इंडियन वेजिटेबल ऑयल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने अपने रिफाइनर सदस्यों (कंपनियों) से खाने के तेल की खुरदा कीमतों में कटौती करने का कहना है। एसोसिएशन की यह अपील ऐसे समय मे ंआई है, जब सरकार ने प्रमुख खाद्य तेलों पर लागू होने वाले आयात शुल्क में कटौती की है। संगठन ने कंपनियों से हर हफ्ते सरकार के साथ खाने के तेल की खुदरा कीमतों से जुड़ी जानकारी अनिवार्य तौर पर साझा करने का निर्देश दिया है।
शुल्क में कटौती से नेपाल के सस्ते खाने के तेल से प्रतिस्पर्धा करने में मिलेगी मदद
एसोसिएशन का कहना है कि आयात शुल्क में कटौती होने से आयातकों और रिफाइनरी कंपनियों को व्यापार में एक समान अवसर मिलेगा। बता दें कि नेपाल भारत को बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का निर्यात करता है, खास बात यह है कि इस निर्यात पर कोई शुल्क लागू नहीं है। खाद्य तेल उद्योग इसे नुकसान की तरह देखता है। ऐसे में आयात में कटौती होने से घरेलू रिफाइनरी कंपनियों को सस्ते नेपाली तेल से प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी। संगठन ने शु्ल्क में कटौती को केवल ग्राहकों को कम भाव का लाभ देने के साथ घरेलू खाद्य तेल व्यापार में पारदर्शिता, निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए भी बहुत अहम बताया है।
वैश्विक खाद्य तेल बाजार में तेजी, अब लोगों को राहत मिलेगी
आईवीपीए के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने सही समय पर शुल्क में कटौती करने के लिए सरकार का धन्यवाद किया है। उनका कहना है कि त्योहारों के समय खाद्य तेल की खफत में काफी बढ़ोतरी होती है। उन्होंने दुनिया भर में राजनीतिक अनिश्चितता, खराब मौसम, जैविक ईंधन में पाम ऑयल के इस्तेमाल जैसे कारणों का हवाला देते हुए खाने के तेल की सप्लाई में कमी की बात कही। देसाई ने माना कि वैश्विक बाजार में कीमतों पर दबाव है, जिस वजह से खाद्य तेल की महंगाई बढ़ी है और आम लोगों का बजट बिगड़ा है। ऐसे में सरकार का आयात शुल्क घटाने के फैसले से देसाई ने आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की बात कही।
हर हफ्ते सरकार को देनी होगी कीमतों की रिपोर्ट
सुधाकर देसाई ने बताया कि अगस्त 2026 में भारत की खुदरा महंगाई दर लगातार बढ़कर 4.8 प्रतिशत पर पहुंच गई थी, जिसमें कुछ खाद्य तेलों की कीमतों में बहुत तेजी से उछाल आया था। उन्होंने अपनी सदस्य कंपनियों को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि सरकार ने जो आयात शुल्क कम किया है, उसका सीधा फायदा खुदरा कीमतों में कटौती करके उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए। साथ ही, कंपनियों से हर हफ्ते सरकार को अपनी खुदरा मूल्य सूची सौंपने को भी कहा गया है, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे, कीमतों की आसानी से निगरानी हो सके और ग्राहकों को समय पर सरकारी फैसले का लाभ मिल सके।