इस त्योहारी सीजन में भारतीय उपभोक्ताओं को सूखे मेवे खरीदने के लिए अधिक पैसे चुकाने होंगे। पश्चिम एशिया में जारी संकट और अंतरराष्ट्रीय तनाव के चलते विदेशी व्यापार और माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे सूखे मेवों के बाजार में कीमतें बढ़ गई हैं और आपूर्ति में कमी देखी जा रही है।
वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में आई रुकावटों के कारण अधिकांश मुख्य सूखे मेवों की कीमतों में तेजी आई है, जिससे कई व्यापारियों को इस सीजन में बिक्री घटने की आशंका है। पिछले साल के मुकाबले इस साल कई किस्मों के खुदरा भाव 15 से 30 प्रतिशत तक बढ़ चुके हैं। इस तेजी के पीछे पश्चिम एशिया के रास्तों में माल ढुलाई की बाधाएं, कंटेनर के बढ़े हुए भाड़े और प्रमुख उत्पादक देशों में फसलों को पहुंचा नुकसान मुख्य कारण हैं।
बिक्री में गिरावट की आशंका
इंटरनेशनल नट्स एंड ड्राई फ्रूट्स काउंसिल के भारत में प्रतिनिधि (एंबेसडर) राजू भाटिया के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी कीमतों और कम पैदावार के कारण बाजार में सूखे मेवों की बिक्री 10 से 15 प्रतिशत तक गिर सकती है।
पिस्ता और बादाम सबसे अधिक प्रभावित
कीमतों में बढ़ोतरी का सबसे ज्यादा असर पिस्ता पर पड़ा है, जिसके दाम 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। इसके मुख्य कारण ईरान से आपूर्ति में रुकावट, कंटेनर भाड़े में भारी बढ़ोतरी और अमेरिका में फसल की पैदावार में लगभग 50 प्रतिशत की कमी आना है। वहीं, अमेरिका में कम उत्पादन की वजह से बादाम के दामों में भी 10 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इसके अलावा, मुद्रा के अवमूल्यन और ढुलाई लागत बढ़ने से कद्दू के बीज, पेकान और खजूर की कीमतों में भी 5 से 10 प्रतिशत की तेजी आई है। गौरतलब है कि पूरी दुनिया में होने वाली खजूर की खपत का करीब 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा अकेले भारत में इस्तेमाल होता है।
काजू की कीमतें स्थिर, विकल्पों पर जोर
इस बीच काजू की कीमतों में कोई खास बदलाव नहीं हुआ है और इसके भाव पिछले साल जैसे ही बने हुए हैं। 'नट किंग' ब्रांड के मालिक जे. राजमोहन पिल्लई के अनुसार, खुदरा बाजार में साबुत काजू फिलहाल 900 से 1,000 रुपये प्रति किलो और टुकड़ा काजू 800 से 900
रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है।
बादाम और पिस्ता के महंगा होने के कारण खुदरा विक्रेता और मिठाई बनाने वाले अब काजू का अधिक इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे त्योहारी सीजन में काजू और काजू कतली की मांग बढ़ने की उम्मीद है। पिल्लई के अनुसार, आयातक अब माल मंगाने के लिए नए देशों का रुख कर रहे हैं, जिसमें चिली के अखरोट और ऑस्ट्रेलिया के बादाम शामिल हैं। इसके साथ ही, कद्दू और सूरजमुखी के बीजों के अलावा मखाना को भी स्थिर कीमत वाले विकल्पों के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है।