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मसूर की फसल बर्बाद कर सकता है उकटा रोग : बुवाई से पहले ऐसे करें मिट्टी और बीज का उपचार, जानें टॉप किस्में...

गांव जंक्शन डेस्क, लखनऊ Published by: Devesh Saraswat Updated Fri, 06 Nov 2026 04:38 PM IST
सार

  • इस रबी मसूर की बंपर के लिए सही किस्में और खेत की तैयारी अहम है।
  • उकठा रोग मसूर की फसल को नुकसान पहुंचा सकता है, ऐसे में बीजों के साथ मिट्टी का भी उपचार करें।
  • मसूर की अच्छी पैदावार के लिए खाद और उर्वरक की सही मात्रा भी काफी अहम है।

इस रबी मसूर से बंपर उपज लेने का तरीका।
इस रबी मसूर से बंपर उपज लेने का तरीका। - फोटो : गांव जंक्शन
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विस्तार
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इस रबी मसूर की बंपर उपज लेने के लिए बुवाई से पहले कई चीजों का ध्यान रखना चाहिए। इनमें सही किस्म का चुनाव और खेत की तैयारी अहम है। इस फसल के लिए दोमट और भारी मिट्टी अच्छी बनाई जती है, क्योंकि इस तरह की मिट्टी में पानी रोकने की अच्छी क्षमता होती है। मिट्टी का पीएच मान 6.5 से 7 होना चाहिए। पीएम का पता लगाने के लिए किसान मिट्टी की जांच करा सकते हैं। इस तरह मिट्टी की जरूरत के हिसाब से खाद उपयोग किया जा सकता है। खेत तैयार करते समय दो से तीन बार हल्की जुताई कर पाटा लगाएं। इस तरह मिट्टी भुरभुरी और बारीक होगी और बीजों का बेहतर अंकुरण का रास्ता खुलेगा।

बीज की मात्रा और बुवाई का सही तरीका
खेत में पौधों की संख्या सही रखने के लिए बीज की सही मात्रा डालना जरूरी है। बड़े दाने वाली किस्मों के लिए 50-60 किलो बीज प्रति हेक्टेयर और छोटे दाने वाली प्रजाति के लिए 35-40 किलो बीज प्रति हेक्टेयर काफी है।

बुवाई के समय कतार से कतार की दूरी 30 सेमी, पौधे से पौधे की दूरी 10 सेमी. और बीज की गहराई 5-6 सेमी. रखें। बुवाई के समय में देरी होने पर कतारों की दूरी को घटाकर 20 से 25 सेमी करें। किसान जीरो टिलेज मशीन की मदद से सीधी बुवाई कर सकते हैं। 

उकटा रोग से नुकसान का खतरा, करें ये काम
 मसूर की फसल को खासतौर से उकटा रोग से खतरा होता है। इस रोग के प्रकोप से बचने के लिए किसान मिट्टी और बीज उपचार का सहारा ले सकते हैं। मिट्टी के उपचार के लिए पांच किलों ट्राइकोडर्मा विरडी या हारजीयानम को 250 किलो सड़ी गोबर की खाद या बायो गैस स्लरी में मिलाकर हल्का गीला करें। अब इसे एक हफ्ते तक अंधेरे में ढककर रखें और बुवाई से पहले खेत में फैलाएं। इसके अलावा प्रति किलो बीज के हिसाब से पांच ग्राम ट्राइकोडरमा हारजियनम, 5 ग्राम राईजोबियम और 5 ग्राम पी.एस.वी. कल्चर मिलाएं। इसे छाया में सुखाने के बाद ही बोएं।

बंपर उपज देने वाली टॉप किस्में
किसानों को अपने इलाके की जलवायु को ध्यान में रखकर किस्मों का चुनाव करना चाहिए।  आई.पी.एल.-220 किस्म बुवाई के 120-125 दिन बाद पककर तैयार होती है। इस किस्म की औसत उपज 15-20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर बताई जाती है।  किसान 15 नवंबर तक इसी बुवाई कर सकते हैं। वहीं, आई.पी.एल.-316 किस्म मात्र 105-110 दिन में तैयार हो जाती है। किसान इससे 12-15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज की उम्मीद कर सकते हैं। बुवाई का समय 15 नवंबर तक है।

एल.-4717 किस्म 105 से 110 दिन में 14 से 16 क्विंटल/हेक्टेयर की उपज दे सकती है। इसकी बुवाई का सही समय 15 नवंबर तक है। आई.पी.एल.-406 (अंगूरी) 120-125 दिन में पकती है और इसकी उपज 15-18 क्विंटल/हेक्टेयर है।

खाद का सही उपयोग
खेत में 100-125 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की दर से गोबर या कंपोस्ट की खाद जरूर डालें। इसके अलावा फसल के लिए 100 किलो डीएपी या 20-25 किलो नाइट्रोजन व 30-40 किलो स्फुर का प्रति हेक्टेयर उपयोग करना चाहिए।


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