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Bihar: 60 दिनों में ₹3 लाख की कमाई, 500 एकड़ में किसानों ने लगाई फूलगोभी, खेतों से ही सौदा, जानें भाव...

गांव जंक्शन डेस्क, पटना Published by: Devesh Saraswat Updated Mon, 19 Oct 2026 02:13 PM IST
सार

  • बिहार के खगड़िया जिले का बसा दियारा क्षेत्र सब्जी उत्पादन का केंद्र बन गया है
  • इस साल फूलगोभी की खेती ने किसानों को अच्छा फायदा दिया है
  • मात्र 60 दिन में तैयार होने वाली इस फसल की प्रति एकड़ लागत 55-60 हजार रुपये है
  • मौसम और बाजार का साथ मिलने से किसानों को खेत से ही 50 रुपये प्रति किलो का थोक भाव मिल जाता है।

बसा दियारा क्षेत्र के किसानों को फूलगोभी की खेती आई रास।
बसा दियारा क्षेत्र के किसानों को फूलगोभी की खेती आई रास। - फोटो : AI Image
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विस्तार
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बिहार के खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड में गंगा नदी के मुहाने पर बसा दियारा क्षेत्र अब एक बड़ा सब्जी हब बन गया है। इस साल कुल्हड़िया, भोरकाठ, कोलवारा और बैसा गांव में लगभग 500 एकड़ जमीन पर फूलगोभी की खेती की गई है। मात्र 60 दिनों में तैयार होने वाली इस फसल से किसान प्रति एकड़ 3 लाख रुपये तक का बंपर मुनाफा कमा रहे हैं।

क्या है लागत और कमाई का गणित?
किसानों के अनुसार, सावन के महीने में गोभी के पौधे खेतों में रोपे जाते हैं और ठीक 60 दिन बाद कटाई शुरू हो जाती है। भोरकाठ के सूरज शर्मा और कोलवारा के जवाहर शर्मा ने बताया कि एक एकड़ खेत में गोभी लगाने का खर्च 55 से 60 हजार रुपये आता है। मौसम और बाजार का साथ मिलने पर इससे 3 लाख रुपये तक की शानदार आमदनी हो जाती है। त्योहारी सीजन के कारण वर्तमान में किसानों को खेतों से ही 50 रुपये प्रति किलो का थोक भाव मिल रहा है।

पड़ोसी जिलों के व्यापारियों की पहली पसंद
गंगा किनारे की उपजाऊ मिट्टी में पैदा होने वाली यह गोभी अपने स्वाद के लिए मशहूर है। मधेपुरा के व्यापारी मुकेश मंडल जैसे कई कारोबारी रोज सुबह 3 बजे उठकर 5 बजे तक यहां पहुंचते हैं। वे किसानों से 50 रुपये किलो में गोभी खरीदकर अपने स्थानीय बाजार में 65 से 70 रुपये प्रति किलो के भाव में बेचते हैं। इस तरह दियारा की गोभी ने सहरसा और मधेपुरा के बाजारों पर कब्जा जमा लिया है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई दी है।


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