आगामी महीनों में रसोई खर्च और बढ़ सकता है। पहले ही बाजार में चावल, चीनी, सरसों का तेल और प्याज जैसे प्रमुख उत्पाद का खुदरा दाम काफी अधिक है। बाजार में कम बारिश को देखते हुए खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट की संभावना ने जन्म लिया है, दूसरी तरफ वैश्विक बाजार में कई खाद्य उत्पादों ऊंचे स्तर पर है। इन दोनों कारकों ने मिलकर खाद्य महंगाई को रफ्तार देने में अहम भूमिका निभाई है।
सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सितंबर महीने में खाने-पीनी की महंगाई दर 7.74 प्रतिशत पर पहुंच गई। इस बढ़त के पीछे प्याज, अदरक, लहसुन, चिकन और खाद्य तेल की ऊंची कीमतों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
विदेशी चीनी और दालों के लिए दरवाजा खोलने का सुझाव
तेजी पकड़ती खाद्य महंगाई के बीच जानकारों का एक वर्ग सरकारी भंडार से बाजार में सप्लाई बढ़ाने समेत चीनी, दालों और तिलहन का विदेश से शुल्क मुक्त आयात को मंजूरी देने का सुझाव दे रहा है।
प्याज 100 प्रतिशत महंगी, खरीफ आवक पर नजर
उपभोक्ता मामलों के विभाग के आंकड़े बताते हैं कि शनिवार को प्याज का औसत खुदरा दाम 53.42 रुपये प्रति किलो रहा, जो पिछले साल के मुकाबले 100 प्रतिशत ज्यादा है। दिल्ली-एनसीआर में कीमतें 65 रुपये प्रति किलो को पार कर गई हैं। प्याज की इस महंगाई को काबू में लाने के लिए सरकार ने अपने बफर से कम दाम में प्याज की बिक्री शुरू कर दी है। हालांकि बड़े स्तर की राहत के लिए खरीफ प्याज का इंतजार है। नई आवक आने तक कीमतों में और बढ़ोतरी के आसार बने हुए हैं।
सरसों का तेल हुए 11 प्रतिशत महंगा
शनिवार को सरसों तेल की खुदरा कीमत पिछले साल के मुकाबले 11 प्रतिशत बढ़कर 208.18 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई।
सितंबर में चावल की महंगाई बढ़ी
शनिवार को चावल का दाम 48.38 रुपये प्रति किलो दर्ज गिया है, जो बीते साल के मुकाबले 12 प्रतिशत ज्यादा है। दक्षिण भारत में गैर-बासमती चावल का उत्पादन कम होने की आशंका ने कीमतों में बढ़ोतरी को जन्म दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर 5.89 प्रतिशत थी, जो सितंबर महीने में बढ़कर 8.25 प्रतिशत हो गई।
चावल का सरकार भंडार मजबूत, खुले बाजार में होगी बिक्री
चावल के मोर्चे पर भारत सरकारी भंडार के नजरिए से मजबूत दिखता है। वर्तमाम नें सरकारी भंडार में 37 मिलियन टन से अधिक चावल का स्टॉक है। अधिकारियों का कहना है कि चावल की महंगाई को थामने के लिए इसी स्टॉक को ओपन मार्केट सेल स्कीम के तहत खुले बाजार में बेचा जाएगा।
मजबूत स्टॉक के बावजूद चना दाल हुई महंगी, गेहूं 2 प्रतिशत चढ़ा
भारत के कुल दलहन उत्पादन में 5 प्रतिशत हिस्सा रने वाली चना दाल का खुदार कीमत रविवार को सालाना हिसाब ेस 8 प्रतिशत चढ़ गई। हालांकि इसका सरकार के पास पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, वहीं, पीली मटर का आयात भी हुआ है। इसके उलट गेहूं की कीमतों में सालाना आधार पर केवल 2 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है और कीमत 32.49 रुपये प्रति किलोग्राम है। 1 अक्टूबर की 20.5 मिलियन टन की जरूरत के मुकाबले भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पास 45.4 मिलियन टन गेहूं का स्टॉक है।
रबी फसलों की बुवाई सुस्त
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, रबी फसलों (गेहूं, दलहन, तिलहन और मोटे अनाज) की बुवाई की शुरुआत सुस्त रही है। 30 अक्टूबर 2026 तक 3.75 मिलियन हेक्टेयर में बुवाई हुई है, जो पिछले साल की तुलना में 46 प्रतिशत कम है।
पिछले साल सर्दियों की फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र 64.76 मिलियन हेक्टेयर था। मंत्रालय के अनुसार, महीने के मध्य तक बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है, क्योंकि तब तक पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में मुख्य रबी फसल गेहूं की बुवाई शुरू हो जाएगी।