, डिजिटल खरीद लॉग और मूल्य निर्धारण एल्गोरिदम के साथ, किसानों को मंडियों से 30-50% अधिक मूल्य मिलता है। पारदर्शी आपूर्ति शृंखला से किसान की आमदनी बढ़ती है और बिचौलियों की भूमिका कम हो जाती है। डाटा के उपयोग से बाजार की मांग को समझने में मदद मिलती है और नुकसान कम होता है। 

पोल्ट्री इंडस्ट्री में भी उपयोगी है तकनीक
बिहार पशु विज्ञान विवि, पटना के शोधकर्ताओं ने ‘आहार सेतु’ नामक एप बनाया है। इस एप की मदद से चिकन की दुकान पर मौजूद मुर्गियों की पूरी कुंडली मिल जाती है। मुर्गियों के खानपान, रखरखाव, रोगों और मुर्गियां किस पोल्ट्री फार्म की हैं, इसकी जानकारी मिल जाती है। एप में जिअो-लोकेशन टैगिंग की सुविधा भी है। मुर्गी के गले में लगे बारकोड को स्कैन करते ही पूरी जानकारी मिल जाएगी।

कृषि क्षेत्र में ब्लॉकचेन
उपभोक्ताओं और किसानों के बीच भरोसेमंद संबंध स्थापित करने में ब्लॉकचेन तकनीक मदद करती है। यह खाद्य पदार्थों के उत्पादन और प्रसंस्करण के बारे में सच्ची एवं विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध कराती है, जिससे सुरक्षा, गुणवत्ता और पर्यावरण से जुड़ी चिंताओं का समाधान होता है। उपभोक्ताओं के बढ़ते भरोसे के साथ किसानों की आय भी आनुपातिक रूप से बढ़ती रहती है।
-डॉ. पी.के. साहू, अध्यक्ष, कृषि इंजीनियरिंग विभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, नई दिल्ली  
 
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