विज्ञापन
Home› Khabar Junction› Yamuna S Poison Reaches Fields Spinach Contains 97 Times More Nickel Onions Also Contain Heavy Metals

यमुना का जहर पहुंचा खेतों तक! : पालक में 97 गुना ज्यादा निकेल, प्याज में भी भारी धातुओं की मौजूदगी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Mohammad Aamil Updated Wed, 30 Sep 2026 09:30 AM IST
सार

  • DU की स्टडी में यमुना किनारे उगाई जाने वाली कुछ सब्जियों में भारी धातुएं मिलीं।
  • पालक में निकेल की मात्रा निर्धारित सीमा से करीब 97 गुना ज्यादा दर्ज हुई।
  • प्याज में निकेल का स्तर तय सीमा से करीब 65 गुना तक अधिक पाया गया।
  • सरसों में क्रोमियम करीब 22 गुना और सफेद मूली में करीब 11 गुना अधिक मिला।

सब्जियों की खेती
सब्जियों की खेती - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

दिल्ली में यमुना नदी के प्रदूषण का असर अब नदी किनारे होने वाली खेती पर भी दिखाई देने की जानकारी सामने आई है। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) के वनस्पति विज्ञान विभाग की एक स्टडी में यमुना किनारे उगाई जाने वाली कुछ सब्जियों और वहां की मिट्टी में भारी धातुओं की मौजूदगी मिली है। अध्ययन में पालक में निकेल की मात्रा निर्धारित सीमा से 97 गुना और प्याज में 65 गुना तक अधिक दर्ज की गई।

हालांकि, शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन यमुना के एक सीमित हिस्से में किया गया है। इसलिए इसके नतीजों को दिल्ली की सभी सब्जियों या पूरे यमुना क्षेत्र की खेती पर लागू नहीं किया जा सकता। शोध में प्रभावित इलाकों में नियमित जांच और निगरानी की जरूरत पर जोर दिया गया है।

पालक और प्याज में निकेल की मात्रा ज्यादा
DU के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर दीनबंधु साहू के अनुसार, अध्ययन के दौरान यमुना किनारे के कृषि क्षेत्रों की मिट्टी और वहां उगाई जाने वाली विभिन्न सब्जियों के नमूने लिए गए। जांच में पालक में निकेल की मात्रा निर्धारित सीमा से करीब 97 गुना अधिक पाई गई। वहीं, प्याज में निकेल का स्तर तय सीमा से करीब 65 गुना तक ज्यादा दर्ज किया गया।

मूली और सरसों में भी भारी धातुएं
अध्ययन में कई अन्य सब्जियों में भी भारी धातुओं की मौजूदगी सामने आई। सफेद मूली में क्रोमियम की मात्रा करीब 11 गुना, पालक में क्रोमियम करीब 12 गुना और सरसों में क्रोमियम करीब 22 गुना तक अधिक पाया गया। वहीं, लाल मूली में मोलिब्डेनम और क्रोमियम की भी काफी मात्रा दर्ज की गई।

धनिया, मेथी में भी धातुओं की मौजूदगी
शोधकर्ताओं ने धनिया, मेथी और सरसों जैसी फसलों की भी जांच की। इसमें धनिया में निकेल और कैडमियम, मेथी में जिंक और सरसों में सीसे की मौजूदगी मिली। इन नतीजों से यमुना किनारे खेती में इस्तेमाल होने वाले सिंचाई के पानी और मिट्टी की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठता है। खासतौर पर यह देखना जरूरी है कि प्रदूषित पानी के इस्तेमाल से भारी धातुएं मिट्टी और फसलों तक किस स्तर तक पहुंच रही हैं।

प्रदूषित पानी से खेतों तक पहुंच सकती हैं भारी धातुएं
अध्ययन के मुताबिक, यमुना के आसपास खेती में प्रदूषित नदी के पानी और बिना उपचारित अपशिष्ट जल के इस्तेमाल को भारी धातुओं की मौजूदगी की संभावित प्रमुख वजहों में माना गया है। प्रदूषित पानी में मौजूद धातुएं मिट्टी में जमा हो सकती हैं। इसके बाद पौधों की जड़ें इन्हें सोख सकती हैं और ये धातुएं पौधे के खाने योग्य हिस्सों तक पहुंच सकती हैं। इसी वजह से यमुना किनारे की खेती में इस्तेमाल होने वाले पानी और मिट्टी की गुणवत्ता की निगरानी जरूरी मानी जा रही है।

मिट्टी, पानी और सब्जियों की नियमित जांच की जरूरत
शोधकर्ताओं ने प्रभावित कृषि क्षेत्रों में मिट्टी, सिंचाई के पानी और सब्जियों की नियमित जांच कराने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि खेती में इस्तेमाल होने वाले पानी की गुणवत्ता की निगरानी बढ़ाने के साथ फसलों में भारी धातुओं की मौजूदगी की भी समय-समय पर जांच होनी चाहिए। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन इलाकों में प्रदूषण का स्तर अधिक है और वहां खेती को लेकर क्या सावधानी जरूरी है।

सब्जियों की टैगिंग का सुझाव
प्रोफेसर दीनबंधु साहू ने उपभोक्ताओं को जानकारी देने के लिए सब्जियों की टैगिंग का सुझाव दिया है। उनके मुताबिक, सब्जी खरीदते समय ऐसा टैग होना चाहिए, जिससे उपभोक्ता यह जान सकें कि सब्जी कहां उगाई गई है और सिंचाई के लिए किस तरह के पानी का इस्तेमाल हुआ है। इस तरह की जानकारी से उपभोक्ताओं को सब्जियों के स्रोत के बारे में अधिक जानकारी मिल सकती है।

सीमित क्षेत्र में हुआ अध्ययन, पूरे दिल्ली पर लागू नहीं

शोधकर्ताओं ने यह भी साफ किया है कि अध्ययन यमुना के सीमित हिस्से में किया गया है। इसलिए इसके निष्कर्षों को दिल्ली की हर सब्जी या पूरे यमुना किनारे की खेती पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।

फिलहाल अध्ययन ने यमुना किनारे खेती में प्रदूषित पानी के इस्तेमाल और फसलों में भारी धातुओं की मौजूदगी के बीच संभावित संबंध की ओर संकेत किया है। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस संबंध को बेहतर ढंग से समझने के लिए बड़े क्षेत्र में नमूनों की जांच और नियमित निगरानी की जरूरत है।

खाद्य सुरक्षा के लिए निगरानी जरूरी
यमुना का प्रदूषण अगर खेती में इस्तेमाल होने वाले पानी और मिट्टी तक पहुंचता है, तो फसलों में भारी धातुओं की मौजूदगी खाद्य सुरक्षा का अहम मुद्दा बन सकती है। इसलिए प्रभावित इलाकों में सिंचाई के पानी, मिट्टी और सब्जियों की नियमित जांच के साथ प्रदूषित पानी के इस्तेमाल पर प्रभावी निगरानी जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन