कर्नाटक सरकार ने सूखे से फसल को हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार से करीब 22 हजार करोड़ रुपये की मदद मांगी है। राज्य में सूखे के कारण करीब 62 हजार करोड़ रुपये की फसल बर्बाद होने का अनुमान है। हालांकि, राष्ट्रीय आपदा राहत कोष (NDRF) के नियमों के तहत राज्य ने 22 हजार करोड़ रुपये की सहायता का आकलन किया है। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अब तक केंद्र को तीन ज्ञापन सौंप चुकी है। मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के नेतृत्व में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात का समय मांगा गया है। सरकार अपनी मांगों को सीधे केंद्र के सामने रखना चाहती है।
सभी दलों के प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली जाने की तैयारी
परमेश्वर ने कहा कि अगर केंद्र से मुलाकात का समय मिलता है तो राज्य सरकार सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ दिल्ली जाएगी। अगर समय नहीं मिलता है तो मुख्यमंत्री के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रियों से मिलकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सूखे से फसल को करीब 62 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, लेकिन राज्य सरकार केंद्र से पूरी राशि नहीं मांग सकती। इसलिए NDRF के दिशा-निर्देशों के आधार पर पात्र सहायता राशि का आकलन कर करीब 22 हजार करोड़ रुपये की मांग की गई है।
किसानों को दो किस्तों में मिलेंगे 5 हजार रुपये
उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने सूखा प्रभावित किसानों को राहत देने के लिए पहली किस्त के रूप में 1,250 करोड़ रुपये जारी किए हैं। इसके तहत प्रत्येक किसान के खाते में 2,500 रुपये सीधे भेजे जा रहे हैं। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि विपक्ष की ओर से राहत राशि कम होने की आलोचना के बाद सरकार ने किसानों को अतिरिक्त 2,500 रुपये देने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री ने इस पर सहमति दे दी है। अगले 7 से 15 दिनों में इसके लिए 1,250 करोड़ रुपये और जारी किए जाएंगे। इस तरह प्रत्येक पात्र किसान को कुल 5,000 रुपये की राहत मिलेगी। परमेश्वर के मुताबिक, यादगीर जिले में तीन लाख से अधिक किसानों के खातों में राहत राशि पहुंच चुकी है।
67 लाख एकड़ फसल को हुआ नुकसान
उन्होंने बताया कि सूखे के कारण राज्य में करीब 50 लाख किसानों की 67 लाख एकड़ जमीन पर लगी फसलों को नुकसान पहुंचा है। पेयजल की व्यवस्था और दूसरे जरूरी राहत कार्यों के लिए भी सरकार ने राशि जारी की है। हर विधानसभा क्षेत्र को पेयजल संबंधी कामों के लिए एक करोड़ रुपये दिए गए हैं। वहीं, जिलों को उनकी जरूरत के अनुसार 4 से 5 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
पेट्रोल-डीजल की कीमतों से बढ़ती है खेती की लागत
परिवहन किराये, दूध और दही की कीमतों में बढ़ोतरी पर पूछे गए सवाल के जवाब में परमेश्वर ने कहा कि सरकार को किसानों, गन्ना उत्पादकों और कर्मचारियों समेत समाज के सभी वर्गों के हितों का ध्यान रखना पड़ता है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की आमदनी पिछले साल के मुकाबले बेहतर है। वाणिज्यिक कर, आबकारी और स्टांप एवं पंजीकरण से अच्छा राजस्व मिल रहा है। सरकार अपनी आर्थिक स्थिति और उपलब्ध संसाधनों को देखते हुए फैसले ले रही है।
भाजपा के विरोध पर उन्होंने कहा कि विपक्ष को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में हुई बढ़ोतरी पर भी सवाल उठाने चाहिए। डीजल का इस्तेमाल ट्रैक्टर और खेती के कई दूसरे कामों में होता है। ऐसे में ईंधन महंगा होने से किसानों की खेती की लागत भी बढ़ती है।
23 लाख पेंशन आवेदनों की हो रही जांच
सामाजिक सुरक्षा पेंशन, खासकर वृद्धावस्था और दिव्यांग पेंशन बंद होने की शिकायतों पर परमेश्वर ने कहा कि सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए दो से तीन बैठकें की हैं। उन्होंने बताया कि पेंशन के लिए सालाना आय की सीमा 30 हजार रुपये से बढ़ाकर 1.20 लाख रुपये कर दी गई है। इससे अधिक लोगों को पेंशन योजना का लाभ मिल सकेगा।
हालांकि, जांच में सामने आया कि 60 साल से कम उम्र के लोगों ने भी वृद्धावस्था पेंशन के लिए आवेदन किया है। ऐसे करीब 23 लाख आवेदनों की जांच की जा रही है और अपात्र लोगों के आवेदन खारिज किए जा रहे हैं। परमेश्वर के अनुसार, जांच के कारण कुछ दिनों तक पेंशन भुगतान अस्थायी रूप से रुका था, लेकिन अब भुगतान फिर शुरू हो गया है। उन्होंने दावा किया कि अगले 7 से 15 दिनों में इस समस्या का समाधान कर लिया जाएगा।
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