वैश्विक बाजार में कपास के दाम कमजोर होने और घरेलू बाजार में नई फसल की आवक बढ़ने से कपास की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। मांग सुस्त रहने के कारण मिलों की खरीद भी धीमी है। वहीं, इस साल कम बारिश के कारण कपास उत्पादन प्रभावित होने की आशंका है, जिससे आगे कीमतों को कुछ सहारा मिल सकता है।
न्यूयॉर्क के इंटरकॉन्टिनेंटल एक्सचेंज (ICE) पर दिसंबर डिलीवरी वाले कपास वायदा भाव पिछले कुछ हफ्तों में कमजोर हुए हैं। यह फिलहाल करीब 80.13 सेंट प्रति पाउंड पर है, जबकि अगस्त के अंत में यह करीब 93 सेंट प्रति पाउंड के स्तर तक पहुंच गया था।
घरेलू कपास के भाव ₹65,000 के आसपास
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक बाजार में गिरावट का असर घरेलू बाजार पर भी दिख रहा है। कारोबारियों के अनुसार, कपास के दाम हाल के करीब ₹70,000 प्रति कैंडी (356 किलो) के ऊंचे स्तर से घटकर ₹64,500-65,500 प्रति कैंडी रह गए हैं।
कॉटन कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (CCI) की 2025-26 फसल की नीलामी कीमतों में भी पिछले दो दिनों में करीब ₹1,200 प्रति कैंडी की गिरावट आई है। कपास बीज के भाव में नरमी का असर भी कच्ची कपास की कीमतों पर पड़ रहा है।
मिलों के पास 1-1.5 महीने का स्टॉक
रायचूर के सोर्सिंग एजेंट रामानुज दास बूूब के मुताबिक, कपास बीज के भाव करीब ₹300-400 प्रति क्विंटल घटकर ₹4,600-4,700 रह गए हैं। उन्होंने कहा कि खरीदारों की सक्रियता कम है। मिलों के पास पहले से करीब एक से डेढ़ महीने का स्टॉक होने के कारण गांठों की मांग ज्यादा नहीं है। उनके अनुसार, बहुराष्ट्रीय कंपनियां और रीसेलर भी करीब ₹64,500-65,500 प्रति कैंडी के भाव पर कपास बेच रहे हैं।
रोजाना 50-55 हजार गांठ की आवक
नई कपास की रोजाना आवक फिलहाल करीब 50,000-55,000 गांठ है। एक गांठ का वजन करीब 170 किलो माना जाता है। अक्टूबर में नई फसल की आवक और तेज होने की उम्मीद है। CotYarn Trade Link के आनंद पोपट के मुताबिक, नई फसल की आवक बढ़ने से निकट अवधि में घरेलू कपास की कीमतों पर दबाव रह सकता है। हालांकि, कताई मिलों के बाहर पुरानी फसल का सीमित स्टॉक कीमतों को कुछ सहारा दे सकता है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में कपास की कीमतों की दिशा मुख्य रूप से नई फसल की आवक, मिलों की खरीद और शुल्क-मुक्त आयात से जुड़ी सरकारी नीति पर निर्भर करेगी।
कम बारिश से कपास उत्पादन घटने की आशंका
Radhalakshmi Group के सीएमडी अतुल एस. गनात्रा के अनुसार, 2026-27 में कपास का उत्पादन पिछले साल की तुलना में करीब 10 फीसदी कम रह सकता है। यह अनुमान देश के 10 प्रमुख कपास उत्पादक राज्यों में खड़ी फसल के सर्वे और 50 सदस्यों से बातचीत के आधार पर लगाया गया है।
उनके मुताबिक, जून से सितंबर के दौरान देश के कई हिस्सों में कम बारिश हुई। इसके कारण किसानों के पास आगे की चुनाई के लिए पानी की उपलब्धता कम हो सकती है, जिसका असर कपास की कुल पैदावार पर पड़ने की आशंका है।
इस तरह, अक्टूबर में नई फसल की बढ़ती आवक और कमजोर मांग से कीमतों पर दबाव रह सकता है, जबकि कम उत्पादन की आशंका और पुरानी फसल का सीमित स्टॉक आगे चलकर गिरावट को सीमित कर सकते हैं।