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अल नीनो से सुस्त पड़ सकती है दूध उत्पादन की रफ्तार : चारे की कमी की चेतावनी, किसानों को रास आईं ये नस्लें...

गांव जंक्शन डेस्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Saraswat Updated Sat, 31 Oct 2026 09:03 AM IST
सार

  • अल नीनो के चलते 2027 में दूध उत्पादन की रफ्तार धीमी रहने का अनुमान।
  • सूखे और चारे की कमी से प्रभावित हो सकता है दूध उत्पादन।
  • मक्खन और दूध पाउडर के उत्पादन में बढ़ोतरी की संभावना।
  • घरेलू मांग बढ़ने से डेयरी उत्पादों के निर्यात में आ सकती है कमी।

दूध उत्पादन में सुस्ती का खतरा।
दूध उत्पादन में सुस्ती का खतरा। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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अमेरिकी कृषि विभाग की विदेशी कृषि सेवा (यूएसडीए- के अनुसार, अल नीनो के कारण पड़ने वाले सूखे की स्थिति से देश में पशुओं के चारे की उपलब्धता में कमी आने की आशंका है। इस वजह से पशुओं की क्षमता प्रभावित होगी, जिससे अगले साल देश में दूध उत्पादन की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।

डेयरी उत्पादों का उत्पादन और खपत
यूएसडीए की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2027 में मक्खन (बटर) का उत्पादन 2.2 प्रतिशत बढ़कर 7.6 मिलियन टन होने का अनुमान है, जबकि स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) का उत्पादन 2.5 प्रतिशत बढ़कर 8,10,000 टन होने की उम्मीद है। हालांकि, देश में ऊंची कीमतों और सीमित आपूर्ति के कारण डेयरी उत्पादों के निर्यात में कमी आ सकती है। घरेलू स्तर पर मजबूत मांग के चलते 2027 के दौरान एसएमपी का निर्यात घटकर लगभग आधा, यानी 7,000 टन रहने का अनुमान है।

भारत दुनिया में दूध का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जहां शाकाहारी आबादी के लिए दूध और इसके उत्पाद प्रोटीन का सबसे मुख्य स्रोत हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2027 में पीने वाले (तरल) दूध की खपत 2 प्रतिशत से थोड़ी अधिक बढ़कर 95 मिलियन टन होने का अनुमान है, जबकि प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) इकाइयों की खपत लगभग 2 प्रतिशत बढ़कर 131.5 मिलियन टन होने की संभावना है। लोगों की बढ़ती आय, मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता और घरेलू आपूर्ति में सुधार के कारण खपत में यह वृद्धि देखने को मिल रही है।

अच्छी नस्ल के पशुओं की ओर किसानों का रुझान
दूध उत्पादन की रफ्तार में यह कमी ऐसे समय में आने का अनुमान है, जब साल 2025 में सामान्य से अधिक मानसून के कारण चारे की अच्छी उपलब्धता थी और 2026 में दूध उत्पादन में सुधार दर्ज किया गया था। रिपोर्ट में बताया गया है कि 2027 में दूध देने वाली गायों की संख्या 1.3 प्रतिशत बढ़कर 6.33 करोड़ (63.3 मिलियन) होने की उम्मीद है। किसान अब कम दूध देने वाले साधारण पशुओं की जगह ज्यादा दूध देने वाली संकर (क्रॉसब्रीड) गायों और देसी भैंसों को पालने पर तेजी से शिफ्ट हो रहे हैं। बेहतर पशुपालन के तरीके, सरकार द्वारा चलाए जा रहे नस्ल सुधार और बीमारी-नियंत्रण कार्यक्रमों से भी उत्पादन को सहारा मिलने की उम्मीद है, लेकिन अल नीनो मौसम अगले साल की वृद्धि पर भारी पड़ सकता है।

डेयरी क्षेत्र की स्थिति और प्रमुख राज्य
भारत के डेयरी क्षेत्र में आज भी मुख्य रूप से छोटे किसानों का दबदबा है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 95 प्रतिशत दुग्ध उत्पादकों के पास केवल एक से लेकर पांच तक ही पशु हैं। हालांकि, सरकारी कार्यक्रमों के सहयोग और सहकारी तथा निजी डेयरी नेटवर्क के फैलाव से 20 या उससे अधिक पशुओं वाले बड़े डेयरी फार्मों की संख्या धीरे-धीरे बढ़ रही है।

देश में दूध का उत्पादन काफी हद तक छह प्रमुख राज्यों पर निर्भर है। इनमें उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और पंजाब शामिल हैं। भारत के कुल दूध उत्पादन का 60 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा अकेले इन्हीं छह राज्यों से प्राप्त होता है।


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