आगरा में मंडी शुल्क के नाम पर एक लाख रुपये की कथित अवैध वसूली का मामला सामने आया है। शिकायत के आधार पर मंडी समिति के तत्कालीन सचिव और सेवानिवृत्त निरीक्षक जांच के दायरे में आ गए हैं। शासन के संज्ञान लेने के बाद जिलाधिकारी मनीष बंसल ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। जांच में यह भी देखा जाएगा कि शिकायतकर्ता की फर्म वर्षों तक बिना लाइसेंस कैसे कारोबार करती रही और तत्कालीन अधिकारियों ने उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की।
शासन ने मांगी जांच रिपोर्ट
घटवासन निवासी कारोबारी राजीव अग्रवाल ने तत्कालीन मंडी सचिव शिव कुमार राघव और सेवानिवृत्त मंडी निरीक्षक हरीबाबू पर मंडी शुल्क के नाम पर एक लाख रुपये की अवैध वसूली का आरोप लगाया है। शुरुआती जांच में शासन के सामने एक लाख रुपये के कथित भ्रष्टाचार का मामला आया।
हालांकि, जांच में शिकायतकर्ता की फर्म के बिना वैध लाइसेंस के कई वर्षों तक कारोबार करने का मामला भी सामने आया। आरोप है कि इस दौरान मंडी समिति के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने फर्म के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।
शिकायतकर्ता और अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
मामले में अब केवल वसूली के आरोपों की ही नहीं, बल्कि शिकायतकर्ता की फर्म के लाइसेंस और अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होगी। शासन ने इस संबंध में जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी है, ताकि दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सके। जिलाधिकारी मनीष बंसल ने बताया कि आईजीआरएस पोर्टल पर की गई शिकायत के संबंध में शासन ने जांच रिपोर्ट मांगी है। मामले की जांच कराकर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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