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Wheat Market: FCI की नीलामी में गेहूं पर लगी ऊंची बोलियां, ₹3,100 के पार दाम; मिल मालिकों की बढ़ी परेशानी

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 31 Oct 2026 08:26 AM IST
सार

  • एफसीआई की ओएमएसएस नीलामी में गेहूं की ऊंची कीमतों पर लगी बोलियां।
  • 28 अक्टूबर की नीलामी में ज्यादातर राज्यों में औसत बिक्री मूल्य बढ़ा।
  • गेहूं का आवंटन घटकर 1.01 लाख टन रह गया, खरीद की सीमा भी बनी चुनौती।
  • पंजाब में 3,200 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंची गेहूं की बोली।

गेहूं की सरकारी खरीद
गेहूं की सरकारी खरीद - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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भारतीय खाद्य निगम की इस हफ्ते की खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) की नीलामी में बड़ी संख्या में खरीदारों ने ऊंचे दामों पर गेहूं की बोली लगाई है। सरकार द्वारा यह योजना खुले बाजार में चावल और गेहूं की कीमतों को बढ़ने से रोकने के लिए चलाई जा रही है। 28 अक्टूबर को हुई साप्ताहिक नीलामी में, हरियाणा को छोड़कर ज्यादातर राज्यों में गेहूं की औसत बिक्री कीमत पिछले हफ्ते के मुकाबले ज्यादा दर्ज की गई। आपूर्ति में कमी और खरीद की अधिकतम सीमा तय किए जाने के बीच यह उछाल देखने को मिला है।

बिक्री की मात्रा और खरीद की सीमा घटी
सरकार ने 28 अक्टूबर की नीलामी के लिए गेहूं के कुल आवंटन को पिछले टेंडर की तुलना में 5,000 टन घटा दिया है। अब यह मात्रा केवल 1.01 लाख टन रह गई है। जहां पूरे देश में गेहूं का औसत थोक मूल्य 2,910 रुपये प्रति क्विंटल चल रहा था, वहीं इस नीलामी में कई राज्यों के मिल मालिकों ने अनाज खरीदने के लिए 3,100 रुपये प्रति क्विंटल से भी ज्यादा की बोली लगाई। विशेषज्ञों के अनुसार, नीलामी में कम गेहूं उपलब्ध कराना कीमतों के बढ़ने का पहला बड़ा कारण है। इसका दूसरा कारण हर खरीदार के लिए अधिकतम मात्रा की सीमा तय कर देना है।

मिल मालिकों की परेशानी और स्टॉक की स्थिति
एक उद्योग विशेषज्ञ के अनुसार, एक औसत आटा मिल को अपना काम चलाने के लिए महीने में कम से कम 3,000 टन गेहूं की जरूरत होती है। लेकिन सरकार ने खरीद की सीमा 300 टन तय कर दी है, जिससे मिलों को उनकी मासिक जरूरत का आधा हिस्सा भी नहीं मिल पा रहा है। विशेषज्ञों की मांग है कि सरकार को और ज्यादा गेहूं जारी करना चाहिए क्योंकि 1 अक्टूबर तक एफसीआई के पास 463 लाख टन से अधिक का भारी स्टॉक मौजूद था। बफर नियमों के अनुसार, किसी भी साल 1 अक्टूबर को सरकारी रिजर्व में कम से कम 205.2 लाख टन गेहूं होना जरूरी है। वहीं, 1 अक्टूबर 2025 को सरकार के पास लगभग 320 लाख टन गेहूं का स्टॉक था। सरकार द्वारा स्टॉक की जानकारी देना अनिवार्य किए जाने के बावजूद बाजार में गेहूं की आवक कम हो गई है। इस कारण मिल मालिक अब पूरी तरह से एफसीआई की नीलामी पर ही निर्भर हो गए हैं।

पंजाब में ऊंची बोलियां और देश में रिकॉर्ड उत्पादन
इस नीलामी में पंजाब को सबसे ज्यादा 25,000 टन गेहूं का आवंटन मिला था। यहां मिल मालिकों ने 2,830 रुपये से लेकर 3,200 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बोली लगाई। 203 खरीदारों में से केवल छह ने ही 2,900 रुपये प्रति क्विंटल से कम की बोली लगाई थी। पंजाब में गेहूं की औसत बिक्री कीमत पिछले सप्ताह के 2,982 रुपये से बढ़कर इस बार 2,992 रुपये प्रति क्विंटल हो गई। पंजाब रोलर फ्लोर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश घई के अनुसार, एक गोदाम में गेहूं की मात्रा 500 टन तय करने के बजाय, आसपास के क्षेत्रों में मिलों की संख्या के आधार पर तय की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि साप्ताहिक नीलामी में कम से कम 40,000 टन गेहूं उपलब्ध कराया जाए।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, उत्पादन और खरीद दोनों में इस बार इजाफा हुआ है। 2026-27 के सीजन में सरकार ने 357.57 लाख टन गेहूं की खरीद की है, जबकि इसके पिछले विपणन सीजन (2025-26) में यह खरीद 299.75 लाख टन थी। इसके साथ ही, 2025-26 के फसल वर्ष में भारत का गेहूं उत्पादन भी पिछले वर्ष के 117.95 मिलियन टन से बढ़कर 120.66 मिलियन टन के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।


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